नई संसद में पीएम मोदी ने अपने पहले भाषण में कहा, ये महिलाओं के लिए इतिहास बनाने का वक्त है. महिला आरक्षण पर काफी चर्चा हुई. महिला आरक्षण बिल की कैबिनेट ने मंजूरी दी है. आज हमारी सरकार संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है. लोकसभा और विधानसभा में महिला को आरक्षण मिलेगा.. कई बार महिला आरक्षण बिल को पेश किया गया, लेकिन ईश्वर ने कई पवित्र कामों के लिए मुझे चुना है.’
महिला आरक्षण विधेयक पर पीएम मोदी बोले- 19 सितंबर की यह तारीख अमरत्व को प्राप्त करने जा रही है
पीएम मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले भी पेश हुआ था, लेकिन इसके लिए जरूरी आंकड़े नहीं जुटा पाए। अब यह काम करने के लिए मुझे चुना गया है। एक बार फिर मेरी सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है। महिला आरक्षण विधेयक को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। आज 19 सितंबर की यह तारीख इतिहास में अमरत्व को प्राप्त करने जा रही है।
नए संसद भवन में सेंगोल भी रखा हुआ है, जिसे पंडित नेहरू का स्पर्श हुआ था: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने नए संसद भवन में अपने पहले संबोधन ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र का जब ये नया गृह प्रवेश हो रहा है, यहां आजादी की पहली किरण का साक्षी, पवित्र सेंगोल भी रखा हुआ है। ये वो सेंगोल है, जिसको भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का स्पर्श हुआ था। ये सेंगोल हमें महत्वपूर्ण अतीत से जोड़ता है।
भवन बदला है, भावना भी बदलनी चाहिए’ लोक सभा में बोले PM Modi
पीएम मोदी ने नए संसद भवन में अपने पहले संबोधन में कहा कि भवन बदला है। भाव और भावना भी बदलनी चाहिए।
पीएम मोदी की अपील- सबकी सहमति से पारित हो महिला आरक्षण बिल
महिला आरक्षण को लेकर संसद में पीएम मोदी ने कहा, ‘महिला आरक्षण को लेकर संसद में पहले भी प्रयास हुए है. आज हमारी सरकार संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है. लोकसभा और विधानसभा में महिला को आरक्षण मिलेगा. जब यह बिल कानून बनेगा तो इसकी ताकत और हो बढ़ जाएगी. मैं दोनों सदन के सांसदों से अपील करता हूं कि यह सबकी सहमति से पारित हो. आज महिला हर एक एरिया में आगे जा रही है. नीति निर्माण में महिला की भूमिका होनी चाहिए.’
पीएम मोदी ने नई संसद में प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का किया जिक्र
नई संसद में पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं चाहूंगा कि हम सब हमारे श्रमिकों का, हमारे कामगारों का, हमारे इंजीनियर्स का हृदय से धन्यवाद करें. उनकी ओर से निर्मित ये भवन उनको प्रेरणा देने वाला है. इसके लिए 30 हजार से ज्यादा श्रमिकों ने परिश्रम किया है, पसीना बहाया है. आज वह दिन है जब हम कहते हैं ‘मिच्छामी दुक्कड़म’, इससे हमें किसी ऐसे व्यक्ति से माफी मांगने का मौका मिलता है जिसे हमने जानबूझकर या अनजाने में ठेस पहुंचाई है. मैं संसद के सभी सदस्यों और देश की जनता से भी ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ कहना चाहता हूं. संसदीय लोकतंत्र का जब ये नया गृह प्रवेश हो रहा है, यहां आजादी की पहली किरण का साक्षी, पवित्र सेन्गॉल…ये वो सेन्गॉल है जिसको भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का स्पर्श हुआ था. ये सेन्गॉल हमें महत्वपूर्ण अतीत से जोड़ता है.’







