बिहार के व्यवहार न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक कर्मचारियों की वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर रविवार को पटना के गर्दनीबाग में बिहार व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ के बैनर तले महत्वपूर्ण सभा आयोजित की गई। सभा में राज्यभर से जुड़े न्यायिक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और करीब दो दशकों से लंबित प्रोन्नति, वेतन विसंगति, कैडर पुनर्गठन, भत्ते, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, स्वास्थ्य सुविधा और पेंशन जैसी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग उठाई।
सभा की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी ने की, जबकि संचालन महासचिव सत्यार्थ सिंह ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए संघ के अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी ने कहा कि न्यायिक कर्मचारी न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। न्यायालयों के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों के सुचारु संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग 20 वर्षों से अनेक न्यायिक कर्मचारियों को नियमित प्रोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया है। कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि और पात्रता के अनुरूप प्रोन्नति नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित न्यायिक प्रशासन से लंबित मामलों का अविलंब निष्पादन करने की मांग की।
14 सूत्री मांगों पर जोर
सभा में संघ की ओर से न्यायिक कर्मचारियों से जुड़ी 14 सूत्री मांगों को प्रमुखता से रखा गया। इनमें सर्वोच्च न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय के न्यायिक एवं प्रशासनिक आदेशों का त्वरित अनुपालन, न्यायालय सहायकों के कैडर का पुनर्गठन तथा वेतन पुनरीक्षण जैसी मांगें शामिल हैं।
संघ ने मांग की कि न्यायालय सहायकों का 1 जनवरी 2006 से कैडर पुनर्गठन करते हुए 4600 ग्रेड पे में वेतन पुनरीक्षण किया जाए और समान कार्य के लिए अन्य न्यायालयों एवं विभागों में कार्यरत समान पदों के अनुरूप समान वेतन निर्धारित किया जाए।
इसके साथ ही दशकों से लंबित प्रोन्नति मामलों का तत्काल निष्पादन करने तथा नियमित प्रोन्नति के स्थान पर जबरन MACP दिए जाने की प्रक्रिया को समाप्त कर नियमानुसार समयबद्ध प्रोन्नति देने की मांग की गई।
कर्मचारियों ने सभी संवर्गों के स्पष्ट कार्यदायित्व निर्धारित करने, अनुचित एवं असंगत कार्यभार की व्यवस्था समाप्त करने तथा अनुकंपा नियुक्ति के मामले में भेदभाव समाप्त कर अन्य राज्य कर्मचारियों की तरह शत-प्रतिशत व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई।
पदस्थापना से लेकर स्वास्थ्य सुविधा तक मांग
संघ ने न्यायिक कर्मचारियों की गृह जिला अथवा उनके प्रमंडल के अंतर्गत किसी जिले में पदस्थापना के लिए पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने की मांग की। साथ ही न्यायालयों की विशिष्ट कार्यप्रणाली और कार्य की प्रकृति को देखते हुए न्यायिक कर्मचारियों के लिए विशेष कैडर लागू करने की बात कही गई।
सभा में शेट्टी आयोग की अनुशंसाओं के आलोक में न्यायिक कर्मचारियों के भत्तों का सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पुनरीक्षण कर उसे लागू करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
कर्मचारियों ने न्यायिक अधिकारियों द्वारा अनुचित, मनमाने अथवा पूर्वाग्रहपूर्ण तरीके से परेशान किए जाने की शिकायतों पर प्रभावी रोक लगाने तथा कर्मचारियों के सम्मान और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
इसके अलावा न्यायिक कर्मचारियों और उनके परिवारजनों के लिए निःशुल्क हेल्थ कार्ड एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा, बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता तथा अन्य राज्यों की तर्ज पर बिहार में न्यायिक कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग भी उठाई गई।
न्यायिक पदाधिकारियों के समान सुविधाओं की मांग
संघ ने अखिल भारतीय न्यायिक पदाधिकारियों के वेतनमान से संबंधित आयोग की अनुशंसाओं में न्यायिक कर्मचारियों के वेतन और भत्तों को भी शामिल करने की मांग की। कर्मचारियों ने न्यायिक पदाधिकारियों की तरह चिकित्सा भत्ता, वाहन भत्ता, उपार्जित अवकाश के नकदीकरण, कैशलेस चिकित्सा सेवा सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी।
संघ के महासचिव सत्यार्थ सिंह ने कहा कि न्यायिक कर्मचारियों की मांगें किसी विशेष सुविधा या अतिरिक्त लाभ की मांग नहीं हैं, बल्कि उनकी सेवा शर्तों, कार्य की प्रकृति और वर्षों से लंबित अधिकारों से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए न्यायिक कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान भी उतना ही आवश्यक है। लंबे समय तक कर्मचारियों की समस्याओं के लंबित रहने से कार्यक्षमता और मनोबल पर भी असर पड़ता है।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने का संकेत
सभा में मौजूद कर्मचारियों ने एक स्वर में सरकार और संबंधित न्यायिक प्रशासन से सभी लंबित मांगों पर समयबद्ध और सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
संघ ने स्पष्ट किया कि यदि लंबे समय से लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो कर्मचारियों की ओर से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
सभा के माध्यम से संघ ने सरकार और न्यायिक प्रशासन को यह संदेश दिया कि वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मामलों का समाधान अब टालने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।







