संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति साफ कर दी है. पार्टी की पार्लियामेंट्री स्ट्रेटजी कमेटी की करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक के बाद महासचिव जयराम रमेश और सांसद नासिर हुसैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को लाने की तैयारी में है, कांग्रेस उनका विरोध करेगी. पार्टी ने परिसीमन, संविधान संशोधन, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’, एफसीआरए संशोधन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों का विरोध करने का ऐलान किया है.
सरकार ने अब तक विधेयकों की जानकारी नहीं दी
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से यह नहीं बताया है कि मानसून सत्र में कौन-कौन से विधेयक पेश किए जाएंगे. इसी वजह से संभावित विधेयकों पर विस्तार से चर्चा की गई. उन्होंने कहा कि 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार से इस संबंध में जानकारी मांगी जाएगी. इसके अलावा उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी मांगा जाएगा.
‘सर्वदलीय बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह गई’
कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. जयराम रमेश ने कहा कि यह बैठक अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है. उनके मुताबिक, वहां कई नेता अपनी बात रखते हैं, लेकिन आखिर में फैसले कुछ ही लोग लेते हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष की राय को गंभीरता से नहीं लिया जाता.
परिसीमन और संविधान संशोधन का होगा विरोध
कांग्रेस ने कहा कि यदि सरकार परिसीमन (Delimitation) विधेयक लाती है तो उसका पूरी ताकत से विरोध किया जाएगा. पार्टी इस मुद्दे पर पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश करेगी. साथ ही संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव का भी विरोध किया जाएगा. जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक दलों को तोड़कर और अन्य तरीकों से लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि यह संविधान की भावना के खिलाफ है और कांग्रेस इसका विरोध करेगी.
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और अन्य विधेयकों पर भी आपत्ति
बैठक में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (ONOE) से जुड़े प्रस्ताव और उस पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस ने कहा कि वह इस प्रस्ताव का भी विरोध करेगी. इसके अलावा सांसदों, विधायकों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री के चुनाव एक साथ कराने से जुड़े किसी भी विधेयक का समर्थन नहीं किया जाएगा.
पार्टी ने एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध करने का फैसला किया है. कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री अन्न योजना इसी कानून के आधार पर संचालित होती है और इसमें बदलाव उचित नहीं होगा.
विपक्षी दलों से संपर्क में कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पार्टी उन सभी विपक्षी दलों के संपर्क में है, जिन्होंने पहले भी परिसीमन का विरोध किया था. उनका कहना है कि संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी. कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जिन भी प्रमुख विधेयकों के आने की संभावना है, उनमें से किसी का भी समर्थन करने की स्थिति में पार्टी नहीं है.







