दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे हैं. लेकिन पेपर लीक मामले और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल भी अपना प्रदर्शन तेज कर रहे हैं. लेकिन इस आंदोलन के बीच रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर अभी भी जंतर-मंतर से दूरी बनाए हुए हैं. लेकिन किशोर अभी कहां बिजी हैं?
बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव कराए जा रहे हैं. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी खुद इस सीट से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बांकीपुर सीट से विधायक थे, लेकिन पिछले दिनों राज्यसभा जाने के बाद उन्होंने विधायकी छोड़ दी, जिस वजह से इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है. बांकीपुर में 30 जुलाई को वोटिंग कराई जानी और 3 अगस्त को काउंटिंग होगी.
पहली बार सियासी समर में PK
प्रशांत किशोर इसी सीट से पहली बार किसी सियासी समर में खुद उतर रहे हैं, ऐसे में उन्होंने अपना पूरा फोकस बांकीपुर में कर रखा है. अपनी पहली सियासी जीत का स्वाद चखने के लिए किशोर ने अब छात्रों का सहारा लेना शुरू कर दिया है.
जंतर-मंतर से दूरी बनाए रखने वाले किशोर ने कल बुधवार को पटना में प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज से घायल कुछ छात्रों से मुलाकात की. छात्रों पर लाठीचार्ज के दौरान उसमें से घायल कुछ छात्र बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं.
पटना लाठीचार्ज के घायलों से मुलाकात
बांकीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान ये छात्र किशोर से मुलाकात के लिए उनके मंच पर पहुंच गए और मंच से ही बीजेपी के खिलाफ वोट देने की अपील कर डाली.
खुद, किशोर भी पटना में लाठीचार्ज को बांकीपुर चुनाव से जोड़ रहे हैं. पार्टी का कहना है कि छात्रों पर लाठीचार्ज का जवाब बांकीपुर में बीजेपी की हार से मिलेगा. वहीं किशोर के मंच पर मौजूद एक घायल छात्र ने कहा कि लाठीचार्ज में कई छात्र घायल हुए हैं. उनके हाथ-पैर तोड़ दिए गए हैं. कई लोग घायल हुए हैं. हमें अब बीजेपी सरकार को बनाना नहीं है बिगाड़ना है.
छात्र तो इस्तीफा मांगेंगे हीः किशोेर
एक अन्य छात्र ने कहा कि अगर आप लोग अभी बीजेपी के चक्कर में पड़े हैं तो आप लोग ऐसा मत करिए. बांकीपुर सीट से प्रशांत किशोर को जिताइए. बीजेपी को जीतने न दीजिए नहीं तो वो बर्बाद कर देगी.
लाठीचार्ज को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा, “अगर आप बच्चों को मरवाइएगा. जिन बच्चों और उनके माता-पिता ने वोट देकर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनवाया है, वो निश्चित तौर पर इस्तीफा मांगेंगे. युवाओं ने धर्मेंद्र प्रधान का भी इस्तीफा मांगा है. अगर आप नहीं हटाना चाह रहे. शिक्षा माफिया पर कार्रवाई नहीं कर रहे या फिर पेपर लीक पर कुछ नहीं कर रहे, ऐसे में गुनहगारों को बचाएंगे तो युवा सरकार के खिलाफ जाएंगे ही.”
उन्होंने आगे कहा, “यह प्रदर्शन सिर्फ जंतर-मंतर पर ही नहीं हुआ बल्कि देश के कोने-कोने में हुआ है. देश के साथी अब बात कर रहे हैं कि जिस तरह से छात्रों को पिटवाया गया है उसका असर बांकीपुर में दिखेगा. बेंगलुरु में दिखेगा. केरल में दिखेगा और गुजरात में भी दिखेगा.”
किशोर ने जंतर-मंतर से दूरी बनाए रखी, लेकिन उपचुनाव के लिए जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे आंदोलन तेज होता जा रहा है. रणनीतिकार से नेता बने किशोर को लग रहा है कि छात्र आंदोलन से बीजेपी के खिलाफ माहौल बन रहा है, शायद यही वजह है कि उनकी नजर अपने चुनाव प्रचार में छात्रों को लाकर अपना सियासी माहौल सेट करने पर है.





