मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप धमकी दे रहे हैं कि अगर व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर की शुरुआत तक यूक्रेन के खिलाफ अपना युद्ध बंद नहीं किया तो रूस के व्यापारिक साझेदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया जाएगा. कुछ ऐसी ही धमकी नाटो ने भी दोहराई है. नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने बुधवार, 15 जुलाई को चेतावनी दी कि अगर ब्राजील, चीन और भारत जैसे देश रूस के साथ अपना व्यापार करना जारी रखते हैं तो उन पर भी आर्थिक प्रतिबंध (सेकेंडरी सैंक्शंस के रूप में) लगाए जा सकते हैं.
भारत
इकोनॉमिक थिंक टैंक ब्रुएगेल के अनुसार, भारत रूस का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है. इस साल मई तक दोनों देश के बीच कुल 68 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. भारत रूस से मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन (तेल-गैस) खरीदता है. रूस से होने वाले कुल निर्यात में जीवाश्म ईंधन का हिस्सा 90 प्रतिशत है. भारत दुनिया में रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. वहीं रूस को भारत मूलतः परमाणु रिएक्टर, मशीनरी और फार्मास्युटिकल कंपाउंड बेचता है.
चीन
ब्रुएगेल थिंक टैंक के अनुसार, चीन अब तक रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. दोनों के बीच वार्षिक आयात और निर्यात लगभग 240 बिलियन डॉलर का है. ब्रुएगेल के अनुसार, रूस के व्यापार प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है.
मई 2025 तक, रूस ने प्राकृतिक गैस और तेल, चिकित्सा उपकरण और रासायनिक उत्पादों सहित 125 बिलियन डॉलर का सामान चीन को निर्यात किया. वहीं चीन से रूस को होने वाला आयात 113 अरब डॉलर का था, जिसमें मुख्य रूप से इस्पात, उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ा शामिल था.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने मंगलवार को ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए कहा कि यूक्रेन पर उनके देश की स्थिति हमेशा “स्पष्ट और सुसंगत रही है – हमने हमेशा माना है कि बातचीत ही यूक्रेन संकट का एकमात्र व्यवहार्य समाधान है”. उन्होंने कहा, “चीन सभी अवैध एकतरफा प्रतिबंधों और दीर्घकालिक अधिकार क्षेत्र का दृढ़ता से विरोध करता है”. उन्होंने कहा: “टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं होता है.”
बेलारूस
बेलारूस, रूस का करीबी सहयोगी है. यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की मदद करने के लिए अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने खुद बेलारूस पर प्रतिबंध लगा रखे हैं. बेलारूस अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल और गैस पर बहुत अधिक निर्भर करता है.
रूसी सीमा शुल्क आंकड़ों के अनुसार, जनवरी और अक्टूबर 2024 के बीच दोनों के बीच 60 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. लेकिन संयुक्त राष्ट्र कमोडिटी ट्रेड स्टैटिस्टिक्स डेटाबेस के अनुसार, खतरे वाले अमेरिकी टैरिफ को लेकर बेलारूस का जोखिम सीमित हो सकता है, क्योंकि बेलारूस अमेरिका को केवल 21 मिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों का निर्यात करता है. जब वह अमेरिका को इतना कम निर्यात करता है तो ट्रंप केवल इतने ही मूल्य के उत्पादों पर ही टैरिफ लगा पाएंगे न.
यूरोपियन यूनियन और तुर्की
भले ही यूरोपियन यूनियन ने रूस पर कई दौर के प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन वह रूसी गैस का बड़ा खरीदार बना हुआ है. ब्रुएगेल के अनुसार, यूरोपियन यूनियन संभवतः रूस का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. मई तक इस साल कुल $71 बिलियन का व्यापार दोनों के बीच हुआ है. रूस के कुल आयात-निर्यात का 14 प्रतिशत हिस्सा यूरोपियन यूनियन के साथ ही हुआ है.
यूरोपियन कमिशन उस व्यापार को कम करने की कोशिश कर रहा है. उसने कहा है कि कि वह 2027 के अंत तक रूसी प्राकृतिक गैस आयात को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना बना रहा है.
अब बात तुर्की की जो यूरोपियन यूनियन का हिस्सा नहीं है. ब्रुएगेल के अनुसार, रूस का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जिसने पिछले साल 52 बिलियन डॉलर मूल्य का व्यापार किया था. तुर्की ने बड़े पैमाने पर रूसी जीवाश्म ईंधन का आयात किया और इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया.
इंडियन PM हों या चीनी राष्ट्रपति, रूस को जंग रोकने को कहें, वरना नतीजा भुगतना होगा
नाटो ने भारत, चीन और ब्राजील पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। नाटो महासचिव मार्क रूट ने बुधवार को कहा कि अगर आप चीन के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री या ब्राजील के राष्ट्रपति हैं, तो आपको यह समझना होगा कि रूस के साथ व्यापार जारी रखने का भारी नुकसान हो सकता है।
रूट ने बुधवार को अमेरिकी सीनेटरों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इन तीनों देशों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव डालना चाहिए, ताकि वह शांति वार्ता को गंभीरता से लें।
रूट ने तीनों देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ये देश रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो इन देशों पर 100% सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
रूस बोला- अपनी नीतियां नहीं बदलेंगे
वहीं, रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने अमेरिका और नाटो की धमकियों को खारिज किया। उन्होंने कहा, रूस ट्रम्प के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इस तरह के अल्टीमेटम मंजूर नहीं हैं।
रियाबकोव ने कहा कि रूस आर्थिक दबाव के बावजूद अपनी नीतियां नहीं बदलेगा और ऑप्शनल बिजनेस रूट तलाशेगा।
नाटो महासचिव की यह चेतावनी उस समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन को नए हथियार देने और रूस के व्यापारिक साझीदारों पर भारी टैक्स लगाने की घोषणा की है।
अमेरिका अब यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल जैसे आधुनिक हथियार देने वाला है, ताकि वह रूस के हमलों से बच सके।
सेकेंडरी प्रतिबंध के बारे में जानिए…
सेकेंडरी प्रतिबंध उन देशों या कंपनियों पर लगाए जाते हैं जो सीधे प्रतिबंधित देश पर नहीं, लेकिन उसके साथ व्यापार करने वाले देशों या कंपनियों पर लगाए जाते हैं।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए कि जैसे अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा रखा है। अगर अब भारत की कोई कंपनी ईरान से तेल खरीदती है, तो अमेरिका कह सकता है कि भारत की कंपनी ने हमारे प्रतिबंधों की अनदेखी की है, ऐसे में हम उन्हें सजा देंगे।
अमेरिका, ईरान से व्यापार करने वाली कंपनी को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम से निकाल सकती है, जुर्माना लगा सकती है या व्यापार पर रोक लगा सकती है।
इसका असर ये होता है कि सेकेंडरी प्रतिबंध के डर के कारण बहुत सी कंपनियां ऐसे देशों से व्यापार करने से बचने लगती हैं।
दो दिन पहले ट्रम्प ने रूस पर 100% टैरिफ की धमकी दी ट्रम्प ने सोमवार को रूस पर यूक्रेन से जंग खत्म करने का दबाव डालने के लिए भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ट्रम्प ने कहा था- मैं ट्रेड को कई चीजों के लिए इस्तेमाल करता हूं, लेकिन यह युद्ध खत्म करने के लिए बहुत अच्छा है।
ट्रम्प ने कहा था कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 50 दिन में यूक्रेन के साथ शांति समझौता नहीं किया, तो उस पर 100% टैरिफ लगेगा। ट्रम्प ने बताया कि यह ‘सेकेंडरी टैरिफ’ होगा, जिसका मतलब रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जैसे भारत और चीन, पर भी प्रतिबंध लगेगा।

सेकेंडरी प्रतिबंध का भारत पर क्या असर होगा?
भारत रूस से कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया है। अगर सेकेंडरी प्रतिबंध लागू होते हैं, तो भारत पर इसके बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं।
- तेल आपूर्ति में रुकावट: भारत रूस से अपनी कुल तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा खरीदता है। प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल की आपूर्ति रुक सकती है। इससे भारत को वैकल्पिक स्रोतों (जैसे सऊदी अरब, इराक) से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी।
- आर्थिक नुकसान: अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर आम जनता पर पड़ेगा। अगर भारत रूस के साथ व्यापार जारी रखता है, तो अमेरिका भारतीय कंपनियों या बैंकों पर प्रतिबंध लगा सकता है, जिससे भारत का निर्यात और वित्तीय लेनदेन प्रभावित होगा।
- ऊर्जा संकट: रूस से तेल आयात बंद होने पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है, और नए प्रतिबंध इस स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। भारत को तेल की कमी से बचने के लिए आपातकालीन योजनाएं बनानी पड़ सकती हैं।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव: भारत को अमेरिका और नाटो के दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उसकी विदेश नीति पर असर पड़ेगा। भारत को रूस और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है।






