बिहार और देश की राजनीति में लंबे समय तक बड़ा रसूख रखने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चौबे इन दिनों एक बिल्कुल अलग अवतार में नजर आ रहे हैं। सोमवार (15 जून 2026) को उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से मथुरा प्रवास की कुछ तस्वीरें साझा कीं, जो सोशल मीडिया पर छा गईं। इन तस्वीरों में वे ब्रजभूमि के एक गांव में सैकड़ों वर्ष पुराने विशाल वट वृक्ष (बरगद) के नीचे गहन साधना और आत्मचिंतन करते दिखाई दे रहे हैं। राजनीति की आपाधापी से दूर प्रकृति की गोद में समय बिताते पूर्व केंद्रीय मंत्री का ये आध्यात्मिक रूप हर किसी का ध्यान खींच रहा है।
वट वृक्ष के नीचे घंटों की साधना
अश्विनी कुमार चौबे ने अपनी पोस्ट में ब्रजभूमि की आत्मा से साक्षात्कार का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन क्षेत्र स्थित शेरगढ़ ग्राम पहुंचकर उन्हें एक प्राचीन वट वृक्ष की छांव में घंटों बैठने का सौभाग्य मिला। चारों ओर फैली हरियाली, मंद हवा और नृत्य करते मोरों के मनोहारी दृश्य के बीच साधना करने से उन्हें अद्भुत मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति हुई है। सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘ब्रजभूमि की आत्मा से साक्षात्कार। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन क्षेत्र स्थित शेरगढ़ ग्राम पहुंचकर वर्षों पुराने विशाल वटवृक्ष की छांव में घंटों बैठने और प्रकृति की अनुपम छटा के मध्य आत्मचिंतन एवं साधना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ऐसा प्रतीत हो रहा था।’
कला-संस्कृति को देख हुए अभिभूत
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने ब्रज की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जमकर सराहना की। उन्होंने लिखा कि गांव की महिलाओं द्वारा गोयठा (उपला) सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए बिटोरों पर उकेरी गई सुंदर कलाकृतियां भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा का जीवंत उदाहरण हैं। इन ग्रामीण महिलाओं की अद्भुत रचनात्मकता और अद्वितीय सौंदर्यबोध को देखकर उनका मन पूरी तरह अभिभूत हो उठा।
ब्रजवासियों की प्रेम से अभिभूत नेताजी
प्रवास के दौरान गांव की महिलाओं ने आत्मीयता के साथ अश्विनी चौबे का स्वागत किया। उन्होंने चूल्हे पर बनी ताजी रोटी और स्वादिष्ट कढ़ी का भरपूर आनंद लिया। वहां से विदा लेने से पूर्व उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत गौ माता को रोटी खिलाकर उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया। अश्विनी चौबे ने इस यात्रा को मानवीय संवेदनाओं और ग्राम्य जीवन के साथ एक आत्मिक जुड़ाव का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
राजनीति से दूरी, भक्ति ही सहारा
अश्विनी चौबे की इस अध्यात्म यात्रा को उनकी वर्तमान राजनीतिक स्थिति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बक्सर के सांसद रह चुके अश्विनी चौबे को भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया था, जिससे उनकी नाराजगी सामने आई थी। इसके बाद उम्मीद थी कि उनके बेटे को विधानसभा चुनाव में टिकट मिलेगा या उन्हें खुद किसी राज्य का राज्यपाल बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लंबे समय से पार्टी में अलग-थलग पड़े होने के कारण अब उनका यह ध्यान लगाने वाला अंदाज नई सियासी चर्चाओं को जन्म दे रहा है।







