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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू, 99% भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क………………

UB India News by UB India News
July 16, 2026
in अन्तर्राष्ट्रीय
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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता आज से लागू, 99% भारतीय निर्यात पर शून्य शुल्क………………

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भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) आज से लागू हो गया है। इसे पिछले कुछ वर्षों में भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को जबरदस्त लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है।

भारत-यूके सीईटीए केवल टैरिफ घटाने वाला समझौता नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का व्यापक ढांचा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह भारत के व्यापारिक इतिहास का एक अहम पड़ाव है। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी। भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों, उद्योगों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप तथा युवा पेशेवरों को नए अवसर मिलेंगे।

भारत को ये होंगे लाभ
इस करार से भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटाया जाएगा। इससे कीमतों में कमी आएगी। पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की करीब 40 हजार उच्च मूल्य वाली निविदाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। परिवहन, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कामकाज की गुणवत्ता में सुधार होगा।

क्या है सीईटीए?
सीईटीए के तहत भारत और ब्रिटेन सैकड़ों उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेंगे। इसके अलावा डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, एमएसएमई, निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण और सेवा क्षेत्र से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया गया है। समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिससे इसे भारत का सबसे व्यापक एफटीए माना जा रहा है।

स्कॉच व्हिस्की के दाम घटेंगे
स्कॉच व्हिस्की समेत कई प्रीमियम विदेशी शराबों पर भी आयात शुल्क में कटौती होगी। स्कॉच व्हिस्की पर मौजूदा 150 फीसदी शुल्क पहले चरण में 75 फीसदी और दस वर्षों में घटकर 40 फीसदी रह जाएगा।

संवेदनशील उत्पाद समझौते से बाहर
भारत ने सेब, अखरोट, व्हे, कुछ बीज, सोने की ईंटों व स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। वहीं ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी व कुछ मांस उत्पादों को समझौते के दायरे से बाहर रखा है।

आईटी कंपनियों के लिए बड़ी राहत
समझौते के साथ लागू हुए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्ष तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा।

सबसे बड़ा बदलाव ऑटो सेक्टर में
यह पहला मौका है, जब भारत ने किसी एफटीए में ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह बनी कारों पर आयात शुल्क 110 फीसदी से चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही रियायत मिलेगी।

इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से रियायत मिलेगी, ताकि भारतीय ईवी उद्योग को शुरुआती पांच वर्षों तक सुरक्षा मिल सके। पहले 15 वर्षों में रियायती शुल्क पर 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी। ट्रकों पर शुल्क 44 फीसदी से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8 फीसदी हो जाएगा।

किन उद्योगों को फायदा?
रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन उद्योग, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल और सब्जियां, मसाले, मछली और समुद्री उत्पाद, मांस एवं प्रोसेस्ड फूड, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट एवं स्टोन उत्पाद

क्या हो सकता है सस्ता?
सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम, नेल पॉलिश

भारत-ब्रिटेन के बीच एफटीए मंजूर हुआ तो भारत को किस तरह होगा फायदा?
रिपोर्ट्स की मानें तो भारत को एफटीए के तहत सबसे बड़ा फायदा निर्यात क्षेत्र में मिलेगा। भारत का निर्यात आने वाले कुछ वर्षों में 10 से 12 अरब डॉलर (करीब 86 हजार करोड़ से 1.1 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ सकता है।

1. ब्रिटेन को होने वाले 99% निर्यात पर शून्य होगा टैरिफ
ब्रिटिश अखबार ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते से भारत की अधिकतर वस्तुओं-सेवाओं पर आयात शुल्क खत्म कर दिया जाएगा। इससे भारत के निर्यात सेक्टर को ब्रिटेन में सामान बेचने के जबरदस्त मौके मिलेंगे।

2. सेवा क्षेत्र को मिलेगी बढ़ोतरी
एफटीए के जरिए भारत के सेवा क्षेत्र को भी काफी फायदा मिलने की संभावना है। दरअसल, भारत वस्तुओं के साथ सेवाओं का बड़ा प्रदाता है। खासकर पेशेवर सेक्टर्स में, जैसे वित्तीय सेवाओं में, आईटी सेक्टर में और शिक्षा क्षेत्र में। भारत के सेवा क्षेत्र के लिए ब्रिटेन का लगातार बढ़ता वित्तीय और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी बेहतर बाजार है।

3. श्रम आधारित सेक्टरों को फायदा
वस्तुओं और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ भारत के श्रम आधारित सेक्टर को भी ब्रिटेन में जबरदस्त फायदा मिलेगा। योग प्रशिक्षक, शेफ और अन्य स्वतंत्र कर्मियों को एफटीए के जरिए सेवाओं में खासी छूट और नए मौके मिलेंगे।

4. ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा योगदान से मिलेगी छूट
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते में एक अहम नियम यह रखा गया है कि इससे ब्रिटेन में काम कर रहे भारतीय कर्मियों को सामाजिक सेवा के लिए किए जाने वाले भुगतान से तीन साल की छूट मुहैया कराई जाएगी। इससे भारत के उन उद्योगों और कंपनियों को फायदा मिलेगा, जो कि ब्रिटेन में पहले से ही काम कर रहे हैं या भविष्य में ब्रिटेन में उद्योग खड़ा करना चाहते हैं। इससे ब्रिटिश बाजार में ही भारत की कंपनियों को प्रतियोगिता देने में भी मदद मिलेगी। इस छूट से भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन में हर साल अनुमानित 40 अरब रुपये तक बचाने में मदद मिलेगी।

भारत से मुक्त व्यापार समझौते से ब्रिटेन को कैसे होगा लाभ?
दूसरी तरफ भारत से एफटीए के जरिए ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर हर साल करीब 4.8 अरब पाउंड (56 हजार करोड़ रुपये) का फायदा होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि 2040 तक ब्रिटेन की जीडीपी भी इस समझौते के जरिए तेजी से बढ़ सकती है।

1. ब्रिटेन के 90 फीसदी उत्पादों-सेवाओं को टैरिफ से मिलेगी छूट
भारत ने ब्रिटेन से आयात होने वाले करीब 90 फीसदी उत्पादों और सेवाओं पर टैरिफ में बड़ी कमी करने का फैसला किया है। हालांकि, यह कटौती चरणबद्ध तरीके से होगी। इनमें सबसे बड़ी छूट ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की को मिलेगी, जिसे एफटीए लागू होने के ठीक बाद भारत में 150 फीसदी टैरिफ से सीधे 75 फीसदी टैरिफ के वर्ग में पहुंचा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, अगले एक दशक में यह टैरिफ घटाते हुए 40 फीसदी पर पहुंचा दिया जाएगा। यानी ब्रिटिश स्कॉच-व्हिस्की भारत में काफी सस्ती हो जाएंगी।

दूसरी तरफ ब्रिटेन की कारें भी भारत में सस्ती होने का अनुमान है। दरअसल, अभी भारत की तरफ से ब्रिटिश कारों पर 100 फीसदी से ज्यादा टैरिफ लगाया जाता है। हालांकि, एफटीए के बाद यह टैरिफ 10 फीसदी तक आ जाएगा। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले मेडिकल उपकरण, कॉस्मेटिक्स,  फार्मा उत्पादन, एयरक्राफ्ट के पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को टैरिफ में छूट मिलेगी और ब्रिटिश कंपनियां भारत में नया बाजार तलाशने में सफल होंगी। ब्रिटेन से निर्यात वाले कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे- भेड़, सैल्मन, चॉकलेट और बिस्किट पर भी भारत टैरिफ को कम करेगा। ब्रिटिश सरकार का अनुमान है कि इन चीजों पर कम टैरिफ के जरिए ब्रिटेन के निर्यात से हर साल 40 करोड़ पाउंड (4500 करोड़ रुपये) तक बचा लेंगे, जो कि बाद में 90 करोड़ पाउंड (10,500 करोड़) तक पहुंच जाएगा।

2. भारत के गैर-संवेदनशील सेक्टर्स में निवेश कर सकेगा ब्रिटेन
भारत की तरफ से ब्रिटेन के निर्यातकों को असंवेदनशील क्षेत्रों में एंट्री का मौका दिया जाएगा। यानी ब्रिटिश कंपनियां अब भारत के केंद्रीय और राज्य आधारित संस्थानों में टेंडर भर सकेंगी।

3. ब्रिटिश कंपनियों को भारत में मिलेगी आसान एंट्री
इसके अलावा ब्रिटेन के वित्तीय, निर्माण, टेलीकॉम और पेशेवर सेवाओं को भी भारत में गारंटी के साथ पहुंच का प्रावधान एफटीए में किया गया है। माना जा रहा है कि सबसे बड़ा फायदा ब्रिटेन के बैंकिंग और बीमा सेक्टर को होगा, जो कि अपने कार्यक्रमों से भारत की बड़ी आबादी को लुभा सकेंगी। इसके अलावा ब्रिटेन की वकीलों की फर्म्स और अकाउंटिंग फर्म भी भारत के बाजार में एंट्री ले सकती हैं।

4. भू-राजनीतिक और कूटनीतिक फायदे
एफटीए के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच भू-राजनीतिक और कूटनीतिक संबंध बढ़ने की संभावनाएं हैं। दोनों ही देश आगे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा ब्रिटेन को चीन की तरह ही भारत का बड़ा बाजार मिल रहा है, जो कि चीन पर उसकी निर्भरता को कम करेगा।

क्या संवेदनशील सेक्टर्स को बचाने में सफल रहेगा भारत?
भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते की सबसे खास बात यही है कि इसमें भारत ने अपने कृषि क्षेत्र को ब्रिटेन की पहुंच से दूर रखा है। यानी ब्रिटेन की कंपनियां फिलहाल भारत के बाजार में अपने उत्पाद नहीं उतार पाएंगी। खासकर डेयरी उत्पाद, सेब, चीज, ओट्स, खाद्य तेल से जुड़े सेक्टर्स को एफटीए से बाहर रखा गया है।

इसके अलावा भारत ने अपने प्लास्टिक, हीरे, चांदी, स्मार्टफोन, टेलीविजन कैमरा ट्यूब्स, ऑप्टिकल फाइबर और केबल्स के क्षेत्र को समझौते में शामिल नहीं किया है।

कुछ और संवेदनशील क्षेत्रों को भारत ने सीधे तौर पर एफटीए से बाहर तो नहीं रखा, लेकिन इन क्षेत्रों में टैरिफ हटाने या कम करने की अवधि को काफी ज्यादा रखा है। इनमें पेट्रोलियम उत्पाद, सेरेमेकि्स, कई तरह के केमिकल, एयरक्राफ्ट इंजन और इंजीनियरिंग से जुड़े उपकरणों पर टैरिफ शामिल हैं।

दोनों देशों को इस एफटीए से कितने फायदे का अनुमान?
भारत और ब्रिटेन के बीच 2024 तक द्विपक्षीय व्यापार करीब 42.6 अरब पाउंड (करीब पांच लाख करोड़ रुपये) का रहा। इस एफटीए के लागू होने के बाद दोनों देश अब व्यापार को 2040 तक हर साल 25.5 अरब पाउंड बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। 2030 तक दोनों के बीच का व्यापार करीब 120 अरब पाउंड तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
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