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बिहार में अब ‘बड़े भाई’ के रुतबे पर भी संकट?

UB India News by UB India News
January 17, 2024
in खास खबर, पटना, बिहार
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बिहार में अब ‘बड़े भाई’ के रुतबे पर भी संकट?
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बिहार में इंडी अलायंस के नेता नहीं मानते कि किसी भी मुद्दे पर गठबंधन में कोई संकट है। सोमवार को मकर संक्रांति के दही-चूड़ा भोज के बाद भी तत्काल किसी राजनीतिक बदलाव की कोई आहट सुनाई नहीं पड़ी। लालू और नीतीश के बीच तनातनी की खबरें लगातार आ रही थीं। हालांकि भोज के बाद सभी फील गुड के मूड में रहे। राबड़ी देवी के आवास पर लालू यादव के दही-चूड़ा भोज में सीएम नीतीश कुमार का शामिल होना, आरजेडी और जेडीयू नेताओं के बयान से तो यही लगा कि विपक्षी गठबंधन की सरकार में सब कुछ ठीक है। पर, राजनीतिक मामलों के जानकार बताते हैं कि नीतीश क्या करने वाले हैं, यह उनके सिवा किसी को पता नहीं होता। इसलिए सब कुछ ठीक होने का दावा करने वाले नेता यह कैसे कह सकते हैं कि सब ठीक है।

लोग ताकते रह गए, दूसरे दरवाजे से निकले नीतीश
सीएम आवास के बाहर सुबह से मीडिया कर्मियों का जमावड़ा लगा हुआ था। सबकी निगाहें मुख्य द्वार पर थीं। मीडियाकर्मी यह जानना-देखना चाहते थे कि शहर में आयोजित कई भोजों में आखिर नीतीश किस भोज के लिए निकलते हैं। नीतीश ने चकमा दिया और दूसरे दरवाजे से ललन सिंह को साथ लेकर निकल गए। टहलते हुए वे राबड़ी देवी के आवास पहुंच गए। सवाल उठता है कि नीतीश ने इतनी गोपनीयता क्यों बरती ? दूसरा सवाल यह कि नीतीश को ललन सिंह के साथ निकलने की कौन-सी मजबूरी थी? भोज में जेडीयू के कई बड़े नेता शामिल हुए, लेकिन नीतीश ने ललन सिंह के साथ ही लालू आवास पर जाना क्यों उचित समझा?

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आरजेडी के नेता बोले, पर नीतीश ने कुछ नहीं कहा
नीतीश कुमार के मन में कोई गांठ है, इसका संकेत भी मिला। भोज के बाद मीडिया से आरजेडी के नेता और लालू यादव के परिवार के करीबी भाई वीरेंद्र बोले। गठबंधन से लेकर सीट शेयरिंग और लालू-नीतीश के सबंधों पर भी बोले। पर, नीतीश की जुबान से शब्द तक नहीं फूटे। अव्वल तो भोज के कार्यक्रम में मीडिया के प्रवेश पर बंदिश थी, पर बाहर निकले नेताओं ने मीडिया से जरूर बात की। भाई वीरेंद्र ने कहा कि गठबंधन में कोई खटपट नहीं है। सब ठीक है। सीट शेयरिंग हो चुकी है। कहीं कोई रगरा-झगड़ा नहीं है। हालांकि उन्होंने एक बात कह कर हेकड़ी दिखा दी। हालांकि उन्होंने जो कहा, सच तो वही है। वीरेंद्र ने कहा कि ‘आरजेडी के 79 विधायक हैं। आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है।’ यानी बड़े भाई की भूमिका में लालू प्रसाद यादव ही हैं।

‘बड़ा भाई’ बनने के लिए पर जेडीयू करता रहा है हंगामा
महागठबंधन में ऑल इज नॉट वेल का संदेश यहीं से निकलता है। बीजेपी के साथ रहते हुए और नरेंद्र मोदी की आंधी में भी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जेडीयू ने बड़े भाई की भूमिका के लिए बीजेपी को मजबूर कर दिया था। बीजेपी ने बिना किसी बहस में उलझे नीतीश को बड़े भाई का मान भी दिया था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अकेले लड़ कर जेडीयू ने सिर्फ दो सीटें जीती थीं। भाजपा के खाते में 22 सीटें आई थीं। खुद को बड़ा भाई साबित करने के लिए जेडीयू लगातार बीजेपी के बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही थी। आखिरकार भाजपा ने अपनी जीतीं पांच सीटें जेडीयू के लिए खाली कर दीं और दोनों दल 17-17 सीटों पर लड़े। यानी जेडीयू ने बीजेपी से नीतीश को ‘बड़ा भाई’ मनवा ही लिया।

आरजेडी का जेडीयू को बड़ा भाई मानने से इनकार
दही-चूड़ा भोज पर लालू यादव ने नीतीश कुमार को टीका नहीं लगाया। वर्ष 2017 में लालू ने अपने आवास पर आयोजित भोज में पहुंचे नीतीश को दही का टीका लगा कर उन्हें आशीर्वाद दिया था। भाई वीरेंद्र ने इसे इस रूप में व्याख्या दी- ‘लालू यादव के आशीर्वाद से ही नीतीश मुख्यमंत्री बने हैं। 79 विधायक हमारा है, तो बड़े भाई हम लोग ही न हैं।’

वीरेंद्र चाहते हैं कि नीतीश कुमार पीएम बनें। उनका तर्क है कि बिहार ने देश को राष्ट्रपति दिया है। इस बार इंडिया गठबंधन बना है तो नीतीश कुमार को पीएम बनना ही चाहिए। लेकिन बड़े भाई की भूमिका में आरजेडी ही रहेगा। इंडी अलायंस में उसके ही सर्वाधिक विधायक हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि नीतीश कुमार ने इंडी अलायंस का संयोजक बनने से तो इनकार कर दिया, अब ‘बड़े भाई’ की भूमिका पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भोज के बाद नीतीश की खामोशी और ललन सिंह को साथ लेकर नीतीश का अपने आवास से निकलना ठीक उसी तर्ज पर दिखा, जैसे सोनिया से मुलाकात के लिए लालू ही नीतीश को साथ लेकर गए थे। यानी नीतीश कुमार, लालू से आमना-सामना की स्थिति में खुद को सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। ललन सिंह उनके मुकाबले आरजेडी नेताओं या लालू घराने के लोगों से अधिक सहज हैं।

भोज खाकर 2022 में NDA से अलग हुए थे नीतीश
बहुत पुरानी बात नहीं है। वर्ष 2022 में भी नीतीश ने भाजपा के साथ बैठ कर दही-चूड़ा खाया था। उन दिनों भी भाजपा से नीतीश की नाराजगी की खबरें आ रही थीं। भाजपा के नेता भोज में नीतीश के शामिल होने के बाद लगातार बयान दे रहे थे कि एनडीए में सब कुछ ठीक है। इसके बावजूद एनडीए से नीतीश अलग हो गए। उन्होंने आरजेडी से हाथ मिला लिया। तब भाजपा नेता यह भी कहने से नहीं चूक रहे थे कि नीतीश कुमार भाजपा की कृपा से ही सीएम बने हैं। भाई वीरेंद्र ने भी भाजपा नेताओं के तर्ज पर ही नीतीश के बारे में यही कहा कि वे आरजेडी के 79 विधायकों के कारण ही सीएम बने हैं। यानी इसे नीतीश को लालू का आशीर्वाद मानना चाहिए। साल 2017 में तो लालू ने नीतीश को दही का टीका लगा कर आशीर्वाद दिया था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद वे एनडीए के साथ चले गए थे।

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