क्यों होता है कि किसी बड़़ी हस्ती को खोने के बाद ही हमें उस कारण का अहसास होता है जो हमारी जानकारी में होता तो है लैकिन हम उसकी उपेक्षा कर दिया करते हैं। टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री की कार हादसे में मौत ने एक बार फिर भारत में सड़क सुरक्षा के नियमों की अनदेखी की तरफ ध्यान आकर्षित किया है। प्रतिवर्ष सड़क हादसों में भारत में हजारों लोग मारे जाते हैं और यह संख्या हर साल बढ़ती ही जा रही है। इसका कारण है छोटी छोटी लापरवाहियां जो जिंदगी पर भारी पड़़ जाती हैं। हालांकि अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हुआ है कि साइरस की मौत किन परिस्थितियों में हुई लेकिन प्रथम दृष्टया जो बात निकलकर आई है वह यह कि उन्होने सीट बेल्ट नहीं लगाई हुई थी। कार की पिछली सीट पर बैठे ५४ वर्षीय मिस्त्री और उनके बगल में बैठे एक सह यात्री की हादसे के बाद तत्काल ही मृत्यु हो गई थी‚ जबकि गाड़ी चलाने वाली महिला और उनके बगल में बैठे व्यक्ति को चोटें तो आई लेकिन उनकी जान बच गई। दुखद है कि भारत में आम तौर पर सीट बेल्ट पहनने को अहमियत नहीं दी जाती है और पिछली सीट पर बैठे यात्री तो लगभग कभी भी सीट बेल्ट नहीं लगाते। एक एनजीओ सेवलाइफ फाउंडेशन के एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में पिछली सीट पर बैठने वाले एक प्रतिशत से भी कम लोग सीट बेल्ट का इस्तेमाल करतेहैं। २०२० में ही सीट बेल्ट ना लगाने वाले कम से कम १५‚१४६ लोगों ने हादसों में जान गंवाई थी। आम धारणा है कि कि सीट बेल्ट सिर्फ अगली सीट पर बैठे लोगों के लिए अनिवार्य होती है। कानूनन चलते वाहन में आगे और पीछे दोनों तरफ बैठे यात्रियों का सीट बेल्ट लगना अनिवार्य है। वरना १‚००० रु पए जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस भी इस नियम के पालन पर ज्यादा सख्ती नहीं करती। यह सड़़क परिवहन मंत्रालय की भी कमी है क्योंकि देश में अधिकांश वाहन ऐसे चल रहे हैं जिनमें पिछली सीट पर बेल्ट का प्रावधान है ही नहीं। पिछले कुछ सालों में ही आगे पीछे सीट बेल्ट वाली कारें आना शुरू हुई हैं। अब कहा जा रहा है कि पिछली सीट पर बेल्ट न लगाने पर भी वाहन चलने से पहले अलर्ट का संकेत मिलेगा। यहां यह भी जांच का विषय है कि क्या अति सुरक्षित मर्सिड़ीज कार में पिछली सीट के एयरबैग खुले थे या नहीं। वे खुल जाते तो शायद साइरस आज भी हमारे बीच होते।







