भारत और अमेरिका के बीच अगले हफ्ते होने वाली महत्वपूर्ण व्यापारिक वार्ता को फिलहाल टाल दिया गया है। मुख्य वार्ताकारों की यह तीन दिवसीय बैठक 23 फरवरी से शुरू होने वाली थी, जिसमें दोनों देशों के बीच एक ‘अंतरिम ट्रेड डील’ पर चर्चा होनी थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने ताजा वैश्विक घटनाक्रमों और उनके प्रभावों का गहराई से मूल्यांकन करने के लिए इस यात्रा को पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है।
क्यों टाली गई यह महत्वपूर्ण बैठक?
इस वार्ता के टलने के पीछे अमेरिका में चल रही कानूनी और आर्थिक हलचल को मुख्य कारण माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि दोनों देश वर्तमान स्थिति को समझने के लिए थोड़ा और समय चाहते हैं। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के पिछले वैश्विक टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद स्थितियां बदल गई हैं। दोनों पक्षों का मानना है कि नई तारीख पर बातचीत करना तब ज्यादा फायदेमंद होगा जब दोनों देश हालिया बदलावों के प्रभावों को पूरी तरह समझ लेंगे।
तीन दिन तक व्यापार वार्ता पर होना था मंथन
इस बैठक में भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन मुख्य वार्ताकार थे और भारतीय टीम तीन दिन तक अमेरिका में चर्चा करने वाली थी। इस बैठक का मकसद अंतरिम व्यापार समझौते के कानूनी दस्तावेज को अंतिम रूप देना था। दरअसल, यह पूरा मामला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ फैसलों से जुड़ा हुआ है। ट्रंप ने हाल ही में सभी देशों पर पहले 10% और फिर बढ़ाकर 15% तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। इससे पहले अमेरिका ने 2025 में भारत पर कुल 50% तक टैरिफ लगा दिया था, जिसमें से 25% पहले ही हटाया जा चुका है।
ट्रंप के टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बताया अवैध
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल में ट्रंप के पुराने टैरिफ फैसलों को अवैध बताया था और कहा था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से ज्यादा कदम उठाए। इसी वजह से अब व्यापार नीति को लेकर स्थिति थोड़ी अनिश्चित बनी हुई है। अगर नई 15% ड्यूटी लागू होती है, तो यह पहले से लगने वाले आयात शुल्क के ऊपर लगेगी। यानी किसी उत्पाद पर अगर पहले 5% ड्यूटी है, तो कुल मिलाकर वह 20% हो जाएगी।
अगले महीने होना था ट्रेड डील पर हस्ताक्षर
दोनों देशों ने पहले ही इस साल मार्च तक अंतरिम ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने और अप्रैल से उसे लागू करने का लक्ष्य रखा था। यह समझौता भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत के करीब 18% निर्यात अमेरिका को जाते हैं। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 186 अरब डॉलर का रहा था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी अनिश्चितता
हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ नियमों के खिलाफ फैसला सुनाया, जिससे व्हाइट हाउस की आर्थिक नीतियों में कुछ समय के लिए अस्थिरता आ गई है। भारत के लिए यह वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसके जरिए अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों को सहज बनाने और भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्कों को कम करने की उम्मीद थी। अब यह बैठक किसी ऐसी तारीख पर होगी जो दोनों देशों के लिए सुविधाजनक हो।







