भाजपा ने बिहार विधान परिषद के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है. भाजपा ने अपने पुराने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है. इस बार जाति के साथ-साथ भाजपा ने इलाके का भी ख्याल रखा है. दक्षिण बिहार के जहानाबाद इलाके से पुराने कार्यकर्ता अनिल शर्मा जहां सवर्ण हैं, वहीं उत्तर बिहार के दरभंगा इलाके से हरि सहनी अति पिछड़ी जाति से आते हैं. संभवतः दोनों कल अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। अन्य पार्टियों की तरह इस BJP ने भी भले अपने पुराने सिपाही पर ही भरोसा जताया है। लेकिन इसके बहाने पार्टी ने अपने नाराज खेमों को संदेश देने की कोशिश की है।
अनिल शर्मा के बहाने भूमिहार और हरी साहनी के बहाने मल्लाह के समीकरण को साधने की कोशिश की गयी है। दोनों पार्टी के साथ वर्षों से जुड़े हैं और संगठन के अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं। दोनों फिलहाल प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य हैं।
किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं अनिल शर्मा
अनिल शर्मा का संघ से पुराना नाता रहा है। बेजेपी के एक नेता ने बताया कि अनिल शर्मा के पिताजी भी संघ से जुड़े हुए थे। शर्मा पिछले कई वर्षों से संगठन से जुड़े हुए हैं। के किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष के साथ महामंत्री के पद पर भी राह चुके हैं। इसके अलावा अलग-अलग समय पर पार्टी की ओर से दिए गए दायित्वों का भी इन्होंने बखूबी निभाया है।
दरभंगा के दो बार जिलाध्यक्ष रहे हैं हरि साहनी
पार्टी के दूसरे प्रत्याशी हरि साहनी को दरभंगा में पार्टी का एक बड़ा चेहरा माना जाता है। ये दो-दो बार जिलाध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं। इसके अलावा संगठन के कई बड़े कार्यक्रमों का इन्होंने सफलतापूर्वक आयोजन किया है।नाराज खेमों को संदेश देने की कोशिशइन दो नामों के साथ बेजेपी ने नाराज खेमों को एक संदेश देने की कोशिश की है। दरभंगा के इलाके में बड़ी आवादी मल्लाहों की है। मुकेश साहनी की पार्टी वीआईपी को तोड़ने और उनसे मंत्री पद छिनने के बाद मल्लाह बीजेपी से नाराज चल रहे थे। ऐसे में एक मल्लाह की जगह दूसरे मल्लाह को उच्च सदन भेज कर पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करन की कोशिश की है।
अनिल शर्मा के बहाने अगड़ों को साधने की कोशिश
वहीं अगड़ों में खिसकते जनाधार को साधने के लिए पार्टी ने अनिल शर्मा पर दांव खेला है। अनिल शर्मा जहानाबाद के हैं और भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं। बोचहां उपचुनाव में मिली हार के बाद पार्टी लगतार इस खेमें कई नाराजगी डोर करने में जुटी है। यही कारण है कि देवेश कुमार के बा अब पार्टी ने अनिल शर्मा को विधान परिषद भेजने का निर्णय लिया है।







