सिक्किम में एक और झील टूटने की कगार पर है। राजधानी गंगटोक से 135 किमी दूर स्थित लाचेन वैली की शाको चू लेक गंभीर हालत में है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड से ठीक पहले की अवस्था कहा जा सकता है। जिला प्रशासन ने इमरजेंसी अलर्ट जारी किया है और संबंधित इलाकों से लोगों को हटाना शुरू कर दिया है।
इससे पहले 3 अक्टूबर को बादल फटने के बाद तीस्ता नदी में आई बाढ़ ने राज्य में अभी तक तबाही मचाई हुई है। 4 जिलों- मंगन, गंगटोक, पाक्योंग और नामची में बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बाढ़ से 25,000 लोग प्रभावित हुए हैं। 1,200 घर बह चुके हैं। 7 हजार लोग अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं। अब तक 2,413 लोगों को बचाया गया है।
6,875 लोग राज्य भर में बनाए गए 22 रिलीफ कैंप में रह रहे हैं। वहीं, इस आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या शुक्रवार देर रात तक बढ़कर 26 हो गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
मुख्यमंत्री पीएस तमांग ने बताया कि बुरदांग इलाके से लापता हुए सेना के 23 जवानों में से 7 के शव नदी के निचले इलाकों से बरामद कर लिए गए हैं। लापता जवानों में से एक को बचा लिया गया था। 15 जवान समेत कुल 143 लोग अभी भी लापता हैं।
मकान पानी में डूब गया, खाने-पीने का सामान नहीं
आम लोगों के लिए खाने-पीने और दैनिक जरूरतों की दूसरी तमाम चीजों का संकट खड़ा हो गया है। प्रकाश लेप्चा नामक एक स्थानीय युवक के मुताबिक हमारे पास खाने-पीने को कुछ नहीं बचा है। रहने को ठिकाना नहीं बचा। न बिजली है। इधर-उधर भटककर रात बिता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यहां पर फंसे लोग ही एक-दूसरे की हर संभव मदद कर रहे हैं।
लीसा नामक महिला के मुताबिक हम घर नहीं जा पा रहे। मकान पानी में डूब गया है। इन्वर्टर, अनाज सब कुछ बर्बाद हो गया है। उत्तर सिक्किम के द्जोंगू में जरूरी चीजों की बड़े पैमाने पर जमाखोरी हो रही है।

CM बोले- बांध के घटिया निर्माण के चलते मची तबाही
सिक्किम के CM प्रेम सिंह तमांग के मुताबिक चुंग्थांग बांध, तीस्ता ऊर्जा चरण 3 की घटिया निर्माण गुणवत्ता के कारण भयानक बाढ़ देखनी पड़ी है। जांच के लिए समिति गठित होगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिक्किम को 2023-24 के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि के केंद्रीय हिस्से से 44.80 करोड़ रुपए की दो किस्त जारी करने की मंजूरी दे दी है।

10 सेकंड में ही 60 मीटर ऊंचा बांध ध्वस्त
जब बादल फटा तो झील इतना पानी रोक नहीं पाई। इससे तीस्ता नदी में बाढ़ आ गई। नदी का जलस्तर 15 से 20 फीट तक बढ़ गया। नदी से लगे इलाके में ही आर्मी कैंप था, जो बाढ़ में बह गया और यहां खड़ी 41 गाड़ियां डूब गईं।
बमुश्किल 10 सेकंड में, 13,000 करोड़ रुपए के तीस्ता-3 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का 60 मीटर ऊंचा बांध लहोनक झील से आई बाढ़ से पूरी तरह बह गया। वहीं, दिखचू, सिंगतम और रांगपो शहर पानी में डूब गए हैं। बाढ़ में सिक्किम को देश से जोड़ने वाला नेशनल हाईवे NH-10 भी बह गया है।


इस साल बादल फटने की 4 बड़ी घटनाएं…
24 अगस्त: हिमाचल प्रदेश के मंडी में बादल फटा था। जिसमें 51 लोग फंस गए थे। NDRF की टीम ने सभी को सुरक्षित बचा लिया था। बद्दी जिले में बारिश के चलते बालद नदी में उफान आने से पुल दो हिस्सों में टूट गया था। वहीं पंडोह में मलबे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि एक स्कूल की बिल्डिंग नाले में बह गई थी।
9 अगस्त: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में बादल फटा, जिसके कारण सिरमौरी ताल गांव में बाढ़ से एक मकान ढह गया था। इसकी चपेट में एक ही परिवार के 5 लोग आए थे। इनमें दो बच्चे भी शामिल थे। दो लोगों के शव बरामद कर लिए गए थे।
22 जुलाई: शिमला में बादल फटने से आई बाढ़ में कई गाड़ियां बह गई थीं। वहीं काफी घर क्षतिग्रस्त हुए थे। इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी। हालांकि बारिश के चलते चंबा-पठानकोट NH पर लैंडस्लाइड होने से हाईवे बंद हो गया था।
25 जुलाई: हिमाचल के शिमला जिले के रामपुर में बादल फटने से भारी तबाही हुई। रामपुर ब्लॉक की सरतारा पंचायत के कंदार गांव में बादल फटने से प्राथमिक पाठशाला, युवक मंडल सहित लोगों के 6 मकान ढह गए। डेढ़ दर्जन से ज्यादा पालतू मवेशी बाढ़ में बह गए। कई घरों में पानी घुस गया और आधा दर्जन गाड़ियों को भी इससे नुकसान हुआ था।







