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इसरो से पलायन के बीच नियमों की कठोरता बस तात्कालिक उपाय हैं!

UB India News by UB India News
July 18, 2026
in अंतरिक्ष, खास खबर, संपादकीय
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इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, प्रक्षेपण के बाद तकनीकी समस्या,जांच जारी………..
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों और अभियंताओं के बढ़ते पलायन के बीच अंतरिक्ष विभाग द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे के नियमों को कठोर बनाने का निर्णय यह स्पष्ट संकेत है कि देश की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल नई तकनीकों का विकास नहीं, बल्कि उन प्रतिभाशाली लोगों को संस्थान से जोड़े रखना भी है, जिनकी बुद्धिमत्ता, अनुभव और प्रतिबद्धता ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया है।

नए निर्देशों के अनुसार, इसरो के प्रमुख केंद्रों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे की प्रक्रिया पर केंद्र निदेशक अब अपने स्तर पर ग्रुप-ए वैज्ञानिकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकेंगे। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अहम परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिक अचानक संस्था न छोड़ें और राष्ट्रीय हितों से जुड़े कार्यक्रम प्रभावित न हों। यह कदम उचित प्रतीत होता है, क्योंकि अंतरिक्ष कार्यक्रम वर्षों की योजना, टीमवर्क और विशेषज्ञता पर आधारित होते हैं।

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किसी अनुभवी वैज्ञानिक के अचानक चले जाने से मिशनों की समय-सीमा, तकनीकी निरंतरता और ज्ञान के हस्तांतरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर तब, जब भारत गगनयान, पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान, अगली पीढ़ी के संचार एवं पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों तथा अंतरिक्ष स्टेशन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रहा है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने के बाद अनेक निजी स्टार्टअप के उदय ने अंतरिक्ष उद्योग को नई गति दी है। स्वाभाविक है कि इन कंपनियों को अनुभवी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की आवश्यकता होगी और इसरो उनके लिए प्रतिभा का सबसे बड़ा स्रोत बन रहा है। आकर्षक वेतन, तेज निर्णय प्रक्रिया और नवाचार की स्वतंत्रता कई वैज्ञानिकों को आकर्षित भी कर रही है। हालांकि विश्व की अग्रणी संस्थाओं में प्रतिभा को रोकने के लिए सिर्फ वेतन ही निर्णायक नहीं होता।

अनुसंधान की स्वतंत्रता, उत्कृष्ट प्रयोगशालाएं, स्पष्ट कॅरिअर प्रगति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नेतृत्व में पारदर्शिता, उपलब्धियों की समय पर मान्यता और पारिवारिक जीवन के अनुकूल कार्य-संस्कृति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में, अधिक लचीली सेवा शर्तें, उत्कृष्ट प्रदर्शन पर विशेष प्रोत्साहन, परियोजना आधारित प्रोत्साहन राशि, निजी उद्योग के साथ अनुसंधान, सीमित अवधि की औद्योगिक प्रतिनियुक्ति तथा बाद में इसरो में वापसी जैसी व्यवस्थाओं पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

नया निर्देश तात्कालिक आवश्यकता की पूर्ति कर सकता है, किंतु स्थायी समाधान तभी निकलेगा, जब प्रतिभा संरक्षण को संस्थागत सुधार, वैज्ञानिक स्वायत्तता और मानव संसाधन विकास के व्यापक दृष्टिकोण से भी देखा जाए।

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