आरजेडी बीजेपी के अंदर परिवारवाद की खोज में लगी है। आरजेडी ने इसकी लंबी लिस्ट सार्वजनिक की और सबसे अंत में लिखा क्रमशः यानी आगे भी परिवारवाद की खोज जारी है। इस लिस्ट का असर यह हो रहा है कि तेजस्वी यादव को अपने घर के परिवारवाद पर भी तर्क देना पड़ रहा है। परिवारवाद का आरोप लालू प्रसाद पर लगता रहा है। बिहार में रामविलास पासवान पर भी यह आरोप खूब लगता रहा था।
क्या बोले तेजस्वी यादव
परिवारवाद के सवाल पर जो जवाब रामविलास पासवान का रहा करता था, कमोबेश वही जवाब तेजस्वी यादव का भी शुक्रवार को आया। तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद के छोटे बेटे हैं, उनके राजनीतिक वारिस कहे जाते हैं और बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं। परिवारवाद के आरोप पर तेजस्वी यादव ने कहा है कि हम चुनाव जीत कर आते हैं।
जनता चुन कर लायी है कि हम खुद ही आ गए? लोगों ने हमें वोट दिया तब ना हम आए हैं! मेरे खिलाफ लोग चुनाव लड़े हैं। परिवारवाद को लेकर रामविलास पासवान का भी यही तर्क रहा करता था कि उनके भाई पशुपतिनाथ पारस या रामचंद्र पासावन को तो जनता चुनती है, वोट देती हैं।

एक और तर्क
परिवारवाद के पक्ष में एक और दिलचस्प बयान राजनीति में दिया जाता रहा है। तर्क यह कि जब डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, प्रोफेसर का बेटा प्रोफेसर बनता है, इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बनता है तो किसी नेता का बेटा नेता क्यों नहीं बन सकता? इन दो तर्कों के उलट यह तर्क रहा है कि राजनीति में जब अपने परिवार के बाहर के लोगों की बजाय घर के लोगों को ही टिकट दिया जाएगा तो जीतेंगे वहीं ना! दूसरी बड़ी बात यह कि अपने रिश्तेदारों को राजनीतिक घराना उसी मजबूत सीट से चुनावी टिकट देती है जहां मजबूत स्थिति जीतने की दिखती है। इसके कई उदाहरण हैं।
जनता विकल्पहीनता की स्थिति में आ जाती है
वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार कहते हैं कि परिवावाद से कोई भी दल अछूता नहीं रहा है चाहे वो राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस हो या फिर भाजपा। सोसाइटी में यह दिखता है कि ज्यादातर डॉक्टर के पुत्र डॉक्टर बनते हैं लेकिन राजनीति में किसी नकारा पुत्र को भी टिकट मिल जाता है वह विधायक बन जाता है। जनता ऐसे नेताओं को इसलिए जिताती है कि जनता के पास विकल्पहीनता की स्थिति होती है।
तेजस्वी यादव को ही लें तो वे क्रिक्ट खेलते थे। लेकिन राजनीति में टिकट पा गए। नीतीश मिश्रा भी टिकट पा गए। मीसा भारती ने डॉक्टरी की पढ़ाई की। लेकिन लोकसभा का चुनाव लड़ दो बार हारीं और दो बार राज्यसभा भेजी गईं। राजीव गांधी पायलट थे। लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बनाए गए। वे कहते हैं कि जनता कई बार सबक भी सिखाती है।







