प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को चुनावी नतीजों के बाद कहा कि यह जनादेश लोकतंत्र और परफॉर्मेंस की राजनीति में उनके विश्वास को दर्शाता है। हम जनता की सेवा के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि आज गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक कमल ही कमल खिला हुआ है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और अब पश्चिम बंगाल में एनडीए सरकार है।
भाजपा मुख्यालय पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारा मंत्र ‘नागरिक देवो भव’ है। हम जनता की सेवा के लिए समर्पित हैं। इसलिए लोगों ने हम पर भरोसा जताया। लोग जानते हैं कि भाजपा सुशासन का पर्याय है, चाहे वह राज्य सरकार हो या स्थानीय निकाय चुनाव, जनता को हम पर भरोसा है।
पारंपरिक बंगाली धोती-कुर्ता पहने प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और पश्चिम बंगाल, असम तथा पुडुचेरी के मतदाताओं का आभार जताया। साथ ही तमिलनाडु- केरल के लोगों को भरोसा दिलाया कि भाजपा उनकी सेवा के लिए पूरा प्रयास करेगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा उन्हें विश्वास है केरल की जनता अगली बार कांग्रेस को सबक सिखाएगी।
डर का शासन समाप्त हुआ : पीएम मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत में बनाए रखने के लिए संघर्ष किया था। वंदे मातरम् के 150वें वर्ष में राज्य में परिवर्तन होना उपयुक्त है और अब डर का शासन समाप्त हो गया है।
बदलाव का समय : मोदी ने कहा कि आज जब भाजपा जीती है तो बदला नहीं बदलाव की बात होनी चाहिए। भय नहीं भविष्य की बात होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से सियासी हिंसा का रास्ता छोड़ राज्य के भविष्य को बेहतर बनाने की अपील की। सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जल्द ही यूपी के चुनाव में सपा को भी इसकी सजा मिलेगी।
20 से अधिक राज्यों में सरकार : प्रधानमंत्री ने कहा कि हार जीत लोकतंत्र और सियासत का हिस्सा है। इन चुनावों में महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी रही और ये भारतीय लोकतंत्र की बेहतर तस्वीर है। विपक्षी दलों ने महिलाओं की तरक्की को रोकने की कोशिश की। इन चुनावों में महिलाओं ने इन दलों को सबक सिखाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भाजपा गठबंधन की 20 से अधिक राज्यों में सरकार है।
जनता के सपने साकार होंगे
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,इस चुनाव में लोगों की ताकत, भाजपा की सियासत और गुड गर्वनेंस को जीत मिली है। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। समाज के हर वर्ग को समान अवसर, सबका विकास और सबको बराबर सम्मान हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, इस जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं की मेहनत को जाता है जिसने बिना थके और बिना डरे काम किया।
जनादेश : बंग भूमि में खिला कमल
पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला ढहा दिया, वहीं तमिलनाडु में अभिनेता विजय की धमाकेदार एंट्री ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को पलट दिया। असम में भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगाकर पार्टी की जमीनी पकड़ और पुख्ता की। वहीं, केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की सत्ता में वापसी से देश के नक्शे से वामपंथी सरकारों का पूरी तरह सफाया हो गया।
निर्वाचन आयोग की ओर से रात दस बजे तक जारी परिणामों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने दो सौ के आंकड़े के करीब पहुंचते हुए न केवल तृणमूल कांग्रेस का गढ़ ध्वस्त किया, बल्कि भाजपा की सबसे बड़ी और अहम विजय का इतिहास भी रच दिया। खुद ममता बनर्जी भवानीपुर सीट हार गईं। यह बदलाव विपक्ष की राजनीति को झकझोरने वाला है।
देश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों खासकर यूपी और उत्तराखंड पर इनका व्यापक असर हो सकता है। तमिलनाडु में एमके स्टालिन की हार ने ममता की हार के साथ विपक्षी खेमे को एक और बड़ा झटका दिया है। अभिनेता से नेता बने विजय ने इस जीत से खुद को एमजी रामचंद्रन और एनटी रामाराव की श्रेणी में खड़ा कर दिया।
विपक्षी खेमे के दो गठबंधनों की लड़ाई वाले केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने एलडीएफ को सत्ता से बाहर कर दिया। असम में भाजपा की लगातार तीसरी जीत ने साबित किया कि उसकी ओर लोगों का झुकाव बरकरार है। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा सीट पर टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8795 वोटों के अंतर से हरा दिया।
पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 मतों से हरा दिया। शुभेंदु को 73,917 वोट जबकि ममता को 58,812 वोट मिले। शुभेंदु भवानीपुर के साथ ही नंदीग्राम सीट पर भी विजयी रहे। वर्ष 2021 के चुनाव में भी नंदीग्राम में शुभेंदु ने कड़े मुकाबले में ममता को हरा दिया था।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि सौ से अधिक सीटों पर जनादेश लूटा गया। भवानीपुर क्षेत्र में मतगणना केंद्र से बाहर निकलते हुए उन्होंने कहा कि हम वापसी करेंगे। वे दोपहर में उस वक्त मतगणना केंद्र पहुंचीं जब तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि उसके एक मतगणना एजेंट को वहां से जबरन बाहर निकाल दिया गया। ममता ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों की मदद से चुनाव आयोग की गतिविधियां अवैध थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें निर्वाचन आयोग के कदाचार के खिलाफ बोलने के कारण निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि मैंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ममता ने दावा किया कि सीसीटीवी बंद था और हमारे एजेंटों को मतगणना केंद्र के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
शाह की रणनीति से बंगाल में बड़ा बदलाव
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक दशक पहले पार्टी की कमान संभालने के साथ जो बड़ा राजनीतिक चुनावी मिशन शुरू किया था, उसके एक बड़े अध्याय की पूर्णता है-पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक विजय।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शाह ने अपने कार्यकाल और उसके बाद के अध्यक्षों के समय भी उसी गति से अभियान चलाया। इस बार के चुनाव में शाह ने बंगाल में अपनी रणनीति से हर मतदाता तक बदलाव की लहर पैदा की साथ ही डर से निकलकर बेखौफ मतदान का भरोसा भी दिलाया।
पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से पूरी तरह से बाहर करने, ओडिशा में भाजपा को लाने, बिहार में भाजपा के व्यापक विस्तार के साथ अपना मुख्यमंत्री बनाने के साथ पश्चिम बंगाल ही ऐसा मिशन था, जो पूरा नहीं हो पाया था। इसके लिए पांच साल पहले व्यूह रचना की गई, लेकिन ममता बनर्जी किसी तरह अपना किला बचा ले गई थी, लेकिन इस बार शाह ने उनको कोई मौका नहीं दिया। ममता बनर्जी के अजेय माने जाने वाले किले को ध्वस्त कर दिया। शाह ने संगठन के जरिये अपनी रणनीति को जमीनी अमलीजामा पहनाया और ममता बनर्जी के गढ़ों में सेंध लगाई।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव अभियान के दौरान अमित शाह लगभग 15 दिनों तक किसी न किसी रूप में बंगाल में ही रहे। इस दौरान केवल भाषण और रोड शो ही नहीं किए, संगठन को बहुस्तरीय रणनीति में इस तरह से ढाला कि भाजपा अपनी एक-एक बात मतदाता तक पहुंचाने में सफल रही। चुनाव प्रबंधन भी इस तरह से किया कि कोई भी उसे भेद कर न तो गड़बड़ी कर सका और न ही हिंसा के लिए गुंजाइश रहने दी। समय रहते ही जैसे को तैसा रवैया अपनाकर साफ कर दिया कि अब भय नहीं चलेगा।
शाह देर रात तक चलने वाली बैठकों में पार्टी नेताओं के साथ रणनीति तय करते और अगले दिन उसी योजना को जमीन पर उतारने में जुट जाते थे। दिन में रैलियों और रोड शो के जरिये व्यापक माहौल बनाया। बीच-बीच में दूसरे राज्यों में भी प्रचार करने चले जाते। वहां से लौटकर फिर देर रात बैठकें कर संगठन को धार देने में जुट जाते। इस दौरान उन्होंने लगभग 50 से अधिक रैली और रोड शो किए। कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरी और मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाया।
चुनाव के दौरान की जाने वाली घोषणाओं का खाका तैयार करने और उनको समयबद्ध ढंग से जारी करने का भी काम किया। शाह की अपनी भरोसेमंद और परखी हुई टीम पूरी कार्ययोजना को आगे बढ़ाती रही।
चुनाव प्रभारी और कई राज्यों में विपरीत हालातों में भी अपनी सफल रणनीति से भाजपा के सिर सफलता का सेहरा बंधवाने वाले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बेहद गुपचुप ढंग से मीडिया से दूर रहते हुए काम किया। लोगों में यह धारणा बनाने में सफल रहे कि बंगाल में बदलाव होने जा रहा है। पहले चरण में भारी मतदान तथा 110 सीटों के आंकड़े को दूसरे चरण में इस तरह से रखा कि पूरा खेल ही बदल गया।
भूपेंद्र यादव के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संगठन प्रभारी मंगल पांडे, चुनाव सह प्रभारी बिप्लब देब व महासचिव सुनील बंसल ने अपने मोर्चे बेहतर ढंग से संभाले रखे और विरोधियों की सारी रणनीति पर पानी फेरने का काम किया।
बधाई दी: शाह ने सम के लोगों को ऐतिहासिक हैट्रिक जनादेश के लिए बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, यह असीम स्नेह और सहयोग आपको और भी बेहतर सेवाएं देने और आपकी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के हमारे संकल्प को और मजबूत कर रहा है। भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार पर लोगों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। इस सरकार ने असम को अशांति की धरती से आशा और विकास की धरती में बदल दिया है। केरल के लोगों का भी आभार जताया।







