तुर्किये में नाटो समिट के दौरान ईरानी एजेंटों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ठिकाने की जानकारी मिल गई थी। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट में यह दावा किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी एजेंटों को ट्रम्प के ठहरने वाली बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि उनके फ्लोर तक का पता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस ने इसे ट्रम्प की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उनका ट्रेवल प्लान बदलकर दूसरे विमान से रवाना किया।
11 अगस्त को ट्रम्प ने भी इस घटना की पुष्टि की। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिस विमान से वे तुर्किये पहुंचे थे, उसी पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था।
ट्रम्प ने बताया कि उन्हें एयरपोर्ट के केटरिंग ट्रक में बैठाकर चुपचाप दूसरे विमान तक ले जाया गया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि एयरपोर्ट पर मौजूद किसी भी व्यक्ति को उनकी आवाजाही की भनक न लगे।
ट्रम्प पर खतरे की जानकारी मिली
रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था।
अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो समिट के आसपास एक व्यक्ति को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था।
इसके बाद सीक्रेट सर्विस और सीनियर अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्किये से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया।
ट्रम्प के साथ रक्षा मंत्री, दो मंत्री अलग प्लेन में गए
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ प्लेन बदलकर तुर्किये की यात्रा की। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ट्रम्प के साथ जाने के बजाय पहले प्लेन से गए, ताकि प्रेसिडेंट के साथ कोई हादसा हो जाए तो अमेरिका में सत्ता संभालने की व्यवस्था बनी रहे।
अमेरिका में अगर राष्ट्रपति की मौत हो जाए या वे काम करने की स्थिति में न रहें तो सबसे पहले उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति की जिम्मेदारी मिलती है। उनके बाद प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के स्पीकर, फिर सीनेट के प्रेसिडेंट का नंबर आता है। इसके बाद विदेश मंत्री और फिर वित्त मंत्री का नंबर आता है।
कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे
इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयरफोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था।
इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं।
तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी एयरफोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी।
उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी।
ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो।
बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, ‘शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।’
ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा
ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे।
इसके बाद ट्रम्प को चुपचाप एयरफोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे।
हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान से मिले खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे।
राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी।
वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं।







