ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों में विस्फोट हो गया। IRGC ने बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की गलत जानकारी के कारण दोनों टैंकर समुद्र में बिछी माइंस से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को झूठा बताया। वहीं, CENTCOM ने कहा कि उसने लगातार सातवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों, हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं पर हमले किए। अल जजीरा के मुताबिक, इन हमलों में सीरिक, बुशेहर, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और यज्द को निशाना बनाया गया। उधर, ईरानी सांसद अहमद बख्शायेश अर्देस्तानी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया, तो ईरान कुवैत और बहरीन में घुस जाएगा और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तबाह कर देगा।
ट्रम्प से मुलाकात नहीं होने पर नेतन्याहू ने टाला अमेरिका दौरा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की अटकलों के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का अगले सप्ताह होने वाला अमेरिका दौरा टल गया है। नेतन्याहू के कार्यालय ने गुरुवार को बताया कि वह अब अगले सप्ताह अमेरिका नहीं जाएंगे। पहले एक वरिष्ठ इजराइली अधिकारी ने कहा था कि नेतन्याहू शनिवार रात अमेरिका रवाना होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, अब नेतन्याहू महीने के आखिर में अमेरिका जाएंगे। बयान में कहा गया कि अमेरिका के सीनेटर लिंडसे ग्राहम का अंतिम संस्कार अब महीने के आखिर में होगा, इसलिए यात्रा का कार्यक्रम बदला गया है। इजराइल के लंबे समय से समर्थक और नेतन्याहू के करीबी माने जाने वाले 71 वर्षीय ग्राहम का इस सप्ताह अचानक निधन हो गया।
अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को और बड़ा करने की तैयारी में है !
अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को और बड़ा करने की तैयारी में है. इसी रणनीति के तहत वह इजराइल में दर्जनों अतिरिक्त एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान भेज रहा है, ताकि लंबी दूरी के लड़ाकू और बॉम्बर विमान बिना रुके लगातार मिशन चला सकें. इजराइल में पहले से ही 60 से ज्यादा अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान मौजूद है. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने इजराइल को इस बड़े तैनाती के बारे में सूचित कर दिया है. आइए समझते हैं कि अमेरिका का यह नया वॉर प्लान क्या है, जमीन पर क्या हालात हैं और इजराइल में इन विमानों को लेकर घरेलू राजनीति क्यों गरमा गई है…
1. इजराइल में कितने विमान हैं और क्यों भेजे जा रहे हैं?
फिलहाल इजराइल के पास लगभग 60 अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान तैनात हैं. 30 विमान तेल अवीव के पास बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर और 30 विमान दक्षिणी इजराइल के रेमन एयरपोर्ट पर. आने वाले दिनों में पेंटागन दर्जनों और विमानों को इजराइल भेजने की तैयारी में है. इसका मकसद विमानों के बेड़े को युद्ध की शुरुआत वाले स्तर पर वापस लाना है. पेंटागन इन विमानों को बेन गुरियन एयरपोर्ट पर रखना चाहता है क्योंकि क्षेत्र के अन्य एयरबेस पर ईरान के मिसाइल या ड्रोन हमलों का खतरा अधिक माना जा रहा है.
2. ट्रंप प्रशासन के टेबल पर क्या हैं विकल्प?
मंगलवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ट्रंप को कई नए सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई. ट्रंप अब होर्मुज स्ट्रेट से आगे बढ़कर ईरान के अंदर बड़े हमलों पर विचार कर रहे हैं. हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने और अमेरिकी परमाणु शर्तों को मानने के लिए मजबूर करना चाहता है.
ये हैं संभावित निशाने
- बुनियादी ढांचा: ईरान के पावर प्लांट (बिजली संयंत्र) पर बमबारी.
- परमाणु ठिकाने: ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को और गहराई में दफन करने के लिए उसके न्यूक्लियर साइट्स पर स्ट्राइक.
- पिकएक्स माउंटेन: इस साइट पर एक संदिग्ध भूमिगत परमाणु सुविधा बनाई जा रही है, जो अमेरिकी रडार पर है.
3. कहां-कहां हो रहे हैं हमले?
होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के दक्षिणी तट पर अमेरिकी हमले लगातार सातवें दिन भी जारी रहे. अमेरिका ने बंदर अब्बास के पास कम से कम सात पुलों को तबाह कर दिया है. बंदर अब्बास ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब है, जहां से होर्मुज में गोला-बारूद और रसद की सप्लाई की जाती है. बदले में ईरान ने जॉर्डन, कतर, बहरीन, इराक और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अपने हमले तेज कर दिए हैं. IRGC ने सीरिया में भी एक अमेरिकी बेस पर हमले का दावा किया है, हालांकि सच्चाई यह है कि अमेरिकी सैनिक महीनों पहले ही वह बेस खाली कर चुके थे.
4. इजराइल में इन विमानों पर क्यों मचा है सियासी बवाल?
अमेरिका की यह सैन्य तैयारी इजराइल की घरेलू राजनीति के लिए सिरदर्द बन गई है. जब युद्ध चरम पर था और इजराइल का एयरस्पेस बंद था, तब बेन गुरियन एयरपोर्ट पर इन अमेरिकी विमानों की मौजूदगी कोई मुद्दा नहीं थी. लेकिन अब, जब गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं और कमर्शियल उड़ानें शुरू हो चुकी हैं, दर्जनों विशालकाय सैन्य विमानों की पार्किंग से यात्री उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द होने का खतरा है.
इजराइल में सिर्फ तीन महीने बाद चुनाव होने हैं. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहयोगी और परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने मांग की है कि इन विमानों को बेन गुरियन से हटाया जाए या इनकी संख्या सीमित की जाए. लेकिन इजराइली रक्षा मंत्रालय और इजराइली सेना ने इसका विरोध किया है. वाशिंगटन ने इजराइल से इन विमानों को जगह देने की अपील की है और अब अंतिम फैसला नेतन्याहू को करना है.
फिलहाल भारी जवाबी कार्रवाई के डर से ईरान ने इजराइल पर सीधे हमले से परहेज किया है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने इजराइल पर कोई भी हमला किया, तो उसे पहले की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी जवाब मिलेगा.
अमेरिका के साथ समझौते पर ईरान में घमासान, कट्टरपंथियों ने तख्तापलट की आशंका जताई
अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते को लेकर ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष तेज होता दिख रहा है। देश के कट्टरपंथी धड़े राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर देश के सिद्धांतों से समझौता करने का आरोप लगा रहे हैं।
कट्टरपंथियों का दावा है कि अमेरिका के साथ समझौता करने वाले नेता सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और यह एक तरह का तख्तापलट है।
पिछले सप्ताह तेहरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर सामने आई। राष्ट्रपति पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारे लगाए।
इसी दौरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अमेरिका के साथ युद्धविराम वार्ता में अहम भूमिका निभाने वाले अराघची पर भीड़ ने पत्थर फेंके और उन्हें “गद्दार” कहकर नारे लगाए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें वहां से निकलना पड़ा।
कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्या ईरान में तख्तापलट होने वाला है? उन्होंने कहा कि खामेनेई की मौत का बदला लेने के बजाय सरकार समझौते की राह पर चल रही है।
अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे और उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता माना जा रहा है, लेकिन वह अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर नेतृत्व करते दिखाई दिए हैं।
ऐसे में राष्ट्रपति पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ और विदेश मंत्री अराघची ही सरकार के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। ऐसे में कट्टरपंथी इन्हीं नेताओं पर सत्ता हथियाने का आरोप लगा रहे हैं।
ईरान में अमेरिकी हमलों में 7 नागरिकों की मौत का दावा
ईरान के दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत में पिछले दो दिनों के अमेरिकी हमलों में 7 लोगों की मौत हुई है। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, प्रांत के सांसद अहमद मोरादी ने कहा कि सभी मृतक नागरिक थे।
रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी हमले में प्रांत के एक पुल को निशाना बनाया गया। इस दौरान वहां से गुजर रही दो कारें भी चपेट में आ गईं, जिससे 6 लोगों की मौत हो गई।
बंदर अब्बास के तप्पे अल्लाह अकबर इलाके में हुए एक अन्य हमले में एक महिला की मौत हुई, जबकि उसका एक साल का बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका एक हाथ काटना पड़ा। वहीं, पेट्रोल पंपों तक ईंधन पहुंचाने वाला एक टैंकर चालक भी आग लगने से मारा गया।







