बंगाल में जिसकी आशंका थी, वही हो गया। नई सरकार के गठन से पहले कोलकाता में हाई प्रोफाइल मर्डर हुआ। शुभेन्दु अधिकारी के PA चन्द्रनाथ रथ को गोलियों से भून दिया गया। जिस तरह से इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि ये हत्या पूरी योजना के साथ, रेकी करके, राजनीतिक संदेश देने के लिए किया गया।
शुभेन्दु अधिकारी ने भी कहा है कि साजिश तो उन्हें मारने की थी लेकिन हत्यारे उन तक नहीं पहुंच पाए, इसलिए उनके पीए को निशाना बनाया गया। शुभेन्दु ने कहा, ये हत्याकांड भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार का बदला हो सकता है। चन्द्रनाथ रथ की मां ने कहा, वह चाहती हैं उनके बेटे के हत्यारों को कानून सजा दे। वह खुद मां हैं, इसलिए हत्यारों के लिए फांसी की मांग नहीं करेंगी, लेकिन उनकी गोद उजाड़ने वालों को जिंदगी भर जेल में रखा जाना चाहिए।
भाजपा विधायक अर्जुन सिंह ने सीधे सीधे अभिषेक बनर्जी का नाम लिया। अर्जुन सिंह ने कहा, चुनावी हार से अभिषेक बनर्जी बौखला गए हैं, ये हत्या उसी का नतीजा है। तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। ममता की पार्टी ने कहा कि चुनाव के बाद हिंसा रोकने में चुनाव आयोग नाकाम रहा है, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और दफ़्तरों पर हमले हो रहे हैं, उनके तीन कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है, ये बीजेपी और चुनाव आयोग की नाकामी का नतीजा है।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, सिर्फ दो दिन इंतजार कीजिए। शपथग्रहण के बाद गुडों और माफिया का बुरा वक्त शुरू होगा। 9 मई के बाद बंगाल में अपराधियों का इलाज वैसे ही होगा जैसे यूपी में बीजेपी की सरकार ने किया है। शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या इस बात का ज्वलन्त सबूत है कि बंगाल में हत्यारों की हिम्मत किस कदर बढ़ गई है।
चुनाव में TMC की हार के बाद भी अपराधियों को किसी का डर नहीं है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याओं का एक खूनी इतिहास रहा है।
पांच साल पहले 2021 में विधानसभा चुनाव में TMC की जीत के बाद 31 लोगों की हत्या हुई थी, हिंसा की 88 घटनाएं हुईं थीं। पिछले 6 साल में देश भर में चुनावों के दौरान जितनी हिंसा हुई, उनमें 35 प्रतिशत घटनाएं बंगाल में हुईं। इसलिए चुनाव से पहले अर्धसैनिक बलों की 700 कंपनियों को तैनात करना पड़ा। चुनाव के दौरान किसी की जान नहीं गई, गोली चलाने और बम फेंकने की घटनाएं नहीं हुई लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद जो हुआ वह दुखदायक है।
शुभेंदु अधिकारी की बात सही है कि बंगाल में भी गुंडागर्दी को रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ का मॉडल लागू करना होगा। अपराधियों के दिलोदिमाग में पुलिस का डर कायम करना होगा।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी आज राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। लेकिन इस शपथ ग्रहण समारोह के बीच, सबसे ज्यादा चर्चा उनके भव्य राजनीतिक कद की नहीं, बल्कि उनकी संपत्ति की हो रही है।
शुभेंदु अधिकारी द्वारा दिए गए हलफनामे के अनुसार, बंगाल के नए मुखिया के पास न तो अपनी कोई कार है और न ही निवेश के नाम पर सोना, उनकी कुल घोषित नकदी मात्र 12,000 रुपये है। उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब ₹85.87 लाख है। इसमें ₹24.57 लाख की चल संपत्ति और ₹61.30 लाख की अचल संपत्ति शामिल है।
बैंक खातों और निवेश में कितनी रकम?
शुभेंदु अधिकारी के विभिन्न बैंकों में कुल 14 खाते हैं। इनमें पंजाब नेशनल बैंक, SBI, एक्सिस बैंक और कुछ को-ऑपरेटिव बैंक शामिल हैं। इन खातों में कुल जमा राशि करीब ₹7.34 लाख बताई गई है। इसके अलावा उन्होंने नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र और पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम में भी निवेश किया हुआ है। LIC की कई पॉलिसियां भी उनके नाम पर हैं।
जमीन और फ्लैट भी हैं शामिल
अचल संपत्ति की बात करें तो शुभेंदु अधिकारी के पास पूर्वी मिदनापुर जिले में कृषि भूमि और कुछ रिहायशी संपत्तियां हैं। उन्होंने नंदीग्राम समेत कई इलाकों में कृषि भूमि घोषित की है। इसके अलावा तमलुक और कुमारपुर में फ्लैट और पुश्तैनी संपत्ति भी उनके नाम पर दर्ज है। इन सभी संपत्तियों की कुल कीमत करीब ₹61 लाख से ज्यादा बताई गई है।
ममता बनर्जी को हराकर बने जायंट किलर
शुभेंदु अधिकारी ने 2026 विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को हराया। कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे शुभेंदु 2020 में बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस चुनाव में बीजेपी ने 294 सीटों में से 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।
कोई कर्ज नहीं
हलफनामे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी पर किसी तरह का बैंक लोन या सरकारी बकाया नहीं है। वित्त वर्ष 2024-25 में उनकी कुल आय करीब ₹17.38 लाख रही। उनकी आय के सोर्स MLA वेतन, सांसद पेंशन और बिजनेस बताए गए हैं।







