डॉलर की कीमत अस्सी रुपये से ऊपर जाने पर अर्थव्यवस्था में चिंताओं और चिंतन का बाजार नये सिरे से गर्म हो गया है। साल की शुरुआत से लेकर डॉलर रु पये के मुकाबले सात प्रतिशत मजबूत हो गया है यानी साल की शुरु आत में १०० रु पये में जितने डॉलर आते थे‚ उतने डॉलर अब खरीदने के लिए करीब १०७ रु पये खर्च करने पड़ेंगे यानी मोटे तौर पर भारत का आयात महंगा हो गया। कुल मिलाकर महंगा होता डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है‚ निर्यातक अपवाद हैं। निर्यातकों के लिए मौज का समय है‚ बिना कुछ किए कराए उनकी आमदनी बढ़ गई है‚ एक डॉलर के बदले वे ज्यादा रु पये कमा रहे हैं। डॉलर के भाव इतनी तेजी से ऊपर जा क्यों रहे हैं। इसकी सामान्य वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ गई है। कई देश कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर सशंकित हैं‚ तो वो बहुत तेज गति से कच्चा तेल खरीद रहे हैं। कच्चे तेल का कारोबार अधिकांशत डॉलर में होता है। भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार वैसे मजबूत स्थिति में है और डॉलर जनित समस्याओं से निपटने में सक्षम है। पर देखने की बात यह है कि कुछ हफ्तों पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ६४२ अरब डॉलर के करीब था‚ जो गिरकर करीब ५८० अरब डॉलर पर आ गया है यानी विदेशी मुद्रा कोष में कमी लगातार हो रही है। एक वजह तो यह है कि भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी निवेशक तमाम प्रतिभूतियों को बेचकर अपने मूल देश वापस ले जा रहे हैं। ग्लोबल अनिश्चितता की वजह से वे ऐसा कर रहे हैं। विदेशी निवेशक जब भारत में आते हैं‚ तो ड़ॉलर लाते हैं‚ जब वापस जाते हैं‚ तो डॉलर ले जाते हैं। प्रतिभूति निवेशकों की रकम वापसी के चलते ही देश से करीब ३० अरब डॉलर की रकम बाहर जा चुकी है‚ साल की शुरु आत से अब तक। सवाल है कि क्या ये आंकड़े आसन्न संकट का इशारा करते हैं‚ जवाब है बिल्कुल नहीं। १९९१ में जब भारत ने विदेशी मुद्रा संकट का सामना किया था तब भारत के भारत के विदेशी मुद्रा कोष तत्कालीन विदेशी कर्ज के सिर्फ ७ प्रतिशत थे आज भारत के कुल विदेशी कर्ज की रकम की करीब ९८ प्रतिशत राशि जितना विदेशी मुद्रा कोष भारत के पास है‚ यानी कुल मिलाकर डॉलर ने कुछ चुनौतियां पेश की हैं‚ संकट नहीं। निर्यात बढ़ोतरी से लेकर विदेशी मुद्रा हासिल करने के तमाम नये स्रोत तलाशे जाने चाहिए‚ एक सबक यह है‚ और दूसरा सबक है कि कच्चे तेल की बजाय ऊर्जा के दूसरे स्रोतों की तलाश का काम अब बहुत तेज गति से होना चाहिए।
बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत……..
हसन महमूद और मेहदी हसन मिराज की घातक गेंदबाजी से बांग्लादेश ने पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट...







