भारत सरकार ने कॉटन के ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट को 3 महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक कर दिया है. सरकार ने ये फैसला अमेरिका की तरफ से लगाए गए टैरिफ के बाद लिया है. अमेरिका ने भारत से आयातित वस्त्रों पर 50% टैरिफ लगा दिया है. इस वजह से भारतीय टेक्सटाइल और टेक्सटाइल उद्योग पर लागत और निर्यात प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ गया है.
अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया है. इसका कारण भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद और अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोलने से इनकार करने को बताया जा रहा है. भारत सरकार का मानना है कि ड्यूटी-फ्री कॉटन इम्पोर्ट से घरेलू उद्योग को कम लागत पर कच्चा माल मिलेगा. इससे अमेरिकी टैरिफ के असर को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकेगा.
भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री
PIB की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री लगभग 350 अरब डॉलर की है और यह कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है. इसमें 4.5 करोड़ से अधिक लोग सीधे इस सेक्टर से जुड़े हैं. 2023-24 में भारत ने 34.4 बिलियन डॉलर मूल्य का कपड़ा निर्यात किया था, लेकिन अमेरिकी टैरिफ से निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है. हालांकि, ड्यूटी-फ्री कॉटन आयात से कपड़ा मिलों की लागत घटेगी. धागा और कपड़े सस्ते बनेंगे. भारत वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रख पाएगा.
भारत के फैसले का भू-राजनीतिक और आर्थिक संकेत
भारत का यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है. यह दिखाता है कि भारत अमेरिकी दबाव के बावजूद अपने उद्योग की रक्षा के लिए कदम उठा रहा है. साथ ही, यह संदेश भी है कि भारत नए निर्यात बाजारों (ब्रिटेन, जापान, यूरोप, एशिया) की ओर झुक रहा है. इसके संबंध में सरकार दुनिया के 40 देशों में टेक्सटाइल प्रोडक्ट का निर्यात करने का फैसला लिया है. इसके लिए भारत ने हर एक देश के लिए अलग-अलग प्लान तैयार किया है.
प्रमुख बातें
-
अवधि: कॉटन (HS 5201) के आयात पर ड्यूटी-फ्री छूट अब 31 दिसंबर 2025 तक लागू है।
-
पिछला नियम: पहले छूट 19 अगस्त 2025 से 30 सितंबर 2025 तक थी, अब तीन महीने और बढ़ा दी गई।
-
आयात शुल्क: आयातित कपास पर 11% शुल्क लगता था, जिसे अस्थायी तौर पर शून्य कर दिया गया है।
-
उद्देश्य: कपड़ा उद्योग की कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाना और लागत में राहत देना।
-
प्रभाव: कपास किसानों के लिए चुनौती हो सकती है क्योंकि विदेश से आयातित कपास की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
Sector Impact
-
कपड़ा निर्यातक और विनिर्माता: कच्चे माल की लागत कम होगी, अंतर्राष्ट्रीय मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
-
कपास किसान: आयातित कपास की वजह से घरेलू किसानों को दबाव महसूस हो सकता है।
-
विनिर्माण लागत: धागा, कपड़ा व परिधान की लागत में कमी आ सकती है।
सरकारी बयान
सरकार का कहना है कि यह कदम “अमेरिकी टैरिफ के दबाव में कपड़ा उद्योग को सहायता” और “कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने” के लिए किया गया है।
निष्कर्ष
कॉटन का ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट अब 31 दिसंबर 2025 तक भारत में अनुमति है, जिससे कपड़ा उद्योग को राहत मिलेगी व भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी—लेकिन घरेलू कपास किसानों पर असर पड़ सकता है।







