इंडिगो की फ्लाइट में रुकावट का छठा दिन भी जारी है, एयरलाइन को उम्मीद है कि 10 दिसंबर तक ऑपरेशन ठीक हो जाएगा. मौजूदा संकट की वजह से बहुत परेशानी हुई है, क्योंकि फ्लाइट कैंसल होने, फ्लाइट में देरी और दूसरी बड़ी ऑपरेशनल दिक्कतों की वजह से बड़े शहरों में कई पैसेंजर एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं. हालांकि, एयरलाइन ने दिन के आखिर तक 1,650 से ज़्यादा फ्लाइट ऑपरेट करने का प्लान बताया है और भरोसा दिलाया है कि रिफंड पूरी तरह से प्रोसेस किया जा रहा है. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने कहा कि इंडिगो की फ्लाइट में रुकावट के बाद अब तक कुल 610 करोड़ रुपये का रिफंड प्रोसेस किया जा चुका है,
ये हैं टॉप डेवलपमेंट
कई शहरों में फ्लाइट कैंसिल. इंडिगो ने रविवार को 650 फ्लाइट कैंसिल कर दीं और 7 दिसंबर को अपनी 2,300 डेली फ्लाइट में से 1,650 फ्लाइट ऑपरेट करने का प्लान है, क्योंकि रुकावट का लगातार छठा दिन भी जारी रहा. दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट पर 220 से ज़्यादा फ्लाइट कैंसिल कर दी गईं, जबकि ऑपरेशन को ठीक करने की कोशिशें जारी रहीं. मौजूदा संकट की वजह से हाल के दिनों में सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसल और लेट हुई हैं, जिससे हज़ारों पैसेंजर्स को काफ़ी मुश्किल हुई है. न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, रविवार को मुंबई एयरपोर्ट पर कम से कम 112 और दिल्ली एयरपोर्ट पर 109 फ्लाइट्स कैंसल हुईं. यह एयरलाइन के लिए कुछ मुश्किल दिनों के बाद हुआ है. शुक्रवार को अपनी 2,300 डेली फ्लाइट्स में से लगभग 1,600 कैंसल करने के बाद, शनिवार को दिक्कतें थोड़ी कम हुईं, और कैंसलेशन की संख्या घटकर लगभग 800 रह गई.
क्या यह कोई सोची समझी चाल है !
पूरा देश हवाई यात्रा की संकट से गुजर रहा है. पिछले 6 दिन में देश के हर छोटे-बड़े एयरपोर्ट पर हाहाकार मचा हुआ था. हाजारों फ्लाइट्स कैंसिल हो गईं थी, विकल्प में मौजूद फ्लाइट्स के फेयर आसमान छू रहे थे. हालांकि, इस छठवें दिन हालात थोड़े सुधरे से हुए हैं, मगर आज भी इंडिगो के फ्लाइट्स के कैंसिलेशन का सिलसिला जारी है. बताया जा रहा है कि डीजीसीए द्वारा जारी एफडीटीएल गाइडलाइंस और पायलट्स की कमी की वजह से फ्लाइट्स कैंसिल हुईं. मगर, अंदर की बात जानकर हैरान हो जाएंगे. इंडिगो के पास पायलट्स की कमी नहीं थी. ये एक जानबूझकर किया गया प्लान था, ऐसा नाम न छापने के शर्त पर इंडिगो के एक पायलट ने बताया.
देश के सबसे बड़े एयरलाइन इंडिगो ने पिछले छह दिनों में 2,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द कीं, लाखों यात्री फंसे, किराया आसमान छूने लगा और पूरा एविएशन सेक्टर ठप्प सा हो गया. वजह बताई गई– नए FDTL नियमों (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) के लागू होने से पायलटों की कमी. लेकिन कुल कमी सिर्फ 124 पायलटों की थी यानी 65 कैप्टन और 59 को-पायलट. सवाल यही है- सिर्फ 124 पायलटों की कमी से 2,200 दैनिक उड़ानों वाली एयरलाइन कैसे ध्वस्त हो गई?
सोची-समझी साजिश
इंडिगो के ही पायलट अब खुलकर बोल रहे हैं. ये कमी नहीं, सुनियोजित साजिश थी. एयरलाइन प्रबंधन ने जानबूझकर नए सुरक्षा नियमों को कमजोर करने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए ये पूरा तमाशा रचा. एक वरिष्ठ पायलट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘हमारे पास कुल 4,551 पायलट हैं. 2,357 कैप्टन और 2,194 फर्स्ट ऑफिसर. 124 की कमी मतलब महज 2.7% डेफिसिट. नए नियम लागू होने पर भी सिर्फ 5-7% उड़ानें प्रभावित होनी चाहिए थीं. लेकिन अचानक 30-40% उड़ानें रोज कैंसिल होने लगीं. ये प्राकृतिक नहीं, कृत्रिम संकट था.’
पायलटों का दावा है कि सालों से चल रहे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को जानबूझकर तोड़ा गया. पहले स्टैंडबाय पायलट हमेशा तैयार रहते थे. अगर कोई पायलट बीमार पड़ता तो 5-6 घंटे पहले कॉल जाती थी. लेकिन अचानक ये कॉल 1-2 घंटे पहले आने लगीं. जाहिर है, अगर पायलट नहीं पहुंचता है तो फ्लाइट कैंसिल होंगी.
कोलकाता एयरपोर्ट वाला गेम
कोलकाता एयरपोर्ट पर तो हद हो गई- पहले एक-दूसरे के बगल में खड़े होने वाले विमान अब दूर-दूर रिमोट बे में पार्क किए जा रहे थे, ताकि ग्राउंड क्रू को आने-जाने में देरी हो, बोर्डिंग लेट हो और चेन रिएक्शन शुरू हो जाए. एक पायलट ने कहा, ‘ये सब जानबूझकर किया गया. प्रबंधन चाहता था कि यात्री गुस्सा करें, मीडिया में हंगामा हो और सरकार नए FDTL नियम वापस ले ले.’ एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सैम थॉमस ने साफ कहा, ‘प्रॉफिट को सुरक्षा से ऊपर रखा जा रहा है. दो साल पहले घोषित नियमों को वापस करवाने के लिए इंडिगो ने इतना बड़ा खेल खेला. ये सिर्फ लापरवाही नहीं, आपराधिक कृत्य है.’
उत्पन्न किया गया है ये संकट?
अब पायलट फॉरेंसिक जांच की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जिन अधिकारियों ने SOP तोड़े, स्टैंडबाय रोस्टर खाली रखे और जानबूझकर देरी करवाई, उनके खिलाफ मुकदमा चलना चाहिए. 124 पायलटों की कमी नहीं थी. कमी थी इंसानियत की, सुरक्षा की और जिम्मेदारी की. अब सच बाहर आ रहा है- ये हाहाकार प्राकृतिक नहीं, पूरी तरह इंजीनियर्ड था.







