केंद्र सरकार अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) मूल्य निर्धारण प्रणाली में बड़े बदलाव करने के बारे में सोच रही है ताकि उपभोक्ताओं को अधिक राहत मिल सके और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा सके. Mint की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय उपभोक्ता मामलों का विभाग इस मुद्दे पर संबंधित हितधारकों के साथ चर्चा कर रहा है और बातचीत अभी बहुत प्रारंभिक चरण में है.
MRP प्रणाली का उपयोग प्री-लिबरलाइजेशन के समय से हो रहा है, जब इसे उन खुदरा विक्रेताओं की अनुचित गतिविधियों को रोकने के लिए पेश किया गया था जो भोले-भाले उपभोक्ताओं से अत्यधिक शुल्क लेते थे.
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य कीमतों को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि लागत और मुनाफे के हिसाब से इसे उचित बनाना और अनुचित व्यापार प्रथाओं की जांच करना है.
इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा. क्योंकि अभी कुछ भी तय नहीं है. नए फॉर्मूला, यानी लागत, लाभ मार्जिन और अन्य शुल्क के आधार पर तय रेट, मौजूदा दरों से ज्यादा हो सकता है और कम भी. इसके लिए थोडा सा इंतजार करना होगा.







