राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा है कि काले कृषि कानून की वापसी किसान‚ मजदूर व मेहनतकशों की जीत है। उन्होंने विश्व के सबसे लंबे‚ शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई दी है। यह लोकतंत्र‚ संविधान और देश की भी जीत है। पूंजीपरस्त अहंकारी सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी‚ खालिस्तानी‚ आढतिए‚ मुट्ठीभर लोग‚ देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द्र को खंड–खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में एक अविश्वास पैदा किया। देश संयम‚ शालीनता और सहिष्णुता के साथ–साथ विवेकपूर्ण‚ लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है न कि पहलवानी से! बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए॥। प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि यह किसान की जीत है‚ देश की जीत है। यह पूंजीपतियों‚ उनके रखवालों‚ नीतीश–भाजपा सरकार और उनके अंहकार की हार है। विश्व के सबसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक किसान आंदोलन ने पूंजीपरस्त सरकार को झुकने पर मजबूर किया। आंदोलनजीवियों ने दिखाया कि एकता में शक्ति है। यह सबों की सामूहिक जीत है। बिहार और देश में व्याप्त बेरोजगारी‚ महंगाई‚ निजीकरण के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी। भाजपाई उपचुनाव हारे तो इन्होंने पेट्रोल–डीजल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोडा–सा टैक्स कम किया। उत्तरप्रदेश‚ उत्तराखंड‚पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि कानून वापस लेने पड रहे है। बिहार प्रदेश राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने की प्रधानमंत्री के द्वारा की गई घोषणा को किसानों तथा देश के आमजनों के आंदोलन और समर्थन की जीत बताया।
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