ADVERTISEMENT
Saturday, July 25, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

जातीय सर्वे के आंकड़ों ने मुसलमानों के बीच जातिविहीन समाज के मिथक को पूरी तरह खारिज दिया

UB India News by UB India News
October 5, 2023
in पटना, ब्लॉग
0
जातीय सर्वे के आंकड़ों ने मुसलमानों के बीच जातिविहीन समाज के मिथक को पूरी तरह खारिज दिया
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

बिहार में 2 अक्टूबर को जारी हुए जातीय सर्वे के आंकड़ों ने मुसलमानों के बीच जातिविहीन समाज के मिथक को पूरी तरह खारिज दिया है. दरअसल गणना में भाग लेने वाले मुसलमान समुदाय के लोगों ने अपनी जाति भी बताई है, जिसे देखकर पता चलता है कि हिंदुओं की तरह ही मुस्लिम समाज भी जातियों में बंटा हुआ है.

जातीय सर्वे के मुताबिक बिहार में करीब 17.70 प्रतिशत मुसलमान हैं. इनमें सामान्य श्रेणी यानी जनरल कैटेगरी के मुसलमानों में शेखों की संख्या सबसे ज्यादा है, तो वहीं पसमांदा श्रेणी में अंसारी शीर्ष स्थान पर हैं.

RELATED POSTS

पूरे बिहार में आज हाई अलर्ट , 500 अज्ञात पर FIR हिरासत में, 117 संदिग्धों की तस्वीरें जारी, 55 गिरफ्तार

जंतर मंतर से दूर… बांकीपुर उपचुनाव में छात्रों का सहारा ले रहे प्रशांत किशोर, क्या दिखेगा असर?

जानते हैं मुसलमानों की अगड़ी जातियों के बारे में…

मुसलमानों में भी अगड़ी और पिछड़ी जातिया हैं. सवर्ण जाति के मुसलमानों को तीनों वर्गों में बांटा गया है. ये हैं सैयद, शेख और पठान. सर्वे में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार अगड़ी जाति में सबसे ज्यादा संख्या शेख मुसलमानों की है. प्रदेश में शेख मुसलामानों की तादाद 3.8217 प्रतिशत है. दूसरे स्थान पर आते हैं पठान जिनकी संख्या कुल आबादी में 0.7548 फीसदी हैं. सैय्यदों आबादी 0.2279 प्रतिशत है.

पासमांदा श्रेणी में आती हैं ये जातियां

पिछड़ी जातियों में मदारी, नालबंद, सुरजापुरी, अंसारी और मलिक मुस्लिम शामिल हैं. जनगणना की आंकड़ों के अनुसार इनमें से सबसे ज्यादा आबादी मोमिन अंसारी की है. बिहार में अंसारी मुसलमान  3.545 प्रतिशत हैं. वहीं दूसरी बड़ी आबादी सुरजापुरी मुस्लिम (1.87 प्रतिशत) की है. वहीं तीसरी नंबर पर धुनिया मुसलमान हैं जिनकी आबादी 1.42 प्रतिशत है. बाकी के 7 प्रतिशत मुसलमानों की लगभग 25 जातियां शामिल हैं.

पिछड़ी जाति के मुसलमान सबसे ज्यादा

पिछड़ी जाति में आने वाले चिक मुस्लिमों की जनसंख्या राज्य में 0.0386 फीसदी, कसाई 0.1024 प्रतिशत, डफली 0.056 प्रतिशत, धुनिया 1.4291 फीसदी, नट 0.0471 पर्सेंट, पमरिया 0.0496 प्रतिशत, भटियारा 0.0209 प्रतिशत, भाट 0.0681 प्रतिशत और मेहतर 0.0535 प्रतिशत हैं.

इसके अलावा मिरियासीन की आबादी 0.0118 फीसदी, मदारी 0.0089 फीसदी, मिर्शिकार 0.051 प्रतिशत, फकीर 0.5073 प्रतिशत हैं, जबकि चूड़ीहार की जनसंख्या 0.159 पर्सेंट, राईन 1.3988 प्रतिशत, ठकुराई 0.1128 प्रतिशत,  शेरशाहबादी 0.9965 फीसदी, बखो 0.0282 प्रतिशत और दर्जी 0.2522 प्रतिशत हैं.

सिकलीगर मुस्लिमों की तादाद बिहार में 0.0145 फीसदी, रंगरेज 0.0332 फीसदी, मुकेरी 0.0432 फीसदी, गादेरी 0.0072 पर्सेंट, कुल्हैया 0.9591, जाट 0.0344, धोबी 0.3135 प्रतिशत, सेखदा 0.1904 प्रतिशत, गद्दी 0.0441, लालबेगी की आबादी 0.0021 और हलालखोर की जनसंख्या 0.0058 फीसदी है.

हिंदू बनाम मुसलमानों में ऊंची जातियां
बिहार में किए गए जातीय सर्वे में हिंदुओं की चार जातियों को ऊंची जाति में शामिल किया गया है. राजपूत (3.45 फीसदी), ब्राह्मण (3.66 फीसदी), भूमिहार (2.86 फीसदी) और कायस्थ (0.68 फीसदी). इसी तरह से मुसलमानों में तीन जातियों को अपर कास्ट में शामिल किया गया है. शेख (3.82 फीसदी), सैय्यद (0.22 फीसदी) और पठान ( 0.75 फीसदी) हैं.

इस तरह कुल अपर कास्ट हिंदुओं की आबादी 10.60% फीसदी है जो हिंदुओं की कुल संख्या 10,71,929,58 का करीब 14.75  फीसदी है, जबकि मुसलमान अपर कास्ट की कुल आबादी 4.8 फीसदी है, जो मुसलमानों की कुल आबादी का करीब 27 फीसदी हैं.

पासमांदा मुसलमानों को मिलना चाहिए उनका हक

एबीपी से बातचीत करते हुए पसमांदा नेता और पूर्व सांसद अली अनवर कहते हैं कि बिहार ही नहीं बल्कि भारत की वास्तविकता, इस्लाम में परिकल्पित और पैगंबर द्वारा प्रचारित जातिविहीन समाज से काफी अलग है.

अली अनवर आगे कहते हैं, “भारत में, मुसलमानों के बीच हमेशा से ही जाति रही है. यह एक वास्तविकता है जिससे हम मुंह नहीं मोड़ सकते. हिंदुओं के कमजोर वर्गों की तरह ही मुसलमानों के पासमांदा श्रेणी में आने वाले लोग भी आरक्षण के पात्र हैं. इसीलिए हम चाहते हैं कि हलालखोर, नाई, धोबी आदि मुसलमानों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए. यह सर्वेक्षण साबित करता है कि मुसलमानों का बड़ा हिस्सा पसमांदा है. लेकिन, सदियों से उन्हें अपना हक नहीं मिला है. ”

कमजोर को नहीं छोड़ना चाहिए पीछे

अली अनवर कहते हैं कि, ‘पसमांदा नेता साबिर अली ने भी यही मुद्दा उठाया है. उन्होंने एक परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर एक घर में चार भाई हैं. जिसमें दो भाई उच्च शिक्षित और संपन्न हैं, तो इसका मतलब ये नहीं कि उन्हें घर, दुकान और माता-पिता से सब कुछ विरासत में मिलेगा. कमजोर, कम पढ़े-लिखे भाइयों को भी उनका हक देना होगा. कमज़ोरों को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता.”

अब जानते हैं कि बिहार के सत्ता में मुसलमान कहां खड़ा है?

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में वर्तमान में 19 मुसलमान विधायक हैं. जिसमें से 12 विधायक राष्ट्रीय जनता दल, 4 विधायक कांग्रेस, 1-1 विधायक जनता दल यूनाइटेड, माले और एआईएमआईएम से है. विधानसभा में मुसलमानों से ज्यादा विधायक यादव (52 विधायक), राजपूत (28 विधायक) और भूमिहार (21)  हैं.

इसके अलावा बिहार विधान परिषद में कुल 75 सदस्य हैं. जिसमें से 7 मुस्लिम विधान पार्षद हैं. जनता दल यूनाइटेड से 3, राष्ट्रीय जनता दल से 2, भारतीय जनता पार्टी से एक और एक निर्दलीय शामिल हैं.

वहीं मंत्रिमंडल की बात की जाए तो नीतीश सरकार में 5 मुस्लिम मंत्री और 8 यादव शामिल हैं. सरकार में राष्ट्रीय जनता दल से 3 और कांग्रेस-जनता दल यूनाइटेड के कोटे से एक-एक मुस्लिम मंत्री हैं. यादव में तो जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू)  से 1 और राष्ट्रीय जनता दल  (आरजेडी) से 7 यादव सरकार में मंत्री हैं.

10 बड़े विभाग में एक भी मुस्लिम कोटे से बने मंत्री नहीं

इसके अलावा आरजेडी को मिले 10 बड़े विभाग में एक भी विभाग मुस्लिम कोटे से मंत्री बने नेताओं के पास नहीं हैं. इस कोटे से बने मंत्री इसरायल मंसूरी को आईटी, शमीम अहमद को विधि और शाहनवाज को आपदा प्रबंधन जैसे कमतर विभाग दिए गए हैं.

वहीं दूसरी तरफ यादव कोटे से जितने भी मंत्री नेता बने है उनके पास बड़े और मुख्य विभाग हैं. लालू यादव के दोनों बेटे के पास स्वास्थ्य, नगर विकास, पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य, वन एवं पर्यावरण जैसे अहम विभाग है. चंद्रशेखर यादव शिक्षा तो सुरेंद्र यादव के पास सहकारिता मंत्रालय का जिम्मा है. इसके अलावा जेडीयू की बात करें तो यहां यादव कोटे से मंत्री बने बिजेंद्र यादव के पास उर्जा और योजना जैसे महत्वपूर्ण विभाग है.

लोकसभा की 40 सीटें हैं, सिर्फ एक मुस्लिम सांसद

लोकसभा सीट की बात करें तो बिहार में 40 लोकसभा की सीटें हैं. लेकिन एकमात्र मुस्लिम लोकसभा के सांसद हैं. जिनका नाम है जावेद. उन्होंने साल 2019 में कांग्रेस की टिकट से किशनगंज सीट से जीत हासिल की थी.

कौन हैं पसमांदा मुस्लिम

पसमांदा शब्द मुसलमानों की उन जातियों के लिए बोला जाता है जो सामाजिक रूप से पिछड़े हैं या फिर कई अधिकारों से उनको शुरू से ही वंचित रखा गया. इनमें बैकवर्ड, दलित और आदिवासी मुसलमान शामिल हैं. लेकिन मुसलमानों में जातियों का ये गणित हिंदुओं में जातियों के गणित की तरह ही काफी उलझा हुआ है. और यहां भी जाति के हिसाब से सामाजिक हैसियत तय की जाती है.

साल 1998 में पहली बार ‘पसमांदा मुस्लिम’ का इस्तेमाल किया दया था. जब पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी ने पसमांदा मुस्लिम महाज का गठन किया था. उसी समय ये मांग उठी थी कि सभी दलित मुसलमानों की अलग से पहचान हो और उनको ओबीसी के अंर्तगत रखा जाए.

जातिगत सर्वे को लेकर कब क्या हुआ?

जाति आधारित गणना कराने का प्रस्ताव सबसे पहले 27 फरवरी 2020 को बिहार विधानसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ. उस वक्त राज्य में  बीजेपी-जेडीयू की सरकार थी. इसके बाद 23 अगस्त 2021 को बिहार के मुख्यमंत्री सीएम नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. इस प्रतिनिधिमंडल में सभी दलों के नेता शामिल थे.

1 जून 2022 को जाति आधारित गणना के मुद्दे को लेकर राज्य में सर्वदलीय बैठक हुई. इस बैठक में सभी पार्टियों की सहमति बनी. खास बात ये है कि उस वक्त भी बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जेडीयू की सरकार थी.   कैबिनेट से जातीय गणना से संबंधित प्रस्ताव 2 जून 2022 को पारित कर दिया गया. जिसके बाद सरकार ने 2 चरण में सर्वे कराने का आदेश दिया और 500 करोड़ रुपए बजट का प्रावधान किया गया.

बिहार में सात जनवरी से जातीय गणना की शुरुआत हुई. उस वक्त सर्वे करने की जिम्मेदारी समान्य प्रशासन विभाग को सौंपी गई जिसके नीतीश कुमार मुखिया हैं.

15 अप्रैल 2023 को जातिगत जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत की गई. इस चरण में बिहार के सबी परिवारों से 17 प्रकार की जानकारी मांगी गई. 21 अप्रैल 2023 को जातिगत गणना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने याचिककर्ताओं से हाईकोर्ट जाने के लिए कहा.

4 मई 2023 को पटना हाईकोर्ट की एक बेंच ने 5 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वे पर अंतरिम रोक लगा दी. हाईकोर्ट ने कहा कि विस्तार से सुनवाई के बाद फैसला करेंगे. इसके बाद 1 अगस्त 2023 को सुनवाई की गई और इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने सर्वे पर से स्टे हटाया. बेंच ने सर्वे को सही माना और कहा कि यह जरूरी है. सरकार का कहना था कि जाति समाज की सच्चाई है.

6 सितंबर 2023 को सर्वेच्च न्यायालय ने जातिगत सर्वे पर सुनवाई की बात कही, लेकिन डाटा पब्लिश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

पूरे बिहार में आज हाई अलर्ट , 500 अज्ञात पर FIR हिरासत में, 117 संदिग्धों की तस्वीरें जारी, 55 गिरफ्तार

पूरे बिहार में आज हाई अलर्ट , 500 अज्ञात पर FIR हिरासत में, 117 संदिग्धों की तस्वीरें जारी, 55 गिरफ्तार

by UB India News
July 24, 2026
0

बिहार में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार कई जिलों में फैलता जा रहा है।...

जंतर मंतर से दूर… बांकीपुर उपचुनाव में छात्रों का सहारा ले रहे प्रशांत किशोर, क्या दिखेगा असर?

जंतर मंतर से दूर… बांकीपुर उपचुनाव में छात्रों का सहारा ले रहे प्रशांत किशोर, क्या दिखेगा असर?

by UB India News
July 23, 2026
0

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे हैं....

छात्रों को राम मंद‍िर नहीं, नौकरी चाह‍िए’…………….

छात्रों को राम मंद‍िर नहीं, नौकरी चाह‍िए’…………….

by UB India News
July 23, 2026
0

बिहार में दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट छात्र और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर माहौल गरम है। पटना...

ऐसे लोगों को जेल में होना चाहिए…………

क्या सरकार की मंशा सचमुच पेपर लीक माफिया को सजा दिलाने की है,……………

by UB India News
July 23, 2026
0

नीट पेपर लीक मामले में जारी प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा है कि जांच...

पटना में चार साल बाद ऐसे उपद्रव की जवाब तलाश रही सरकार …………

पटना में चार साल बाद ऐसे उपद्रव की जवाब तलाश रही सरकार …………

by UB India News
July 23, 2026
0

दिल्ली में प्रदर्शन की आग 22 जुलाई को पटना भी पहुंच गई। यहां पर ऐसा प्रदर्शन होगा, इसका अंदाजा किसी...

Next Post
‘हम मंदिर वहीं बनाएंगे, विरोधी कहते थे कि तिथि कब बताएंगे?’ नड्डा ने कहा- जनवरी में उद्घाटन है, आप जरूर आएं

'हम मंदिर वहीं बनाएंगे, विरोधी कहते थे कि तिथि कब बताएंगे?' नड्डा ने कहा- जनवरी में उद्घाटन है, आप जरूर आएं

AAP सांसद संजय सिंह गिरफ्तार, दिल्ली शराब घोटाला मामले में ED ने की कार्रवाई

AAP सांसद संजय सिंह गिरफ्तार, दिल्ली शराब घोटाला मामले में ED ने की कार्रवाई

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend