शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद से अंतरिम सरकार बांग्लादेश में शासन कर रही है। इस अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस हैं। सत्ता संभालने के बाद से ही अंतरिम सरकार से चुनाव की तारीखों का ऐलान करने की मांग की जा रही है। अब बढ़ते दबाव के बीच मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि 2025 के अंत में या फिर 2026 की शुरुआत में चुनाव होंगे।
यूनुस ने कही है सुधार की बात
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की अध्यक्षता वाली बीएनपी समेत प्रमुख राजनीतिक दल जल्द ही देश में चुनाव चाहते हैं। आलोचना और विरोध के बावजूद, यूनुस ने चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है सिर्फ समय निर्धारण की बात कही है। चुनाव की तारीखों के लेकर यूनुस ने कहा कि उन्होंने सभी से बार-बार प्रमुख सुधारों को पूरा करने के बाद चुनाव कराने की अपील की है।
बांग्लादेश आज अपनी आजादी की 53वीं वर्षगांठ मना रहा है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन और और अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने सोमवार को राजधानी ढाका में राष्ट्रीय स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। बांग्लादेश ने 1971 में आज ही के दिन भारत की मदद से पाकिस्तान से आजादी हासिल की थी।
मोहम्मद यूनुस ने इस मौके पर बांग्लादेश के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आम चुनाव की तारीखें 2025 के अंत तक या 2026 की पहली छमाही तक तय हो सकती हैं। मैंने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि चुनाव से पहले कुछ जरूरी सुधार किए जाने चाहिए। अगर राजनीतिक पार्टियां कुछ जरूरी सुधार पर सहमत हो जाएं तो 2025 में चुनाव नवंबर के अंत तक कराए जा सकते हैं।
5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में फिलहाल अंतरिम सरकार स्थापित की गई। मोहम्मद यूनुस इस सरकार का सलाहकार नियुक्त किए गए हैं।
बांग्लादेश के विजय दिवस समारोह में शामिल होने के लिए आज 1971 युद्ध में शामिल आठ भारतीय सिपाही और दो सेवारत अधिकारी ढाका पहुंचे हैं। वहीं बांग्लादेश से मुक्तिवाहिनी के 8 स्वतंत्रता सेनानी और सेना के दो अफसर कोलकाता पहुंचे हैं।

आरक्षण के खिलाफ आंदोलन ने किया था तख्तापलट बांग्लादेश में 5 जून को हाईकोर्ट ने जॉब में 30% कोटा सिस्टम लागू किया था, इसके बाद से ही ढाका में यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे थे। यह आरक्षण स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को दिया जा रहा था। यह आरक्षण खत्म कर दिया गया तो छात्रों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में छात्र और आम लोग प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए।
इस प्रोटेस्ट के दो महीने बाद 5 अगस्त को शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। इसके बाद सेना ने देश की कमान संभाल ली।
बांग्लादेश में भारत के लोकसभा चुनाव जैसी ही चुनावी प्रक्रिया बांग्लादेश में भी भारत के लोकसभा चुनाव जैसी ही चुनावी प्रक्रिया है। यहां संसद सदस्यों का चुनाव भारत की तरह ही फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के जरिए होता है। यानी जिस उम्मीदवार को एक वोट भी ज्यादा मिलेगा, उसी की जीत होगी।
चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन के सांसद अपने नेता का चुनाव करते हैं और वही प्रधानमंत्री बनता है। राष्ट्रपति देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाते हैं।
यहां की संसद में कुल 350 सीटें हैं। इनमें से 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। आरक्षित सीटों पर चुनाव नहीं होता, जबकि 300 सीटों के लिए हर पांच साल में आम चुनाव होते हैं। भारत की संसद में लोकसभा के अलावा राज्यसभा भी होती है, लेकिन बांग्लादेश की संसद में सिर्फ एक ही सदन है।

बांग्लादेश में सरकार का मुखिया कौन होता है? जवाब: भारत की तरह ही बांग्लादेश में भी प्रधानमंत्री ही सरकार के मुखिया होते हैं। राष्ट्रपति देश का प्रमुख होता है, जिसका चुनाव राष्ट्रीय संसद द्वारा किया जाता है।
बांग्लादेश में राष्ट्रपति सिर्फ एक औपचारिक पद है और सरकार पर उसका कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं होता है। 1991 तक राष्ट्रपति का चुनाव यहां भी सीधे जनता करती थी, लेकिन बाद में संवैधानिक बदलाव किया गया। इसके जरिए राष्ट्रपति का चुनाव संसद द्वारा किया जाने लगा। शेख हसीना 20 साल तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं थीं।
कैसी है बांग्लादेश की संसद? बांग्लादेश की संसद को ‘जातियो संगसद’ या हाउस ऑफ द नेशन कहा जाता है। इसकी नई बिल्डिंग 15 फरवरी 1982 में तैयार हुई। यह 200 एकड़ में बनी है। दुनिया में बांग्लादेश ही एकमात्र ऐसा मुस्लिम मेजॉरिटी नेशन है, जिसने अपनी संसद में खासतौर पर महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व रखी हैं। संसद का कार्यकाल भारत की तरह ही पांच साल का होता है। इमरजेंसी में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।







