नरेंद्र मोदी रविवार को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। 15 अगस्त 1947 से अब तक भारत के सभी प्रधानमंत्री राष्ट्रपति भवन में ही शपथ लेते रहे हैं। पीएम मोदी की शपथ के बाद राष्ट्रपति भवन में मेहमानों के डिनर रखा जाता है। ये एक परंपरा है जो दशकों से चली आ रही है।
शपथ ग्रहण से जुड़े कई किस्से है…..
2 दिसंबर 1989 की बात है। दोपहर करीब 12 बजे थे। राष्ट्रपति भवन के अशोका हॉल में वीपी सिंह ने देश के सातवें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। उनके बाद मंत्री पद की शपथ के लिए देवीलाल के नाम की घोषणा हुई।
देवीलाल ने शपथ में ‘मंत्री’ के बजाय ‘उप-प्रधानमंत्री’ बोल दिया। राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने बीच में टोकते हुए कहा कि ‘उप-प्रधानमंत्री’ नहीं ‘मंत्री’ बोलिए। इस बार देवीलाल ने दोबारा पहले से भी ज्यादा ऊंची आवाज में ‘उप-प्रधानमंत्री’ बोला।
इस घटना का जिक्र करते हुए लेखक जनकराज जय ने अपनी किताब ‘कमीशन एंड ओमिशन बाय इंडिया प्रेसिडेंट’ में राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन के हवाले से लिखा कि राष्ट्रपति नहीं चाहते थे कि शपथ ग्रहण समारोह में कोई हंगामा हो जाए। इसीलिए उन्होंने संविधान में उप-प्रधानमंत्री नाम से कोई पद नहीं होने के बावजूद शपथ की इजाजत दे दी।
वेंकटरमन ने बाद में कहा- मैंने अपने सचिव के जरिए वीपी सिंह तक ये मैसेज भेजा था कि देवीलाल मंत्री के तौर पर शपथ लें और नोटिफिकेशन जारी कर उन्हें उप-प्रधानमंत्री बना दिया जाए। हालांकि, मैसेज उन तक पहुंच पाता, इससे पहले शपथ ग्रहण समारोह शुरू हो गया। देवीलाल की नाराजगी इस बात पर थी कि उनसे उप-प्रधानमंत्री बनाने का वादा किया गया था। इसलिए वह मंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार नहीं थे।
देवीलाल एकलौते नेता नहीं हैं। भास्कर एक्सप्लेनर में शपथ ग्रहण से जुड़े ऐसे अनेक रोचक किस्से जानेंगे…
तेज प्रताप ने अपेक्षित को उपेक्षित कहा तो राज्यपाल कोविंद ने टोका
20 नवंबर 2015 को पटना के गांधी मैदान पर नीतीश कैबिनेट शपथ ले रही थी। सबसे पहले नीतीश फिर लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी ने शपथ ली। तीसरे नंबर पर उस समय के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने तेज प्रताप को शपथ दिलानी शुरू की।

तेज प्रताप ने शपथ पढ़ना शुरू किया- ‘मैं, तेज प्रताप ईश्वर की शपथ लेता हूं जो विषय बिहार राज्य के मंत्री के रूप में मेरे विचार के लिए लाया जाएगा अथवा मुझे ज्ञात होगा उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को, तब के सिवाय जबकि ऐसे मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों के सम्यक निर्वहन के लिए ऐसा करना उपेक्षित हो, मैं प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संसूचित या प्रकट नहीं करूंगा।’
इसके बाद राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने उन्हें टोकते हुए कहा कि ये शब्द उपेक्षित नहीं अपेक्षित है। ये सुनते ही मौजूद सभी लोग सन्न रह गए। राज्यपाल ने कहा कि पूरी शपथ एक बार फिर पढ़िए। जब दोबारा तेज ने शपथ पढ़ी तो अपेक्षित शब्द पर फोकस किया और उसे सही पढ़ा। अपेक्षित को उपेक्षित पढ़ने से अर्थ का अनर्थ हो गया था। अपेक्षित मतलब उम्मीद, उपेक्षित मतलब अनदेखी होता है।
इसके बाद मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने शपथ ली। उन्होंने भी ‘सम्यक’ शब्द को ‘संपर्क’ पढ़ दिया। राज्यपाल ने उन्हें भी टोका। मस्तान ने गलती को सुधारा और सही शब्द पढ़ा। इसके बाद शिवचंद्र राम ने शपथ ली। ‘संसूचित’ को ‘सूचित’ पढ़ दिया। राज्यपाल ने शिवचंद्र राम को टोका। राज्यपाल ने कहा, ‘संचित’ नहीं ‘संसूचित’ पढ़ें। शिवचंद्र राम ने कहा- हां ‘संसूचित’।
स्वाति मालीवाल से उपराष्ट्रपति ने कहा- ‘जो लिखा है वही पढ़ो’
31 जनवरी 2024 को राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद स्वाति मालीवाल को संसद में दो बार शपथ लेनी पड़ी। दरअसल, हुआ ये कि पहली बार स्वाति ने शपथ का गलत संस्करण पढ़ लिया। स्वाति ने जो शपथ ली वो नॉमिनेट मेंबर्स के लिए थी, जबकि वो तो चुनकर आई थीं। इस कारण उन्हें निर्वाचित शपथ का संस्करण पढ़ना था। आखिर में इंकलाब जिंदाबाद का नारा भी लगाया। इसके बाद राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने स्वाति से कहा कि जो लिखा है वही पढ़िए। स्वाति ने दोबारा संसद के नियम के अनुसार शपथ ली और कोई नारा नहीं लगाया।

डीके शिवकुमार के लेट होने पर कांग्रेस विधायक नहीं ले पाए शपथ
11 नवंबर 2011, कर्नाटक विधानसभा में नए विधायकों को शपथ दिलाया जा रहा था। जैसे ही हंगल विधानसभा उपचुनाव में जीते कांग्रेस नेता श्रीनिवास का नाम लिया गया, उन्होंने शपथ लेने से इनकार कर दिया। श्रीनिवास ने कहा कि कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के सामने ही शपथ लेंगे। जबकि तेज बारिश और ट्रैफिक की वजह से वह तय समय 11 बजे नहीं पहुंच सके थे।
आखिर में कांग्रेस विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी से वेट करने के लिए कहा। स्पीकर ने इंतजार करने से मना कर दिया और बीजेपी के रमेश बी भूषणूर को शपथ दिलाकर वहां से चले गए। दोपहर बाद स्पीकर ने अपने स्टाफ से कहा कि श्रीनिवास माने के शपथ ग्रहण के लिए दूसरा दिन तय कर लें। इस तरह उनका शपथ ग्रहण का दिन आगे बढ़ गया।

जब विधायकों ने गौ, देवगौड़ा और गुरू के नाम पर शपथ ली
20 मई 2023 को कर्नाटक के नए विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह था। प्रोटेम स्पीकर रघुनाथ विश्वनाथ देशपांडे ने विधायकों से आग्रह किया कि वे संविधान या ईश्वर के नाम पर शपथ लें। कर्नाटक के कई विधायकों ने स्पीकर की बात नहीं सुनी।
इसमें सबसे ऊपर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार थे। उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु गंगाधर अज्जा के नाम पर शपथ ली। शिवकुमार का कहना है कि वे अपने गुरु को ही भगवान मानते हैं। इस कारण उन्होंने ये शपथ ली है।
वहीं, मुलबागिलु से जेडीएस विधायक एस मंजूनाथ ने जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के नाम पर शपथ ली। चन्नागिरी के कांग्रेस विधायक शिवगंगा बसवराज और कुनिगल विधायक एचडी रंगनाथ ने अपने राजनीतिक गुरु डीके शिवकुमार के नाम पर शपथ ली।
बीजापुर सिटी से बीजेपी विधायक बसनगौड़ा यतनाल ने हिंदुत्व और गोमाता के नाम पर, बेल्थंगडी के बीजेपी विधायक हरीश पूंजा ने राम के नाम पर शपथ ली। बसवकल्याण के विधायक शरण सालगर ने छत्रपति शिवाजी और बसवन्ना के नाम पर शपथ ली।







