खास बात यह है कि इस बार कोशिश युवाओं को अपनी बात समझाने से पहले उनकी बात सुनने की है। वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
संघ का गुरु दक्षिणा कार्यक्रम होने के साथ 15 अगस्त के बाद कानपुर, काशी, गोरक्ष और अवध प्रांत के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और ब्रज प्रांत में युवा सम्मेलन होंगे। इनमें जेन जी से विशेष रूप से संवाद किया जाएगा। संघ की कोशिश ऐसे युवाओं तक पहुंचने की भी रहेगी जो किसी संगठन से सीधे जुड़े नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते हैं।
संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के मुताबिक किशोर गण और तरुण गण शाखाओं के माध्यम से किशोरों और युवाओं के बीच हमारी पहुंच पहले से ही है। शताब्दी वर्ष में युवा सम्मेलनों की कार्ययोजना करीब तीन साल पहले ही तैयार कर ली गई थी। बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल में इसका महत्व बढ़ गया है।
तकनीक और सोशल मीडिया ने युवाओं की सोच, संवाद और प्रतिक्रिया के तौर-तरीके बदल दिए हैं। किशोर और युवा देश के भविष्य हैं। जेन जी के मामले में चुनौती सिर्फ उसे जोड़ने की नहीं है। उनके सवालों को सुनना और जवाब तलाशना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि आने वाले युवा सम्मेलन संघ के लिए संपर्क कार्यक्रम के साथ युवाओं की बदलती सोच को समझने का माध्यम भी बनेंगे।
खास बात यह है कि इस बार कोशिश युवाओं को अपनी बात समझाने से पहले उनकी बात सुनने की है। वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
संघ का गुरु दक्षिणा कार्यक्रम होने के साथ 15 अगस्त के बाद कानपुर, काशी, गोरक्ष और अवध प्रांत के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और ब्रज प्रांत में युवा सम्मेलन होंगे। इनमें जेन जी से विशेष रूप से संवाद किया जाएगा। संघ की कोशिश ऐसे युवाओं तक पहुंचने की भी रहेगी जो किसी संगठन से सीधे जुड़े नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते हैं।
संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के मुताबिक किशोर गण और तरुण गण शाखाओं के माध्यम से किशोरों और युवाओं के बीच हमारी पहुंच पहले से ही है। शताब्दी वर्ष में युवा सम्मेलनों की कार्ययोजना करीब तीन साल पहले ही तैयार कर ली गई थी। बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल में इसका महत्व बढ़ गया है।
तकनीक और सोशल मीडिया ने युवाओं की सोच, संवाद और प्रतिक्रिया के तौर-तरीके बदल दिए हैं। किशोर और युवा देश के भविष्य हैं। जेन जी के मामले में चुनौती सिर्फ उसे जोड़ने की नहीं है। उनके सवालों को सुनना और जवाब तलाशना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि आने वाले युवा सम्मेलन संघ के लिए संपर्क कार्यक्रम के साथ युवाओं की बदलती सोच को समझने का माध्यम भी बनेंगे।







