बिहार की सियासी राजनीति में संजय झा अभी काफी चर्चा में हैं। फरक्का जलसंधि का विरोध कर जनता दल यू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने दूर की कौड़ी खेल दी है। दरअसल, उत्तर बिहार में बाढ़ की वजह बनता यह फरक्का बांध शायद ही कोई वर्ष तबाही का मंजर नहीं लाता है। उत्तर बिहार में तो एक कहावत है कि यहां के किसान अपनी फसल काटे न काटे पर नेता, अफसर और ठेकेदार की तिकड़ी अपनी फसल काटते ही हैं। यह सच है कि बतौर जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने फरक्का जल संधि का विरोध कर उन तमाम आंदोलनकारियों का मन तो मोह लिया है।
संजय झा की सियासी चाल क्या है?
इसके अलावा संजय झा ने उत्तर बिहार और मिथिलांचल के तमाम विधानसभा ,लोकसभा क्षेत्रों पर निशाना साध लिया। भारत और बांग्लादेश के साथ 1996 में फरक्का जलसंधि हुआ था। 12 दिसंबर, 1996 को हुई 30 साल पुरानी जलसंधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। जेडीयू नहीं चाहता है कि यह संधि नहीं हो। ऐसा इसलिए कि इस संधि के बाद फिर वही बाढ़ की तबाही का किस्सा शुरू होगा। और हद तो यह है कि इस समझौते की वजह से शुष्क मौसम के दौरान बिहार को गंगा में पर्याप्त पानी भी नहीं मिल पाएगा। सारा पानी बांग्लादेश की तरफ डायवर्ट हो जाएगा।
संजय झा का निशाना क्या है?
संजय झा को बता है कि इसका असर पेयजल, कृषि और सिंचाई पर पड़ता है। इन सब मुश्किलों के कारण उत्तर बिहार खास कर मिथिलांचल के किसानों का जोर इस बात पर है कि गंगा बेसिन पर निर्भर सभी राज्यों की जल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक और सटीक आकलन कर नई व्यवस्था बनाई जाए। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा का निशाना 2029 लोकसभा और 2030 का विधानसभा चुनाव है। स्थिति यह है कि उत्तर बिहार और मिथिलांचल के 140 विधानसभा सीटों में से अधिकांश सीटें एनडीए के पास है। केवल मिथिलांचल की ही बात करें तो कुल 37 में से 32 सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार जीत हासिल किए हुए हैं।
लोकसभा की क्या है स्थिति?
लोकसभा चुनाव 2024 की बात करें तो मधुबनी,दरभंगा,सुपौल,सहरसा, झंझारपुर, लोकसभा क्षेत्र पर एन डी ए का कब्जा है। अगर आगामी चुनाव में जदयू को अपनी राजनीतिक स्थिति सुदृढ़ करनी है तो उतर बिहार में बाढ़ पीड़ितों की सुध लेनी है। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा की जिम्मेदारी इसलिए भी है कि वे राज्य के तीन तीन बार जल संसाधन मंत्री रहे हैं। जून 2019 में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान उन्हें पहली बार बिहार का जल संसाधन मंत्री बनाया गया था।दूसरा कार्यकाल उनका फरवरी 2021 से जनवरी 2024 तक रहा।
रह चुके हैं जल संसाधन मंत्री
फरवरी 2021 में नीतीश सरकार के पुनर्गठन के बाद उन्होंने दूसरी बार जल संसाधन विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में पदभार संभाला। 2022 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 9 अगस्त 2022 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत एनडीए (NDA) से नाता तोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के साथ मिलकर ‘महागठबंधन’ की सरकार बनाई थी। तब वे तीसरी बार जल संसाधन मंत्री बने और जनवरी 2024 तक इस पद पर रहे।
बाढ़ की समस्या और सियासी प्लान!
जल संसाधन मंत्री रहते संजय झा ने बाढ़ से निजात दिलाने का वादा भी करते रहे हैं। इनमें फरक्का जलसंधि भी शामिल था जिसके कारण उत्तर बिहार में बाढ़ आता रहा है। इसके साथ साथ संजय झा ने बिहार को बाढ़ की समस्या से स्थायी निजात दिलाने और बेहतर जल प्रबंधन के लिए नदियों का अंतःसंयोजन योजना की भी बात कही थी। इसके तहत कोसी, बागमती और कमला जैसी नदियों के बेसिन को आपस में जोड़ने के प्रस्ताव भी रखे गए। अब जब फरक्का जलसंधि की तारीख खत्म होने को है तो संजय झा ने साफ साफ फरक्का संधि को ना कह दिया है।







