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वेनेजुएला राजनीतिक बदलाव, आर्थिक संकट और सदी के सबसे बड़े भूकंप की तिहरी मार झेल रहा, भारत पर क्या होगा असर?………………..

UB India News by UB India News
June 26, 2026
in अन्तर्राष्ट्रीय, कारोबार
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वेनेजुएला राजनीतिक बदलाव, आर्थिक संकट और सदी के सबसे बड़े भूकंप की तिहरी मार झेल रहा, भारत पर क्या होगा असर?………………..
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साउथ अमेरिका के देश वेनेजुएला पर संकट के बादल गहराते जा रहे हैं. लंबे समय से इकोनॉमी की मार झेल रहा ये कच्चे तेल से समृद्धि देश ने पहले राजनीतिक उठापटक देखी. राष्ट्रपति मादुरो को अमेरिका ने पकड़ लिया और अब वहां भयानक भूकंप आया है. वेनेजुएला इस समय एक ऐसी त्रासदी और बदलाव की कहानी बन गया है जहां राजनीतिक उथल-पुथल, चरमराती तेल आधारित अर्थव्यवस्था और अब एक विनाशकारी कुदरती आफत. तीनों एक साथ टकरा गए हैं. 24 जून 2026 की शाम वेनेजुएला के लिए किसी कयामत से कम नहीं थी. देश के पश्चिमी हिस्से में बैक-टू-बैक दो भीषण भूकंप आए. USGS के अनुसार, पहला झटका 7.2 तीव्रता का था और ठीक 40 सेकंड बाद आया मुख्य झटका 7.5 तीव्रता का दर्ज किया गया. इन सभी खबरों के बीच यह समझना होगा कि यहां क्रूड ऑयल का भंडार है. ऐसे में इन भूकंप के झटकों से क्या ग्लोबल ऑयल इकोनॉमी में उछाल आएगा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

डेटा बता रहा है कि वेनेजुएला में आया ये भूकंप 126 साल में सबसे भयावह है. इस सबसे भीषण भूकंप ने राजधानी कराकस समेत देश के बड़े हिस्से को हिलाकर रख दिया है. इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं, सड़कें टूट गईं और देश का मुख्य एयरपोर्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है. इस प्राकृतिक आपदा ने वेनेजुएला को ऐसे समय पर चोट दी है जब वह पहले से ही इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक और आर्थिक संक्रमण से गुजर रहा है.

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वेनेजुएला का संकट, टाइमलाइन पर एक नजर

वेनेजुएला पर प्राकृति कहर ढा रही है. मगर इसके इतर बीत एक दशक से वहां के हालात ठीक नहीं हैं.

  1. 2014 – 2024- तेल की कीमतों में गिरावट और मिसमैनेजमेंट के कारण देश में भयंकर महंगाई रही. बुनियादी चीजों जैसे भोजन और दवाओं की भारी किल्लत हो गई.
  2. 2018 – 2025- आर्थिक तंगी और भुखमरी से तंग आकर वेनेजुएला के लगभग 70 से 80 लाख लोग देश छोड़कर पड़ोसी देशों और अमेरिका में शरण लेने को मजबूर हुए.
  3. जनवरी 2026- साल 2026 की शुरुआत एक बड़े भूचाल से हुई. अमेरिकी सेना ने एक विशेष सैन्य अभियान ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व चलाकर तत्कालीन विवादित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया. मादुरो के हटने के बाद देश की कमान उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर संभाली.
  4. फरवरी – मई 2026- नई अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ संबंध सुधारे. तेल क्षेत्रों पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिली, जिससे वेनेजुएला का तेल उत्पादन दोबारा पटरी पर लौटने लगा और यह अप्रैल-मई 2026 में 12.5 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) के स्तर पर पहुंच गया.
  5. 24 जून 2026- जब अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिति थोड़ी संभलती दिख रही थी, तभी 7.2 और 7.5 तीव्रता के दोहरे भूकंप ने पूरे देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया.

क्या वेनेजुएला का भूकंप बढ़ाएगा कच्चे तेल की कीमतें?

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाला देश है. इसके पास सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल रिजर्व हैं. ऐसे में वहां आने वाली कोई भी आफत सीधे ग्लोबल तेल बाजार के कान खड़े कर देती है. तेल की कीमतों में उबाल की आशंका बढ़ने लगती है.

इस भूकंप का कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर होगा, इसे तीन प्वाइंट्स में समझा जा सकता है-

1. सप्लाई चैन और एक्सपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान- भूकंप का केंद्र कराकस के पश्चिम में तटीय इलाकों के करीब था. इस झटके से रिफाइनरियों, पाइपलाइनों और सबसे महत्वपूर्ण तेल एक्सपोर्ट करने वाले बंदरगाहों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. यदि जहाजों में तेल लोडिंग की प्रक्रिया बाधित होती है, तो ग्लोबल बाजार में तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है.

2. वैश्विक बाजार में घबराहट- कमोडिटी मार्केट हमेशा आशंकाओं पर काम करता है. भले ही तेल के कुओं को सीधा नुकसान न हुआ हो, लेकिन सप्लाई रुकने के डर से ही कच्चे तेल की कीमतों में तत्काल उछाल आ सकता है. हालांकि, अभी खबर लिखे जाने तक क्रूड के दाम गिरे हुए हैं. मगर मार्केट इस सेंटीमेंट को कैसे लेता है इसका पता धीरे-धीरे चल जाएगा.

3. रिकवरी पर ब्रेक- वेनेजुएला पिछले 3 महीनों से लगातार अपने तेल उत्पादन को बढ़ा रहा था. मई 2026 में इसने 12.5 लाख बैरल प्रति दिन का आंकड़ा छुआ था, जो 2018 के बाद सबसे ज्यादा था. भूकंप के बाद बिजली संकट और सड़कों के टूटने से इस उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की किल्लत बढ़ जाएगी.

भारत और वेनेजुएला के बीच कितना है तेल व्यापार?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत तेल विदेशों से खरीदता है. वेनेजुएला भारत के लिए कभी महत्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है. साल 2018 में भारत और वेनेजुएला का तेल व्यापार चरम पर था, जब भारत ने लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का तेल खरीदा. हालांकि, इसके बाद कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण व्यापार में भारी गिरावट आई. वर्ष 2021 से 2023 के बीच यह सिमटकर औसतन 1.1 से 1.2 बिलियन डॉलर रह गया. प्रतिबंधों का साया 2025 में भी बना रहा, जिसके चलते भारतीय रिफाइनरियों ने खरीदारी बेहद कम कर दी. नतीजा यह हुआ कि 2025 में भारत का आयात गिरकर महज $639 मिलियन (1.54 मिलियन टन) के निचले स्तर पर पहुंच गया. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में अप्रैल-मई के आसापास वेनेजुएला का भारत को एक्सपोर्ट लगभग शून्य हो गया है.

वेनेजुएला संकट का भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से इंपोर्ट करता है. ऐसे में दुनिया के किसी भी कोने में तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो उसका सीधा असर भारत की जेब पर पड़ता है.

वेनेजुएला के इस ताजा संकट का भारत पर दो तरह से असर पड़ सकता है-

1. वैकल्पिक स्रोतों की तलाश- हाल के महीनों में मिडल ईस्ट में जारी तनाव और लाल सागर के संकट के कारण भारत ने खाड़ी देशों से हटकर अपने तेल आयात को सुरक्षित करने के लिए वेनेजुएला का रुख तेजी से किया था. यदि वेनेजुएला से तेल आना बंद या कम होता है, तो भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों जैसे रिलायंस और ओएनजीसी को फिर से दूसरे देशों जैसे रूस या अफ्रीका की तरफ भागना होगा, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और तेल महंगा मिलेगा.

2. भारतीय कस्टमर्स पर सीधा असर- ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत के लिए कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ जाएगा. इसका सीधा नतीजा घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिख सकता है. तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिससे आम आदमी के लिए सब्जियां, फल और रोजमर्रा का सामान भी महंगा हो जाता है.

वेनेजुएला की परेशानी

वेनेजुएला इस समय दोतरफा मार झेल रहा है. एक तरफ जहां देश मादुरो युग के अंत के बाद डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व में नई राजनीतिक व्यवस्था और अमेरिकी सहयोग से अपनी अर्थव्यवस्था को वेंटीलेटर जैसी स्थिति से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था, वहीं इस सदी के सबसे बड़े भूकंप ने देश को वापस पीछे धकेल दिया है.

यदि वेनेजुएला का तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर इस भूकंप में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पाया जाता है, तो जून और जुलाई 2026 के आने वाले हफ्तों में ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर इसका असर देखा जा सकता है. भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि यह न सिर्फ भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को चुनौती देगी बल्कि घरेलू बाजार में महंगाई का नया दबाव भी पैदा कर सकती है. अगले कुछ दिनों में सैटेलाइट तस्वीरों और वेनेजुएला के ऊर्जा मंत्रालय के बयानों से साफ होगा कि दुनिया के इस सबसे बड़े तेल के कुएं को कितनी गहरी चोट लगी है.

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