तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के भीतर सियासी भूचाल की आहट और तेज हो गई है। पार्टी के बागी सांसदों के बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पहुंचने और पाला बदलने की अटकलों के बीच, टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा खोल दिया। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों, खासकर काकोली घोष दस्तीदार और शर्मिला सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेताओं ने उन्हें गद्दार बताते हुए चुनौती दी है कि अगर उनमें जरा भी गैरत है, तो वे सांसद पद से इस्तीफा दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें।
काकोली का फोन सुबह से बंद
इस बीच, काकोली घोष दस्तीदार का फोन आज सुबह से बंद आ रहा है और उनके करीबी लोगों के पास भी स्पीकर से मुलाकात को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।
“स्पीकर को नहीं मिली कोई चिट्ठी”
कल्याण बनर्जी ने कहा, काकोली घोष दस्तीदार की वो चिट्ठी जो स्पीकर को लिखी गई, वो 24 घंटे बाद भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। लोकसभा स्पीकर के ऑफिस का भी कहना है कि अभी तक कोई चिट्ठी नहीं आई। जिस तरह से वो लोग भूपेंद्र यादव के घर गए..किसने मिलाया, कैसे मिलाया ये सब पता नहीं, लेकिन अब उनके नेता पीएम नरेंद्र मोदी हो गए, ममता बनर्जी नहीं रहीं। उनके पास 20-21 या जितने भी सांसद हो, उन्हें अगर 10th शेड्यूल (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य होने से बचना होग, तो उन्हें बीजेपी में शामिल होना ही होगा। चुनाव के दौरान वही काकोली दस्तीदार ममता बनर्जी की प्रशंसा करते नहीं थकती थी। जो नेता प्रशंसा करते नहीं थकते थे, वो अब बहाना दे रहे हैं कि वो टीएमसी में रहकर विकास का काम नहीं कर पा रहे थे। अगर बीजेपी में जाना है, तो जाएं, टिकट लें और चुनाव लड़ें। इन सभी लोगों ने गद्दार की है..ये सभी गद्दार हैं।”
उन्होंने कहा, “जैसे ही ये सभी सांसद (टीएमसी के बागी) भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, ये सब बेनकाब हो गए। जब आरजी कर की घटना हुई तब शर्मिला सरकार और काकोली दस्तीदार कहां थे? उस वक्त वो नहीं बोले लेकिन मैं बोला। अगर काकोली दस्तीदार कह रही हैं कि कि उन्हें सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, तो वो ये कैसे कह रही हैं, चीफ व्हिप का पद कैसे मांग सकती हैं? वो पार्टी के सांसदों को सदन में संभालने के लिए है। NDA एक गठजोड़ है, कोई पार्टी नहीं। आपके पास दो तिहाई बहुमत नहीं है..आपको डर है कि पार्टी से आपको निकाल दिए जाएगा। अब जब बीजेपी के गुंडे तुम्हारे कार्यकर्ता मारेंगे तो क्या करोगे।”
“सिर्फ 32 लाख वोट से हमें हराया गया, हम हारे नहीं”
कल्याण बनर्जी ने कहा, “तुममें जरा भी गैरत है तो बोलो। जब तुम्हारे कार्यकर्ता मार खाएंगे, तो हम जाएंगे लड़ने। 32 लाख वोट से सिर्फ हमें हराया गया..हम हारे नहीं। 29 के अंदर बीजेपी साफ हो जाएगी..केंद्र और राज्य दोनों में। काकोली और शर्मिला बताएं कि तुम्हारे साथ क्या गलत हुआ? तुम मूंग और मसूर की दाल। 5 बार चुनाव हारी, दीदी ने तुम्हें जिताया। तुम संसद नहीं आती..तो तुम्हे चीफ व्हिप से हटाया गया। बताओ तुम्हारी पार्टी क्या है? कभी तृणमूल का नाम नहीं लेना। जब शेरनी घायल होती है, तो ज्यादा खतरनाक होती है। ये पार्टी विरासत में नहीं मिली है।”
“गद्दारों को जाना है जाए, कभी तृणमूल का नाम नहीं लें”
पार्टी के वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने भी बागी गुट को आड़ों हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ये सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है। बागी सांसदों को शर्म आनी चाहिए। काकोली घोष 3 चुनाव हारी, फिर भी ममता जी ने सांसद बनवाया। व्हिप से हटाया, संसद में नहीं आती थी। तकलीफ थी, तो पहले बताती। भूपेंद्र यादव के यहां चाय पी रहे हो। गद्दारों को जाना है जाए, कभी तृणमूल का नाम नहीं लें। मां-माटी-मानुष की बात करते हैं, ये पार्टी विरासत में नहीं मिली है।
ममता को झटके पर झटका
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। पार्टी के सांसद बगावत पर उतर आए हैं। पहले रिताब्रता बनर्जी ने ूाही 58 नेताओं के समर्थन से विपक्ष के नेता के तौर पर अपना दावा पेश किया और अब एक और सांसद, काकोली घोष, कई समर्थकों के साथ अलग होने के संकेत दे रही हैं। इसके साथ ही TMC की लोकसभा यूनिट एक बड़े मोड़ पर आ गई है। ममता की TMC के एक औऱ मुस्लिम राज्यसभा सांसद नदीमुल हक़ बीजेपी के सम्पर्क में हैं।
काकोली घोष ने कहा, ‘सिर कटेगा, झुकेगा नहीं’
बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जिन्होंने पिछले महीने के आखिर में TMC के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था, उन्होंने कहा कि बागी गुट ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) का समर्थन करने का फ़ैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगभग 19 सांसदों का समर्थन हासिल है। दल-बदल विरोधी कार्रवाई से बचने के लिए बागियों को TMC के 28 लोकसभा सदस्यों में से कम से कम 19, यानी पार्टी के कुल सांसदों का 2/3 हिस्से की ज़रूरत है।
ममता बनर्जी को झटके पर झटका
इससे पहले सोमवार को कम से कम 14 सांसदों ने दिल्ली में मुलाकात की और पार्टी से अलग होने पर चर्चा की। यह चर्चा बंगाल के नेता और सीएम शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई। पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद क्षेत्रीय पार्टी के लिए यह एक और बड़ा झटका है।
जहां एक तरफ सोमवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (INDIA) की बैठक में शामिल हो रही थीं। वहीं उससे लगभग तीन किलोमीटर दूर, बागी TMC सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में केंद्रीय मंत्री और बंगाल चुनावों के लिए BJP के ऑब्जर्वर भूपेंद्र यादव के घर पर दो घंटे तक बैठक की। शाम को इस ग्रुप ने बीरभूम से चार बार की सांसद शताब्दी रॉय के घर पर फिर से मुलाकात की थी।
कीर्ति आजाद ने किया ट्वीट
यह फ़र्ज़ी और मनगढ़ंत लिस्ट BJP ने जारी की है।
इनमें से छह लोगों ने साफ़ तौर पर किसी भी दस्तावेज़ या कागज़ पर दस्तख़त करने से इनकार किया है।
ऑपरेशन लोटस नाकाम हो गया है।
अमित शाह नाकाम रहे हैं।
TMC का अलग गुट
NDA का समर्थन करेगा।
सांसद ने क्या कहा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी बागी TMC सांसदों की दोनों बैठकों में मौजूद थे। एक सांसद ने कहा, “पहली बैठक में CM ने तंज कसते हुए कहा कि आप सभी सीनियर सांसद हैं, लेकिन TMC के बड़े नेताओं ने आपके साथ बुरा बर्ताव किया है।” यह घटनाक्रम TMC के सीनियर नेता सुखेंदु शेखर रॉय के राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने के कुछ घंटों बाद हुआ। उन्होंने पार्टी में “बेहिसाब भ्रष्टाचार” और “अराजक शासन” का आरोप लगाया था।







