दिल्ली में प्रदर्शन की आग 22 जुलाई को पटना भी पहुंच गई। यहां पर ऐसा प्रदर्शन होगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। वाम दल के छात्र संगठन आइसा के बैनर तले इस प्रदर्शन की शुरुआत जब गांधी मैदान के गेट नंबर दस से हुई तो लगभग 200 लड़के थे। जेपी गोलंबर तक यह संख्या पांच सौ हो गई। पटना पुलिस की टीम ने बैरिकेडिंग कर रोक दिया लेकिन यह लोग नहीं माने। प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। कई पत्रकारों के साथ मारपीट की। कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हुई। दो घंटे में हालात सामान्य हो गए। करीब एक घंटे के अंदर प्रदर्शनकारी पुलिस को चक्मा देते हुए डाकबंगला चौराहा पर जुट गए। यहां पर 10 हजार प्रदर्शनकारी जमा हुए। यहां पर आइसा के अलावा अन्य छात्र संगठन के कार्यकर्ता भी जमा हुए। पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका तो प्रदर्शनकारी पथराव करने लगे। कई पुलिसकर्मियों का सिर फट गया।
पुलिस इस भीड़ को कंट्रोल नहीं कर पाई। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर इनकम टैक्स पहुंचे। यहां से सीधे भाजपा दफ्तर पर हमला बोला। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर बढ़े। मंत्री रामकृपाल यादव के आवास पर चढ़ गए। वहां पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को पीटा। उनकी गाड़ी से शीशे तोड़ दिए। इसके बाद लोकभवन की ओर बढ़ने लगे। लेकिन, सुरक्षाकर्मियों ने इन्हें रोक लिया। पुलिस ने बलप्रयोग किया। बीएसएफ और सीआईएसएफ की टीम भी पहुंच गई। आंसू गैस के गोले भी दागे गए। इधर, विधानसभा को लॉक कर दिया गया। अंदर और बाहर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी जमा हो गए। शाम तक हालात पुलिस के कंट्रोल में आ गया था।
मंत्री के घर पर भी चढ़ गए उपद्रवी
इधर, मंत्री रामकृपाल यादव ने आरोप लगाया कि यह लोग छात्र नहीं थे। ऐसा लग रहा था कि किसी सुनियोजित साजिश के तहत यह लोग ऐसा कर रहे थे। अधेड़ उम्र के प्रदर्शनकारी छात्र नहीं होते हैं। इन्हें किसी ने प्लान करके भेजा था। कई लोग बाहर के लग रहे थे। धार्मिक नारे तक लगा रहे थे। पुलिस को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। साजिश करने वालों को कड़ी सजा देनी चाहिए। ताकि भविष्य में कोई पटना का माहौल खराब करने की कोशिश नहीं करे।
500 अज्ञात पर प्राथमिकी, पत्थर कहां से आए?
पटना एसएसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, 500 अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। करीब 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। अन्य जिलों में भी अलर्ट भेज दिया गया है। इधर, सूत्रों की मानें तो 21 जुलाई की रात प्रदर्शनकारियों के एक गुट को दिल्ली से मैसेज आया था। अलग-अलग समय में भीड़ जुटाने का निर्देश दिया गया था। ताकि पुलिस को भीड़ का असली अंदाजा नहीं लगाया जा सके। कुछ फंडिंग की भी बात सामने आ रही है। पटना पुलिस इसकी भी जांच कर रही है कि आखिर उपद्रव के लिए प्रदर्शनकारियों को मैसेज कहां से आया था। पटना पुलिस का कहना है कि पथराव के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिस पत्थर का उपयोग किया, वह यहां पटना में नहीं मिलते। यानी यह पत्थर भी बाहर से यहां पहुंचाया गया। सोशल मीडिया पर भी मुहिम चलाई गई। इसकी भी जांच की जा रही है। कई लोगों का वीडियो पटना पुलिस को हाथ लगा है, जिसकी जांच की जा रही है। फिलहाल पटना में अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों को भी उतारा गया है।







