मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी है. ममता ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेसिव रिविजिन (SIR) में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के विरोध में 6 मार्च दोपहर 2 बजे से कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरना शुरू किया है. वे रातभर धरना स्थल पर रही हैं. शनिवार को धरने में समर्थकों को संबोधित करते हुए सीएम ममता ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगाया है.
LPG की कीमतों को लेकर सरकार को घेरा
इस दौरान ममता बनर्जी ने LPG की कीमतों को लेकर सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि अब आपको 21 दिन पहले गैस बुक करानी होगी, तो अगर आपके घर में LPG खत्म हो जाए तो आप 21 दिन क्या करेंगे? खाएंगे क्या? क्या आप घर पर खाना मंगवाएंगे? यहां तक कि केरोसिन का कोटा भी कम कर दिया गया है. आप हर दिन चीजों की कीमतें बढ़ा रहे हैं। क्या इसीलिए आप वोट रद्द करवाना चाहते हैं? बंगाल को तोड़ने के लिए? दूसरे शायद आपसे डरते हों, लेकिन हम नहीं. हम आपका पर्दाफाश करेंगे. “
बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों का नाम हटाए जाने के विरोध में शुक्रवार को यहां धरना शुरू किया। मध्य कोलकाता के धर्मतल्ला में मेट्रो चैनल पर दोपहर दो बजे से धरना शुरू करते हुए ममता ने भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें बेनकाब करने की कसम खाई।
विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले केंद्रीय चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के आठ मार्च को राज्य के दौरे पर पहुंचने से ठीक पहले ममता द्वारा धरना शुरू करने के कदम से तृणमूल और आयोग के बीच टकराव और बढ़ गया है। ममता का यह धरना कब तक चलेगा यह अभी स्पष्ट नहीं है।
कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया-सीएम ममता
ममता ने यह भी आरोप लगाया कि अंतिम मतदाता सूची में कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने इनमें से कई मतदाताओं को धरना मंच पर प्रस्तुत भी किया और कहा कि चुनाव आयोग को शर्म आनी चाहिए कि उसने एसआइआर में उन मतदाताओं को मरा हुआ चिन्हित कर दिया जो जिंदा हैं और यहां मेरे साथ मौजूद हैं।
ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रही है, जो खुद एक बेशर्म राजनीतिक ताकत है।
अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद हो रहा धरना
मालूम हो कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा यह धरना प्रदर्शन निर्वाचन आयोग की ओर से एसआइआर के बाद बीते 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूचियों को प्रकाशित करने के कुछ ही दिनों बाद किया जा रहा है, जिसने राज्य के मतदाताओं की संख्या को काफी हद तक बदल दिया है।
पिछले साल चार नवंबर को बंगाल में एसआइआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद हाल में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची से 63.66 लाख नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है।
बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है
एसआइआर के कारण बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अतिरिक्त 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को न्यायिक जांच के अधीन विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता निर्धारित की जाएगी।
तृणमूल के कई सांसदों, विधायकों व मंत्रियों समेत पार्टी के बड़े नेताओं के अलावा, पार्टी समर्थित बूथ लेवल आफिसर्स (बीएलओ) के एसोसिएशन के सदस्य भी धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए।
घुसपैठिए मुसलमानों को बचाने के लिए धरने पे बैठी हैं ममता : गिरिराज
दूसरी ओर, बंगाल दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि घुसपैठिए मुसलमानों को बचाने के लिए ममता बनर्जी धरने पे बैठी हैं।







