कांग्रेस के लिए बुरी खबर छत्तीसगढ़ से आई। 2000 करोड़ रु. के शराब घोटाले के आरोप में ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ़्तार कर लिया। कोर्ट ने चैतन्य बघेल को 5 दिन के लिए ED की कस्टडी में भेज दिया।
ED का आरोप है कि 2018 से 2023 के दौरान जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे तब राज्य में दो हज़ार करोड़ से ज़्यादा का शराब घोटाला किया गया। इस घोटाले में भूपेश बघेल की सरकार में आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा, कारोबारी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा शामिल थे। ईडी का आरोप है कि शराब घोटाले की काली कमाई को चैतन्य बघेल की रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए white money में बदला गया।
ED का आरोप है कि भूपेश बघेल की सरकार के वक्त स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन जो शराब खरीदता था, उसके एवज़ में शराब बनाने वाली कंपनियों से मोटा कमीशन लिया जाता था। ED का ये भी इल्ज़ाम है कि उस दौरान छत्तीसगढ़ की सरकारी शराब की दुकानों से कच्ची शराब बेची जाती थी जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था और सारा पैसा शराब सिंडीकेट के हाथ में चला जाता था। शराब कंपनियों से रिश्वत लेकर उनको fixed मार्केट शेयर दिए जाते थे, जिससे वो कार्टेल बनाकर मनमानी क़ीमत पर शराब बेचते थे। ईडी का आरोप है कि विदेशी शराब के धंधे में एंट्री के बदले में भी रिश्वत ली जाती थी।
इस मामले में पहली FIR छत्तीसगढ़ के एंटी करप्शन ब्यूरो ने दर्ज की थी जिसमें पूर्व आबकारी मंत्री समेत 70 लोग आरोपी बनाए गए थे। इसी के बाद इस मामले में ED की एंट्री हुई। इस केस में ED अब तक 205 करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त कर चुकी है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी कई बार पूछताछ की गई है।
छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला 2022 में सामने आया था। पिछले विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल के खिलाफ ये बड़ा मुद्दा बना। उस वक्त भूपेश बघेल ने कहा था कि ये सारा ड्रामा चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए रचा गया। चुनाव हुए, सरकार बदल गई, फिर पिछले डेढ़ साल से भूपेश बघेल हर दूसरे दिन ये बयान देते थे कि शराब घोटाले का क्या हुआ? अब तक उसमें कुछ निकला क्यों नहीं? अगर कोई सबूत था तो कोई एक्शन क्यों नहीं हुआ?
अब एक्शन हो गया, बेटे की गिरफ्तारी हो गई, तो भूपेश बघेल कह रहे हैं, ये सब बदले की कार्रवाई है। अब मामला कोर्ट में है और अदालत में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।







