मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
- आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) पेश करते हुए कहा कि भारत दुनिया दुनिया का नया विकास इंजन बनने के लिए तैयार है. एमपीसी मुद्रास्फीति (Inflation) को लेकर जरूरत के अनुसार कदम उठाएगी.
- आरबीआई ने जोखिमों को समान रूप से संतुलित करते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर का अनुमान(GDP Growth Rate) 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है.
- मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) की बैठक के नतीजे की घोषणा करते हुए आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि 29 सितंबर को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 586.9 बिलियन डॉलर था.
- आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, सितंबर में मुद्रास्फीति कम होने की संभावना है. केंद्रीय बैंक ने 2023-24 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. खुदरा मुद्रास्फीति अगले वर्ष 6.8 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से घटकर 5.2 प्रतिशत हो जायेगी. हमारा मुद्रास्फीति लक्ष्य 4 प्रतिशत है, 2 से 6 प्रतिशत नहीं. हम मुद्रास्फीति के बढ़ते लक्ष्य के प्रति सतर्क हैं.
- आरबीआई गवर्नर ने बैंकिंग सिस्टम को लेकर कहा कि संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के साथ भारतीय बैंकिंग प्रणाली मजबूत बनी हुई है.
- आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए बुलेट भुगतान योजना (Bullet Payment Scheme) के तहत गोल्ड लोन (Gold Loan) को दोगुना कर 4 रुपये लाख करने का निर्णय लिया है.
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि 7 अक्टूबर तक इंक्रिमेंटल CRR को पूरी तरह से हटा लिया जाएगा. इससे पहले शनिवार 9 सितंबर को 25 फीसदी आईसीआरआर हटाया. इसके बाद 23 सितंबर को 25 फीसदी और आईसीआरआर हटाया. इससे बैंकों को सीधा फायदा होगा. Emkay Global की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने हाल में बताया था कि ICRR से थोड़े समय के लिए लिक्विडिटी में हुई बढ़ोतरी को कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, इस फैसले का सबसे ज्यादा असर एचडीएफसी बैंक पर होगा.
रिजर्व बैंक के मॉनिटरी पॉलिसी टूल में कैश रिजर्व रेश्यो यानि सीआरआर शामिल होता है. जिसका उद्देश्य सिस्टम में नकदी की सप्लाई और महंगाई पर नियंत्रण रखना होता है. ये बैंक की नेट डिमांड और टाइम लाएबिलिटी का एक हिस्सा होता है, जो कि फिलहाल 4.5 फीसदी है. रिजर्व बैंक समय समय पर होने वाली पॉलिसी समीक्षा में इसमें बदलाव करता रहता है. हालांकि कई बार एक खास समय नकदी तेजी के साथ बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व बैंक के पास एक विकल्प होता है कि वो सीआरआर के साथ इंक्रीमेंटल सीआरआर भी लागू करे. ये सीआरआर के ऊपर एक और कैश रिजर्व लिमिट होती है जो डिपॉजिट के बढ़ते आकार को देखते हुए लगाया जाता है. इससे बैंकों को पहले से ज्यादा रकम रिजर्व बैंक के पास कैश के रूप में रखनी पड़ती है.
रिजर्व बैंक का कहना है कि 7 अक्टूबर तक इंक्रिमेंटल CRR को पूरी तरह से हटा लिया जाएगा. इससे पहले 9 सितंबर को 25 फीसदी आईसीआरआर हटाया गया.23 सितंबर को 25 फीसदी और आईसीआरआर हटाया जा चुका है. आई सीआरआर इंक्रीमेंटल कैश रिजर्व रेश्यो होता है. जो कि सीआरआर से अतिरिक्त होता है. ये फैसला तब लिया जाता है जब बैंकों के जमा में तेज बढ़त देखने को मिलती है. ऐसे में सीआरआर की लिमिट पर्याप्त नहीं होती और रिजर्व बैंक अतिरिक्त लिमिट लगाता है. आपको बता दें कि 2000 के नोट को बदलने के फैसले के साथ बैंकों के जमा में तेज उछाल देखने को मिला था.
अगस्त के फैसले के अनुसार बैंकों को CRR से अलग अपने जमा का 10 फीसदी आईसीआरआर के रूप में रखना है. यानि बैंकों को जुटाए गए जमा का 10 फीसदी हिस्सा कैश के रूप में रिजर्व बैंक के पास रखना है. अब ये 10 फीसदी की सीमा धीरे धीरे कम करते हुए अगले महीने तक शून्य की जाएगी.
बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बचे हुए आईसीसीआर को कल रिलीज कर दिया जाएगा, जिससे बैंकों के पास और पैसा आएगा, जिसकी वजह से लिक्विडिटी बढ़ेगी। आरबीआई चाहता है कि इस लिक्विडिटी का फायदा बिजनेस, इंडस्ट्री में जाए। रिजर्व बैंक ने अपना पूरा फोकस वित्तीय मजबूती पर रखा है।
Good Loan जरूरी
भारत में अभी भी बैंक ही लोन देने के मामले में सबसे बड़े प्लेयर हैं। ऐसे में बैंक ही लोन देने के लिए बड़ा विकल्प हैं। आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि अच्छी लेंडिग देनी चाहिए। आरबीआई ने इस बात को लेकर भी कुछ हद तक चिंता जाहिर की है कि जो भी लोन दिए जा रहे हैं वह बेहतर होने चाहिए। आरबीआई की ओर से अच्छी लेंडिंग पर जोर दिया या है।
अर्थव्यवस्था पर दो अहम जोखिम गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि विकास की रफ्तार मजबूत है। उन्होंने कहा कि भारत की आंतरिक स्थिति काफी मजबूत है इसका अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं है। साथ ही गवर्नर ने वैश्विक दिक्कत और आने वाले समय में मानसून के चलते फसल की पैदावार को लेकर चिंता जाहिर की है। कई फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन और विदेश के शीर्ष बैंकों ने ब्याज दरों में इजाफा किया है, जिसका असर संभव है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
महंगाई दर काबू में, सतत विकास पर जोर हालांकि आरबीआई ने महंगाई दर को 4 फीसदी रखने की बात कही है, साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि महंगाई दर को काबू में रखने के साथ हम ग्रोथ पर ध्यान देंगे। ऐसे में स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ग्रोथ को अपनी प्राथमकिता देना चाहता है, साथ ही महंगाई को भी नियंत्रण में रखना चाहता है।





