बाकी बच्चों की तरह मैं भी स्कूल में पढ़ना चाहता हूं, हम बच्चे हैं तो भेदभाव क्यों? बाल गृह के एक बच्चे ने जब समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी के सामने शिक्षा पाने के प्रति यह ललक दिखाई तो उन्होंने कहा कि अगले सत्र से बाल गृहों में रहने वाले लड़के और लड़कियां सामान्य सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे। बाल गृहों से बच्चों के लिए बसें चलेंगी। वे अधिवेशन भवन में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस पर बाल दरबार में बच्चों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि बाल गृहों के बच्चों को नियमित पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। जहां खेल के मैदान नहीं हैं, वहां खेल के लिए व्यवस्था होगी। साथ-साथ बालिग होने पर बच्चों के हुनर के अनुसार रोजगार से जोड़ा जाएगा। समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव अतुल प्रसाद ने कहा कि कोरोना में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों की शिक्षा की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
समाज कल्याण निदेशालय के निदेशक राजकुमार ने बाल गृहों के बच्चों के लिए 12 जगहों पर एक साल में तीन एकड़ में वृहत बाल गृह की व्यवस्था करने की बात कही। इसके लिए 354.54 करोड़ राशि स्वीकृत हुई है। दहेज प्रथा को लेकर एक बच्ची के सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास निगम की प्रबंध निदेशक हरजोत कौर ने कहा कि जब समाज में ड़का-लड़की में भेद करना बंद हो जाएगा और बच्चियां शिक्षित, सजग एवं सशक्त होंगी, तो दहेज जैसी समस्याओं पर स्वत: रोक लग जाएगी। यूनिसेफ बिहार राज्य प्रमुख नफीसा बिन्ते शफीक ने कहा कि शिक्षा बच्चों का अधिकार है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेवारी है। बच्चों को भी नियमित स्कूल जाकर व पढ़ाई पर ध्यान देकर कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। एसपी, कमजोर वर्ग, वीणा कुमारी, सुनंदा पांडे, बीरेन्द्र कुमार, संयुक्त श्रम आयुक्त और यूनिसेफ के अधिकारी मौजूद रहे।
घर से भागी और मानव तस्करी से मुक्त करायी गई लड़कियों के लिए रक्षा गृह खुलेगा। महिला एवं बाल विकास निगम सभी जिलों में रक्षा गृह खोलेगा। इन रक्षा गृह में 50 लड़कियों को रखने की व्यवस्था होगी। अभी बालिका गृह में घर भागी हुई, भूली भटकी और आपराधिक घटनाओं में संलिप्त लड़कियों को एक साथ रखा जाता है। इससे सामान्य लड़कियों को दिक्कत होती है।
समाज कल्याण निदेशालय के निदेशक राजकुमार ने बताया कि सभी जिलों में रक्षा गृह बनेगा। उन्होंने बताया कि रक्षा गृह में सुरक्षा के साथ उनके हुनर को निखारने का काम किया जाएगा। बता दें कि महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से पहले भी पांच जिलों में रक्षा गृह खोले गये थे। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के बाद रक्षा गृह को बंद कर दिया गया था। इसके कारण घर से भागी और मानव तस्करी से मुक्त करायी गई लड़कियों को भूली भटकी लड़कियों के साथ रखा जाने लगा है। इसके कारण सामान्य लड़्कियां खुद को असहज महसूस करती हैं।
भागकर बाल विवाह करने वाली लड़कियों कोई नहीं अपनाता
भाग कर बाल विवाह करने वाली लड़कियों के लिए जीना मुश्किल हो रहा है। भागकर बाल विवाह करने वाली लड़कियों को न तो मायके वाले रखना चाहते हैं और न ही ससुराल वाले। ऐसी स्थिति में लड़की बालिका गृह में रहने को मजबूर हो रही है। नादानी में उठाये गये कदम उनके जिंदगी के नासूर बन जाता है।
पढ़ाई, लिखाई से लेकर सामाजिक जीवन खत्म हो जाता है। इसके बाद उन्हें को आपराधिक प्रवृति वाली लड़कियों के साथ जीवन गुजर बसर करना पड़ता है। इन लड़कियों के लिए रक्षा गृह जिंदगी जीने की नई राह बनाएगा। उन्हें रक्षा गृह में पढ़ाई-लिखाई के साथ जीवन कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बालिका गृह में अभी सबसे अधिक भागकर बाल विवाह करने वाली लड़कियों की संख्या है।







