झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता शिबू सोरेन (गुरुजी) को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है. जैप (झारखंड आर्म्ड पुलिस) के जवानों ने पारंपरिक सलामी देकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. गुरुजी का पार्थिव शरीर विधानसभा परिसर से नेमरा स्थित उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किया गया. शवयात्रा मेकॉन चौक, सिरमटोली, कांटाटोली और बूटी मोड़ होते हुए ओरमांझी की ओर बढ़ रही है.
गुरुजी शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा उनके आवास से शुरू हुई. उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस से विधानसभा परिसर की ओर रवाना हुआ, जिसमें उनके बेटे और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे.
शवयात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े. एंबुलेंस के पीछे हजारों की भीड़ पैदल चल रही थी. विधानसभा परिसर में शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए मंत्री, विधायक, पार्टी कार्यकर्ता और आमजन पहुंच रहे हैं. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार विधानसभा पहुंच रहे हैं.
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन आदिवासियों की सशक्त आवाज थे. उनकी सोच और संघर्ष को आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी. मनोज तिवारी ने याद दिलाया कि स्वर्गीय सोरेन ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से झारखंड राज्य की मांग की थी और झारखंड के गठन में उनकी अहम भूमिका रही है.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर जल्द ही विधानसभा परिसर में लाया जाएगा. इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व विधायक लेविन हेंब्रम, जयराम महतो समेत कई विधायक परिसर में पहुंच चुके हैं. पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि के लिए कुछ देर बाद विधानसभा परिसर में रखा जाएगा, जहां नेता और आम लोग उन्हें अंतिम विदाई देंगे.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन के निधन पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हेमंत ने लिखा, ‘मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं। मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया। मैं उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं कहता था, वे मेरे पथप्रदर्शक थे, मेरे विचारों की जड़ें थे और उस जंगल जैसी छाया थे, जिसने हजारों-लाखों झारखंडियों को धूप और अन्याय से बचाया।’
‘पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया’
उन्होंने लिखा, ‘मेरे बाबा की शुरुआत बहुत साधारण थी। नेमरा गांव के उस छोटे से घर में जन्मे, जहां गरीबी थी, भूख थी, पर हिम्मत थी। बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया। जमीदारी के शोषण ने उन्हें एक ऐसी आग दी, जिसने उन्हें पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया। मैंने उन्हें देखा है, हल चलाते हुए, लोगों के बीच बैठते हुए, सिर्फ भाषण नहीं देते थे, लोगों का दुःख जीते थे।’
‘बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया, हमें चलना सिखाया’
हेमंत ने लिखा, ‘बचपन में जब मैं उनसे पूछता था- बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं? तो वे मुस्कुराकर कहते- क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली। वो उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी, न संसद ने दी, वह झारखंड की जनता के दिलों से निकली थी। ‘दिशोम’ मतलब समाज, ‘गुरु’ मतलब जो रास्ता दिखाए। सच कहूं तो बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया, हमें चलना सिखाया।’
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता शिबू सोरेन (गुरुजी) को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है. जैप (झारखंड आर्म्ड पुलिस) के जवानों ने पारंपरिक सलामी देकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. गुरुजी का पार्थिव शरीर विधानसभा परिसर से नेमरा स्थित उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किया गया. शवयात्रा मेकॉन चौक, सिरमटोली, कांटाटोली और बूटी मोड़ होते हुए ओरमांझी की ओर बढ़ रही है.
गुरुजी शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा उनके आवास से शुरू हुई. उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस से विधानसभा परिसर की ओर रवाना हुआ, जिसमें उनके बेटे और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे.
शवयात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े. एंबुलेंस के पीछे हजारों की भीड़ पैदल चल रही थी. विधानसभा परिसर में शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए मंत्री, विधायक, पार्टी कार्यकर्ता और आमजन पहुंच रहे हैं. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार विधानसभा पहुंच रहे हैं.
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन आदिवासियों की सशक्त आवाज थे. उनकी सोच और संघर्ष को आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी. मनोज तिवारी ने याद दिलाया कि स्वर्गीय सोरेन ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से झारखंड राज्य की मांग की थी और झारखंड के गठन में उनकी अहम भूमिका रही है.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर जल्द ही विधानसभा परिसर में लाया जाएगा. इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व विधायक लेविन हेंब्रम, जयराम महतो समेत कई विधायक परिसर में पहुंच चुके हैं. पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि के लिए कुछ देर बाद विधानसभा परिसर में रखा जाएगा, जहां नेता और आम लोग उन्हें अंतिम विदाई देंगे.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन के निधन पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर हेमंत ने लिखा, ‘मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं। मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया। मैं उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं कहता था, वे मेरे पथप्रदर्शक थे, मेरे विचारों की जड़ें थे और उस जंगल जैसी छाया थे, जिसने हजारों-लाखों झारखंडियों को धूप और अन्याय से बचाया।’
‘पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया’
उन्होंने लिखा, ‘मेरे बाबा की शुरुआत बहुत साधारण थी। नेमरा गांव के उस छोटे से घर में जन्मे, जहां गरीबी थी, भूख थी, पर हिम्मत थी। बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया। जमीदारी के शोषण ने उन्हें एक ऐसी आग दी, जिसने उन्हें पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया। मैंने उन्हें देखा है, हल चलाते हुए, लोगों के बीच बैठते हुए, सिर्फ भाषण नहीं देते थे, लोगों का दुःख जीते थे।’
‘बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया, हमें चलना सिखाया’
हेमंत ने लिखा, ‘बचपन में जब मैं उनसे पूछता था- बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं? तो वे मुस्कुराकर कहते- क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली। वो उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी, न संसद ने दी, वह झारखंड की जनता के दिलों से निकली थी। ‘दिशोम’ मतलब समाज, ‘गुरु’ मतलब जो रास्ता दिखाए। सच कहूं तो बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया, हमें चलना सिखाया।’







