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जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया ,इस्तीफा मंजूर

UB India News by UB India News
July 23, 2025
in राष्ट्रपति भवन
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मैं आपको लज्जित नहीं करना चाहता, लेकिन…
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस्तीफा मंजूर कर लिया। यह जानकारी राज्यसभा में पीठासीन घनश्याम तिवाड़ी ने दी। धनखड़ आज सदन की कार्यवाही में भी शामिल नहीं हुए। सुबह 11 बजे अपर सदन की कार्यवाही की शुरुआत JDU सांसद हरिवंश ने की। इससे पहले खबर आई थी कि जगदीप इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। ना ही विदाई समारोह में शामिल होंगे। उधर, PM मोदी ने कहा कि मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

देश के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक का था। उन्होंने 10 जुलाई को एक कार्यक्रम में कहा था, ‘ईश्वर की कृपा रही तो अगस्त, 2027 में रिटायर हो जाऊंगा।’

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74 साल के जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं और चिकित्सा सलाह का पालन कर रहे हैं. यह अप्रत्याशित घटनाक्रम सोमवार को पहले हुई एक चर्चा के बाद आया है, जिसमें प्रधानमंत्री और सीनियर मंत्री संसद में एकांत में बैठे थे और संभवतः इसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे. ऐसा लगता है कि इस कदम के पीछे जो दिख रहा है, कहानी उससे कहीं ज्यादा है.

जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष के रूप में तीन साल से कम समय तक सेवा की है. करीब 4 बजे उनके कार्यालय ने 23 जुलाई को जयपुर की आधिकारिक यात्रा की योजना के बारे में एक बयान जारी किया. जगदीप धनखड़ सदन में भी उपस्थित थे, जहां उन्होंने जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग की मांग करने वाले 50 से अधिक सांसदों की ओर से हस्ताक्षरित पत्र प्राप्त करने की घोषणा की. इस पत्र पर विपक्षी सांसदों के दस्तखत थे और जगदीप धनखड़ ने इसे स्वीकार किया. उन्होंने फिर सचिव-जनरल को मामले को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया.

सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति ने बिना किसी पूर्व नियुक्ति के राष्ट्रपति भवन में अचानक आकर अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया. अब सवाल है कि आखिर उन्होंने अचानक इस्तीफा क्यों दिया? संसद के गलियारों में जगदीप धनखड़ की हाल ही में कांग्रेस के कई विपक्षी नेताओं के साथ निकटता के बारे में चर्चा हो रही थी. उन्होंने पिछले सप्ताह वीपी एन्क्लेव में मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की थी और रविवार को अरविंद केजरीवाल के साथ भी बैठक की थी. न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एनजेएसी जैसी संस्था की वापसी के लिए जगदीप धनखड़ का अभियान भी सरकार के साथ मेल नहीं खाता था.
कौन हैं जगदीप धनखड़?
साल 1951 में राजस्थान के झुंझुनू जिले में जन्मे धनखड़ एक किसान परिवार से हैं. उन्होंने 1979 में राजस्थान बार में दाखिला लिया. सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों में राज्य के सीनियर अधिवक्ता के रूप में अभ्यास किया, और राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में सेवा की.

उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की 2 थ्योरी पहली: राष्ट्रपति को लिखे त्यागपत्र में धनखड़ ने पद छोड़ने की वजह स्वास्थ्य बताया था। दूसरी: विपक्ष इस्तीफे पर सवाल कर रहा है। कह रहा है कि इसकी वजह कुछ और है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को बताया, ’21 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे श्री जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की अध्यक्षता की। इस बैठक में सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत ज़्यादातर सदस्य मौजूद थे। थोड़ी देर की चर्चा के बाद तय हुआ कि समिति की अगली बैठक शाम 4:30 बजे फिर से होगी।

शाम 4:30 बजे धनखड़ जी की अध्यक्षता में समिति के सदस्य दोबारा बैठक के लिए इकट्ठा हुए। सभी नड्डा और रिजिजू का इंतज़ार करते रहे, लेकिन वे नहीं आए। सबसे हैरानी की बात यह थी कि धनखड़ जी को व्यक्तिगत रूप से यह नहीं बताया गया कि दोनों मंत्री बैठक में नहीं आएंगे। स्वाभाविक रूप से उन्हें इस बात का बुरा लगा और उन्होंने BAC की अगली बैठक आज दोपहर 1 बजे के लिए टाल दी।

इससे साफ है कि कल दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे के बीच जरूर कुछ गंभीर बात हुई है, जिसकी वजह से जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने जानबूझकर शाम की बैठक में हिस्सा नहीं लिया।

अब एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए, श्री जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसकी वजह अपनी सेहत को बताया है। हमें इसका मान रखना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह भी है कि इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं। श्री जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उनके बारे में बहुत कुछ कहता है। साथ ही, यह उन लोगों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाया था।

विपक्ष के अन्य नेताओं के बयान

  • सांसद जेबी माथेर, कांग्रेस ‘यह वास्तव में बहुत चौंकाने वाला है। उपराष्ट्रपति ने आज सुबह (21 जुलाई) भी राज्यसभा सत्र की अध्यक्षता की। यह एक बहुत ही अप्रत्याशित घटनाक्रम है। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और प्रत्येक मुद्दे को देखने के हमारे नजरिए के कारण हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं। वे जल्द स्वस्थ हों।’
  • दानिश अली, कांग्रेस ‘रहस्यमयी चीजें हो रही हैं, जो देश के हित में नहीं हैं। धनखड़ के इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं नहीं लगतीं। सुनने में आया था कि भाजपा के कुछ टॉप लीडर्स उनके पद की गरिमा के मुताबिक बयान नहीं दे रहे थे। ऐसा लगता है कि जस्टिस यादव और जस्टिस वर्मा को लेकर सरकार से उनके मतभेद थे। उन्होंने कई बार कहा है कि वह कभी किसी के दबाव में नहीं आएंगे।’
  • सुखदेव भगत, कांग्रेस ‘ईश्वर जगदीप धनखड़ को स्वस्थ जीवन प्रदान करे, लेकिन राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता। पटकथा पहले से ही लिखी जाती है। बिहार चुनाव नजदीक हैं। यह एक पहलू हो सकता है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की इच्छा के मुताबिक बहुत सी अप्रत्याशित चीजें होती हैं।’

जगदीप धनखड़ का सियासी सफर

1990 के दशक में राजनीति में प्रवेश करते हुए वह जनता दल के साथ झुंझुनू से लोकसभा सांसद चुने गए और चंद्रशेखर सरकार में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में सेवा की. वह 2003 में भाजपा में शामिल हो गए. 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उनका ममता बनर्जी सरकार के साथ अक्सर टकराव होता रहा.

कब बने उपराष्ट्रपति?

जगदीप धनखड़ 2022 में भारत के 14वें उपराष्ट्रपति चुने गए. उन्होंने 11 अगस्त 2022 को पद की शपथ ली. उनके नेतृत्व को दृढ़ता और कभी-कभी पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण के लिए जाना गया. इसके कारण दिसंबर 2024 में विपक्षी दलों की ओर से एक अभूतपूर्व महाभियोग प्रस्ताव दायर किया गया. जगदीप धनखड़ ने विपक्ष के इस कदम से गहरी निराशा व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वह आहत महसूस कर रहे हैं. कुछ विपक्षी सांसदों जैसे कि कल्याण बनर्जी ने संसद के गेट पर धनखड़ की नकल की, जिससे उनके विपक्ष के साथ विवादास्पद संबंध उजागर हुए.

अब कितने दिन के भीतर चुनाव?

सरकार को अब अगले 60 दिनों के भीतर एक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना होगा. जगदीप धनखड़ का इस्तीफा संसद के महत्वपूर्ण मानसून सत्र के पहले दिन आया है. जहां ऑपरेशन सिंदूर और जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही पर चर्चा होनी है. राज्यसभा के उपाध्यक्ष हरिवंश धनखड़ के बाकी मानसून सत्र के लिए उनकी जगह लेंगे. चुनाव आयोग जल्द ही उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए कार्यक्रम की घोषणा करेगा. इस चुनाव में केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद गुप्त मतदान और आनुपातिक प्रणाली का उपयोग करके वोट देते हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार अगले उपराष्ट्रपति के रूप में किसे चुनेगी.
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