संसद के निचले सदन के बाद अब ऊपरी सदन में भी संविधान पर चर्चा के लिए दो दिवसीय सत्र रखा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्य सभा में संविधान गौरव यात्रा पर चर्चा की शुरुआत करेंगी। इस विषय पर चर्चा के लिए कांग्रेस को 90 मिनट का समय दिया गया है। कांग्रेस की तरफ से विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, मुकुल वासनिक और अभिषेक मनुसंघवी अपनी बात रखेंगे। इससे पहले लोकसभा में हुई चर्चा में प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और अखिलेश यादव सहित कई सांसदों ने अपनी बात रखी थी और पीएम मोदी ने सत्र के अंत में जवाब दिया।
वित्त मंत्री ने 1 घंटे 20 मिनट की स्पीच दी। वित्त मंत्री ने कहा- कांग्रेस पार्टी परिवार और वंशवाद की मदद करने के लिए बेशर्मी से संविधान में संशोधन करती रही। ये संशोधन लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए नहीं बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की रक्षा के लिए थे। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल परिवार को मजबूत करने के लिए किया गया।
सीतारमण ने कांग्रेस और लालू यादव पर बोला हमला
संविधान पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में वित्त मंत्री ने कहा “कांग्रेस पार्टी परिवार और वंशवाद की मदद के लिए बेशर्मी से संविधान में संशोधन करती रही। ये संशोधन लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए नहीं थे, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की रक्षा के लिए थे, इस प्रक्रिया का इस्तेमाल परिवार को मजबूत करने के लिए किया गया।” उन्होंने लालू यादव पर निशाना साधते हुए कहा “मैं ऐसे राजनीतिक नेताओं को जानती हूं, जिन्होंने उन काले दिनों को याद रखने के लिए बच्चों का नाम मीसा के नाम पर रखने का फैसला किया और अब उन्हें उनके साथ गठबंधन करने में भी कोई आपत्ति नहीं है।”
-
कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किया- सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का आरोप लगाते हैं कहा “मजरूह सुल्तानपुरी और बलराज साहनी दोनों को 1949 में जेल भेजा गया था। 1949 में मिल मजदूरों के लिए आयोजित एक बैठक के दौरान मजरूह सुल्तानपुरी ने जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ लिखी गई एक कविता सुनाई और इसलिए उन्हें जेल जाना पड़ा। उन्होंने इसके लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया और उन्हें जेल जाना पड़ा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का कांग्रेस का रिकॉर्ड सिर्फ इन दो लोगों तक सीमित नहीं था। 1975 में माइकल एडवर्ड्स द्वारा लिखी गई राजनीतिक जीवनी “नेहरू” पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उन्होंने “किस्सा कुर्सी का” नामक एक फिल्म पर भी प्रतिबंध लगा दिया, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे पर सवाल उठाए गए थे।”
निर्मला सीतारमण ने नेहरू सरकार पर साधा निशाना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाहरलाल नेहरू की अगुआई वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा “1950 में सुप्रीम कोर्ट ने कम्युनिस्ट पत्रिका “क्रॉस रोड्स” और आरएसएस की संगठनात्मक पत्रिका “ऑर्गनाइजर” के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन इसके जवाब में, (तत्कालीन) अंतरिम सरकार ने सोचा कि पहले संविधान संशोधन की आवश्यकता है और इसे कांग्रेस द्वारा लाया गया था। यह मूल रूप से स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए था। इसलिए भारत, एक लोकतांत्रिक देश जो आज भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गर्व करता है, ने पहली अंतरिम सरकार को एक संविधान संशोधन के साथ आते देखा जिसका उद्देश्य भारतीयों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना था और वह भी संविधान को अपनाने के एक वर्ष के भीतर।”
संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा- सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संविधान के 75 साल पूरे होने पर राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत का संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है। उन्होंने कहा “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, 50 से अधिक देश स्वतंत्र हो गए थे और उनका संविधान लिखा हुआ था। लेकिन कई देशों ने अपने संविधानों को बदल दिया, न केवल उनमें संशोधन किया बल्कि वस्तुतः उनके संविधान की पूरी विशेषता को ही बदल दिया। लेकिन हमारा संविधान बहुत से संशोधनों के बावजूद भी समय की कसौटी पर खरा उतरा है।
खड़गे ने राज्यसभा में शायरी पढ़ी
तुम अपने अकीदों के नेजे हर दिल में उतारे जाते हो
हम लोग मोहब्बत वाले हैं तुम खंजर क्यूं लहराते हो
इस शहर में नगमे बहने दो बस्ती में हमें भी रहने दो
हम पालनहार हैं फूलों के हम खुशबु के रखवाले हैं
तुम किस का लहू पीने आए हम प्यार सिखाने वाले हैं
इस शहर में फिर क्या देखोगे जब हर्फ यहाँ मर जाएगा
जब तेग पे लय कट जाएगी जब शेर सफर कर जाएगा
जब कत्ल हुआ सुर साजों का जब काल पड़ा आवाजों का
जब शहर खंडर बन जाएगा फिर किस पर संग उठाओगे
अपने चेहरे आईनों में जब देखोगे डर जाओगे
खड़गे बोले- संविधान मैंने भी थोड़ा बहुत पढ़ा है
राज्यसभा मे विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- हमारी बहादुर नेता इंदिरा गांधी ने दो टुकड़े करके एक लाख पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी कराकर भारत देश को बचाया। यह काम आयरन लेडी ने किया। उन्होंने बता दिया था कि, हमारे नजदीक कोई आया तो खैर नहीं। आज ये दिन आ गया कि बांग्लादेश में संकट है, सरकार उन्हें बचाने की कोशिश करें। हम सत्ता पक्ष को बताना चाहते हैं कि संविधान हमने भी थोड़ा बहुत पढ़ा है। हम म्यूनिसिपॉलिटी स्कूल में पढ़े हैं, वे जेएनयू में पढ़े हैं। उनकी इंग्लिश अच्छी हो सकती है। लेकिन हमें भी पढ़ना आता है।
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने संसद के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर संविधान पर चर्चा कराने की मांग की थी। लोकसभा में 13 और 14 दिसंबर को संविधान पर विशेष चर्चा हो चुकी है। PM मोदी ने शनिवार को चर्चा के दौरान लोकसभा में संविधान पर विशेष चर्चा में भाग लिया था। इस दौरान उन्होंने सदन में 11 संकल्प रखे थे।







