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अमेरिकी फौज के लिए ‘श्मशान’ न बन जाए ईरान में जमीनी हमला ,ईरानी मीडिया लिखा- जो भी ईरान आएगा ताबूत में लौटेगा

UB India News by UB India News
April 1, 2026
in अन्तर्राष्ट्रीय
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अमेरिकी फौज के लिए ‘श्मशान’ न बन जाए ईरान में जमीनी हमला ,ईरानी मीडिया लिखा- जो भी ईरान आएगा ताबूत में लौटेगा
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पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य बलों की बढ़ती तैनाती के बीच, ईरानी अंग्रेजी अखबार तेहरान टाइम्स ने वॉशिंगटन को चेतावनी भरा संदेश दिया है। अखबार ने शनिवार के अंक के पहले पृष्ठ पर बड़े अक्षरों में लिखा “वेलकम टू हेल” और चेताया कि जो भी अमेरिकी सैनिक इरानी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, वे सिर्फ ताबूत में लौटेंगे।

अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ी
अखबार की चेतावनी के ठीक समय पर लगभग 3,500 अमेरिकी मरीन सैनिक पश्चिम एशिया में अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) क्षेत्र में तैनात किए गए।  मरीन सैनिक USS त्रिपोली के जरिए जापान से रवाना किए गए, जो अमेरिका के सबसे बड़े अम्फीबियस असॉल्ट जहाजों में से एक है। यह कदम पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य शक्ति बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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संभावित मिशन: खर्ग द्वीप

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तैनाती खर्ग द्वीप को कब्जे में लेने के लिए अमेरिकी ऑपरेशन की तैयारी हो सकती है। यह द्वीप रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और इसी महीने पहले भी ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत इसका निशाना बनाया गया था।

ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमले
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी बलों ने फरवरी 28 के बाद से ईरान के कई सैन्य ढांचों पर हमले किए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकाने
  • एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल साइट्स
  • नौसैनिक संसाधन
  • हथियार निर्माण केंद्र

अमेरिकी बलों ने अब तक 11,000 से अधिक लड़ाकू उड़ानों को अंजाम दिया है और 150 से अधिक ईरानी जहाजों को क्षतिग्रस्त या नष्ट किया गया है।

ईरानी चेतावनी और बढ़ता तनाव
तेहरान टाइम्स की यह चेतावनी अमेरिकी सैनिकों और वॉशिंगटन प्रशासन के लिए सीधे संदेश की तरह है। अखबार ने स्पष्ट किया कि इरानी क्षेत्र में कोई भी अमेरिकी हस्तक्षेप भारी नुकसान का सामना करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस चेतावनी और सैनिकों की बढ़ती तैनाती से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका ने बड़े युद्धपोत, विमानवाहक पोत और मरीन कमांडो के साथ ईरान के खिलाफ फाइनल अटैक की तैयारी कर रहा है. ईरान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां किसी दूसरे देश द्वारा जमीनी हमला कर कब्जा करना बेहद खतरनाक है. सीधी चढ़ाई वाले ऊंचे पहाड़ों, शरीर को जला देने वाले रेगिस्तानों और समुद्र से घिरी ईरान की सीमा को पार करना मौत के किले में घुसने से कम नहीं है. ईरान का एक बड़ा हिस्सा पठारी है, जो सीधे जोखिम भरे पहाड़ी इलाकों से घिरा है और इनके संकरे दर्रों से होकर गुजरना दुश्मन के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. जबकि पहाड़ी चोटियां बेहद ऊबड़-खाबड़ हैं. जबकि दलदली नमकीन मिट्टी वाले रेगिस्तान गर्मी में 70 डिग्री तापमान के साथ किसी भी फौज के लिए काल साबित हो सकते हैं. अगर कोई देश एड़ी चोटी का जोर लगाकर घुस भी जाए तो वहां टिके रहना मुश्किल है.

अमेरिका की ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी

इजरायल के साथ युद्ध में उतरे अमेरिका ने ईरान में संभावित ग्राउंड ऑपरेशन के लिए 3500 मरीन कमांडो उतार दिए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड का एक और युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली (USS Tripoli) 2500 सैनिक लेकर ऑपरेशन जोन में पहुंच चुका है. जबकि USS बॉक्सर, USS अब्राहम लिंकन जैसे एयरक्रॉफ्ट करियर पहले ही मोर्चा संभाले हुए हैं. एफ-35, एफ-18 जैसे लड़ाकू विमानों से लैस ये एयरक्रॉफ्ट करियर समुद्री और हवाई हमलों के साथ समुद्र में एक चलती-फिरती फौज माने जाते हैं. माना जा रहा है अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप या होर्मुज स्ट्रेट के इलाके में बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दे सकता है.

ईरान के जोखिम भरे पठार

ईरान का अधिकांश हिस्सा एक ऊंचे पठार (Iranian Plateau) पर स्थित है, जिसकी औसत ऊंचाई समुद्र तल से 900 मीटर से 1500 मीटर के बीच है. यह पठार चारों ओर से विशाल पर्वत शृंखलाओं से घिरा हुआ है, जो इसे बाहरी आक्रमणों से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है.

खतरनाक पहाड़ी इलाके

ईरान की सीमा पर बेहद खतरनाक पहाड़ी इलाके (The Mountain Barriers) हैं. इसमें जाग्रोस पर्वत (Zagros Mountains) ईरान के पश्चिमी इलाके और दक्षिण-पश्चिमी इलाके में 1500 किलोमीटर लंबी पर्वतमाला की तरह है. इसकी चोटियां 4000 मीटर से भी ऊंची हैं. यह क्षेत्र इतना ऊबड़-खाबड़ है और सीधी चोटियां वाला है कि यहां सेनाओं का गुजरना और रसद हथियार पहुचाना असंभव माना जाता है.

अल्बोर्ज पर्वत का खतरनाक रास्ता

अल्बोर्ज की पहाड़ियां (Alborz Mountains) उत्तर में कैस्पियन सागर के किनारे है. ईरान की सबसे ऊंची चोटी माउंट दामावंद 5610 मीटर की है. ये उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं और दुश्मनों के लिए एक मजबूत दीवार का काम करती है.

मौत का जाल हैं विशाल रेगिस्तान

ईरान के बीचोंबीच दो जोखिम भरे रेगिस्तान हैं, जहां इंसानों का रहना नामुमिकन सा है. दश्त-ए-काविर (Dasht-e Kavir) को महान नमक का रेगिस्तान कहा जाता है. यहां दलदली नमकीन मिट्टी है, जो किसी भी सैन्य वाहन या जांबाज फौज के लिए भी मौत का जाल बन सकती है.

आग उगलने वाला रेगिस्तान दश्त-ए-लुत

ईरान में दश्त-ए-लुत (Dasht-e Lut) यह दुनिया के सबसे गर्म जगहों में से एक है. यहां तापमान 70°C तक पहुंच जाता है. इसकी रेत के टीले और चट्टानें इसे एक अभेद्य किला बना देती हैं, जहां से जिंदा बाहर निकलना असंभव सा है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता

ईरान की समुद्री सीमाएं भी बहुत अहम और दुर्गम हैं.हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे अहम तेल-गैस रास्ता है. इस संकरे समुद्री गलियारे से दुनिया के 20 फीसदी तेल-गैस के जहाज गुजरते हैं. होर्मुज के आसपास दुर्गम इलाकों से निगरानी और पहाड़ों के अंदर मिसाइलों और ड्रोन के जखीरों से वो हमले करता है.

दुनिया की सबसे बड़ी झील से घिरा

ईरान की उत्तरी सीमा में कैस्पियन सागर है. यह दुनिया की सबसे बड़ी झील कैस्पियन सागर से घिरा है, जो इसे रूस और मध्य एशिया से जोड़ता है. यहां से भी दुश्मन का ईरान में प्रवेश करना मुश्किल है.

मौसम भी खतरनाक

ईरान केवल पहाड़ों, रेगिस्तान के कारण अजेय नहीं है, यहां की जलवायु में भी जिंदा रहना आसान नहीं है. ईरान की उत्तरी सीमा में घने जंगल (Hyrcanian Forests)हैं, जहां घनघोर बारिश होती है. दक्षिणी इलाकों में भीषण गर्मी और आर्द्रता है. सर्दियों में पहाड़ों पर इतनी बर्फ गिरती है कि कई इलाकों का संपर्क हफ्तों तक देश से कटा रहता है.

भूकंप जोन में ईरान

ईरान दुनिया के सबसे जोखिम भरे भूकंपीय इलाकों (Seismic Zones) में से एक है. यहां की जमीन लगातार टेक्टोनिक प्लेट की हलचलों से गुजरती है, जिससे यहां स्थायी और भारी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना बड़ी चुनौती है.

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