महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) आज राज्यसभा में पेश कर दिया गया है. अब इस बिल पर चर्चा हो रही है. इससे पूर्व संसद के विशेष सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण बिल जिसे नारी शक्ति वंदन बिल नाम दिया गया है वो पास हो गया. पर्ची से हुई वोटिंग में बिल के समर्थन में 454 और विरोध में 2 वोट डाले गए. बिल के विरोध में वोट डालने वाले दोनों सांसद AIM-IM के असदुद्दीन ओवैसी और इम्तियाज़ जलील हैं. महिला आरक्षण बिल लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से पास हुआ, हालांकि महिलाओं को अभी इसके लिए लंबा इंतजार करना होगा, क्योंकि पहले जनगणना कराई जाएगी और फिर Delimitation यानी परिसीमन होगा. बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा.
राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, भारत को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री भारतीय जनता पार्टी ने दिया है. आज 27 मंत्री ओबीसी से हैं. बीजेपी के 303 सांसदों में से 29 फीसदी ओबीसी हैं. कांग्रेस के जितने सांसद हैं उससे ज्यादा हमारे ओबीसी सांसद हैं. ये तो सिर्फ लोकसभा का आंकड़ा है. आप तो ओबीसी को गाली देते हैं और माफी भी नहीं मांगते हैं.
राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, भारत को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री भारतीय जनता पार्टी ने दिया है. आज 27 मंत्री ओबीसी से हैं. बीजेपी के 303 सांसदों में से 29 फीसदी ओबीसी हैं. कांग्रेस के जितने सांसद हैं उससे ज्यादा हमारे ओबीसी सांसद हैं. ये तो सिर्फ लोकसभा का आंकड़ा है. आप तो ओबीसी को गाली देते हैं और माफी भी नहीं मांगते हैं.
महिला आरक्षण बिल लागू होने में देरी क्यों? आरक्षण बिल में कुछ महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं? विपक्ष के इन सवालों पर राज्यसभा में बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा, ‘महिलाओं को किस सीट पर रिजर्वेशन मिले, किस सीट पर नहीं मिलना चाहिए? ये फैसला सरकार नहीं कर सकती. ये फैसला आयोग करेगा. इससे पहले जरूरी है कि पहले जनगणना होनी चाहिए, परिसीमन आए. इसलिए आज बिल पास होने के बाद 2029 में 33 फीसदी महिलाएं सांसद बन कर आ जाएंगी और अगर ये बिल आज पास नहीं होता है तो 2029 में भी 33 फीसदी महिलाएं सांसद नहीं बन पाएंगी.’
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा में कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा, आप महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं लेकिन जब नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ तो देश की महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुलाया गया. महिलाओं को अधिकार देने के लिए आपने जो जनगणना और परिसीमन की बाधा लगाई है वो क्यों है, क्या महिला आरक्षण आपका सिर्फ एक चुनावी झुनझुना है. हिंदुस्तानी पुरुष डबल स्टेंडर्ड का है. एक तरफ तो वह महिलाओं को ऊंचे आसन पर बिठाता है लेकिन जब उसे सम्मान देने की बात आती है तो पीछे हट जाता है जैसे कि आपने राष्ट्रपति द्रौपदी को उद्घाटन समारोह में बुलाकर किया.
संसद के विशेष सत्र सही मायनों में ऐतिहासिक साबित हो रहा है. मोदी सरकार की तरफ से सबसे पहले महिला आरक्षण बिल पेश किया गया और फिर लोकसभा से पारित भी कर दिया गया. आज बिल राज्यसभा में पेश होगा. जब ये बिल कानून बन जाएगा तब महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण हो जाएगा.
लोकसभा में 8 घंटे तक चली लंबी बहस के बाद नारी शक्ति वंदन विधेयक बिल पास हो गया. करीब 27 साल के इंतजार के बाद आखिरकार महिला आरक्षण बिल आखिरकार लोकसभा से पास हो गया. आज बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा जहां इस पर चर्चा की जाएगी.
किसने महिला आरक्षण बिल के विरोध में दिया वोट
बिल के तहत संसद के निचले सदन और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है. बिल के समर्थन में 454 और विरोध में कुल 2 वोट पड़े. एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और इम्तियाज जलील ने महिला आरक्षण बिल के विरोध में वोट किया. बिल के पास होते ही पक्ष विपक्ष के बीच अब क्रेडिट वार भी शुरू हो गया है. बीजेपी बिल पास करने अपनी पीठ थपथपा रही है.
बिल पास होने पर विपक्ष ने भी दिन को ऐतिहासिक बताया लेकिन इस बीच ओबीसी आरक्षण की बात लाकर नया राजनीतिक शिगूफा छेड़ दिया है.
महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) आज राज्यसभा में पेश कर दिया गया है. अब इस बिल पर चर्चा हो रही है. इससे पूर्व संसद के विशेष सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण बिल जिसे नारी शक्ति वंदन बिल नाम दिया गया है वो पास हो गया. पर्ची से हुई वोटिंग में बिल के समर्थन में 454 और विरोध में 2 वोट डाले गए. बिल के विरोध में वोट डालने वाले दोनों सांसद AIM-IM के असदुद्दीन ओवैसी और इम्तियाज़ जलील हैं. महिला आरक्षण बिल लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से पास हुआ, हालांकि महिलाओं को अभी इसके लिए लंबा इंतजार करना होगा, क्योंकि पहले जनगणना कराई जाएगी और फिर Delimitation यानी परिसीमन होगा. बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा.
राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, भारत को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री भारतीय जनता पार्टी ने दिया है. आज 27 मंत्री ओबीसी से हैं. बीजेपी के 303 सांसदों में से 29 फीसदी ओबीसी हैं. कांग्रेस के जितने सांसद हैं उससे ज्यादा हमारे ओबीसी सांसद हैं. ये तो सिर्फ लोकसभा का आंकड़ा है. आप तो ओबीसी को गाली देते हैं और माफी भी नहीं मांगते हैं.
राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, भारत को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री भारतीय जनता पार्टी ने दिया है. आज 27 मंत्री ओबीसी से हैं. बीजेपी के 303 सांसदों में से 29 फीसदी ओबीसी हैं. कांग्रेस के जितने सांसद हैं उससे ज्यादा हमारे ओबीसी सांसद हैं. ये तो सिर्फ लोकसभा का आंकड़ा है. आप तो ओबीसी को गाली देते हैं और माफी भी नहीं मांगते हैं.
महिला आरक्षण बिल लागू होने में देरी क्यों? आरक्षण बिल में कुछ महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं? विपक्ष के इन सवालों पर राज्यसभा में बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा, ‘महिलाओं को किस सीट पर रिजर्वेशन मिले, किस सीट पर नहीं मिलना चाहिए? ये फैसला सरकार नहीं कर सकती. ये फैसला आयोग करेगा. इससे पहले जरूरी है कि पहले जनगणना होनी चाहिए, परिसीमन आए. इसलिए आज बिल पास होने के बाद 2029 में 33 फीसदी महिलाएं सांसद बन कर आ जाएंगी और अगर ये बिल आज पास नहीं होता है तो 2029 में भी 33 फीसदी महिलाएं सांसद नहीं बन पाएंगी.’
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा में कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा, आप महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं लेकिन जब नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ तो देश की महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुलाया गया. महिलाओं को अधिकार देने के लिए आपने जो जनगणना और परिसीमन की बाधा लगाई है वो क्यों है, क्या महिला आरक्षण आपका सिर्फ एक चुनावी झुनझुना है. हिंदुस्तानी पुरुष डबल स्टेंडर्ड का है. एक तरफ तो वह महिलाओं को ऊंचे आसन पर बिठाता है लेकिन जब उसे सम्मान देने की बात आती है तो पीछे हट जाता है जैसे कि आपने राष्ट्रपति द्रौपदी को उद्घाटन समारोह में बुलाकर किया.
संसद के विशेष सत्र सही मायनों में ऐतिहासिक साबित हो रहा है. मोदी सरकार की तरफ से सबसे पहले महिला आरक्षण बिल पेश किया गया और फिर लोकसभा से पारित भी कर दिया गया. आज बिल राज्यसभा में पेश होगा. जब ये बिल कानून बन जाएगा तब महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण हो जाएगा.
लोकसभा में 8 घंटे तक चली लंबी बहस के बाद नारी शक्ति वंदन विधेयक बिल पास हो गया. करीब 27 साल के इंतजार के बाद आखिरकार महिला आरक्षण बिल आखिरकार लोकसभा से पास हो गया. आज बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा जहां इस पर चर्चा की जाएगी.
किसने महिला आरक्षण बिल के विरोध में दिया वोट
बिल के तहत संसद के निचले सदन और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है. बिल के समर्थन में 454 और विरोध में कुल 2 वोट पड़े. एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और इम्तियाज जलील ने महिला आरक्षण बिल के विरोध में वोट किया. बिल के पास होते ही पक्ष विपक्ष के बीच अब क्रेडिट वार भी शुरू हो गया है. बीजेपी बिल पास करने अपनी पीठ थपथपा रही है.
बिल पास होने पर विपक्ष ने भी दिन को ऐतिहासिक बताया लेकिन इस बीच ओबीसी आरक्षण की बात लाकर नया राजनीतिक शिगूफा छेड़ दिया है.







