राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होंगे कि नहीं इसको लेकर संशय बरकरार है। तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद कि ‘जगदानंद ने नाराजगी जैसी कोई बात हमसे नहीं कही है। बैठक में वे शामिल होंगे कि नहीं निर्णय उनको लेना है।’
तेजस्वी यादव का यही बयान राजद के अंदर की राजनीति को समझने के लिए काफी है कि ‘बैठक में शामिल होंगे कि नहीं निर्णय उनको लेना है।’ मतलब साफ जगदानंद सिंह के पाले में गेंद डाल दिया गया है। जगदानंद सिंह के बारे में एक बात सभी जानते हैं कि वे राजद में सिर्फ लालू प्रसाद को जानते हैं। एक बार उन्होंने कहा भी भी था कि हू इज तेजप्रताप, मैं सिर्फ लालू प्रसाद यादव को ही जानता हूं। जगदानंद सिंह रीढ़हीन होकर राजद में रहने वाले नेता नहीं है। उनको ऐसे लगेगा तो वे संन्यास भी ले सकते हैं।
न तीन ताजा राजनीतिक घटनाओं से जगदानंद से जुड़ी राजनीति को समझिए…
1. एक अक्टूबर को बयान देने का पावर ले लिया गया !
जगदानंद सिंह ने एक सप्ताह पूर्व पार्टी की ओर से एक पत्र एक अक्टूबर को जारी किया गया था। उसमें कहा गया था कि ‘उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के अलावा महागठबंधन और राज्य सरकार के नेतृत्व से संबंधित सवालों पर कोई नहीं बोलेगा। पत्र में उन्होंने कहा था कि- सभी सांसद, विधायक, पदाधिकारियों और नेताओं से आग्रह किया जाता है कि सरकार और नेतृत्व से संबंधित सवालों पर किसी टिप्पणी से परहेज करें। विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ था कि गठबंधन, नेतृत्व और इससे जुड़े फैसलों और विषयों पर आधिकारिक बयान के लिए सिर्फ उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ही अधिकृत हैं।’
2. 29 सितंबर को जगदानंद सिंह के बयान से राजनीति गरमाई
एक अक्टूबर से पहले 29 सितंबर को जगदानंद सिंह के एक बयान से राजनीति गरमा गई थी। उन्होंने दावा कर दिया था कि 2022 खत्म होने के बाद 2023 में तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। उन्होंने कहा था कि ‘हमें लगता है कि 2022 बीतने के बाद 2023 में नीतीश देश की लड़ाई लड़ेंगे और बिहार के भविष्य की लड़ाई तेजस्वी यादव के हाथ में सौंप देंगे।’ बेटे के इस्तीफा की घोषणा पिता से करवायी गई तो उन्होंने इसे बलिदान कर दिया।
3. मंत्री पद से सुधाकर के इस्तीफे की घोषणा जगदानंद सिंह से करवायी गई तो उन्होंने इसे बलिदान कह दिया
इसके बाद जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह ने 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन कृषि मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सुधाकर ने कहा कि लालू प्रसाद के कहने पर उन्होंने इस्तीफा तेजस्वी को भेजा। बेटे के इस्तीफे की घोषणा पिता जगदानंद सिंह से राजद के प्रदेश अध्यक्ष के नाते करवायी गई। जगदानंद सिंह ने सुधाकर सिंह के इस्तीफे की घोषणा तो की लेकिन साथ ही इसे उन्होंने बलिदान कहा। आगे यह भी कहा कि ‘ कृषि मंत्री किसानों के हक में अपनी आवाज उठा रहे थे, लेकिन अंत में उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया, ताकि लड़ाई आगे नहीं बढ़े।’
मतलब कि तनातनी है
सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद से वे राजद कार्यालय नहीं गए। हालांकि इस बीच दुर्गापूजा भी था और जगदानंद सिंह गांव चले गए थे। अब यह सवाल तेज है कि जगदानंद सिंह दिल्ली में हो रही राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे कि नहीं ! तेजस्वी के ताजा बयान कि ‘बैठक में वे शामिल होंगे कि नहीं निर्णय उनको लेना है’ से स्थिति साफ है। इस बयान का मतलब ही है कि तनातनी है।




