फीफा वर्ल्ड कप 2026 की दूसरी फाइनलिस्ट का फैसला आज रात को हो जाएगा, दूसरे सेमीफाइनल में लियोनल मेसी की अर्जेंटीना का सामना इंग्लैंड के साथ होगा, जो अपने स्टार गोलकीपर के दम पर आज पूरी दुनिया को हैरान कर सकती है. अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज को भेद पाना भी इंग्लैंड के खिलाड़ियों के लिए बहुत मुश्किल होगा. इंग्लैंड के गोलकीपर की भूमिका में जॉर्डन पिकफोर्ड होंगे, दोनों अपने देश के लिए बतौर गोलकीपर सबसे ज्यादा मैच खेलने का रिकॉर्ड बना चुके हैं. वे इंग्लिश प्रीमियर लीग के स्टार हैं.
फुटबॉल में गोलकीपर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, बेशक स्ट्राइकर्स की स्किल्स स्ट्रेंथ और टीम वर्क से गोल होता है लेकिन ये कितना भी शानदार हो, एक अच्छा गोलकीपर इसे जब फेल करे तो विरोधी टीम पर दबाव आ जाता है. सामने जब अर्जेंटीना के एमिलियानो मार्टिनेज और इंग्लैंड के जॉर्डन पिकफोर्ड जैसे गोलकीपर हों तो फिर स्ट्राइकर्स पर मानसिक दबाव तो आ ही जाता है. दूसरे सेमीफाइनल में भी ये साफ नजर आने वाला है.
आंकड़ों में कौन बेहतर?
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में एमिलियानो मार्टिनेज और जॉर्डन पिकफोर्ड ने 6-6 मैच खेले हैं, आंकड़ों में दोनों एक ही स्थान पर खड़े नजर आते हैं. अर्जेंटीना के मार्टिनेज ने 6 मैचों में 2 क्लीन शीट्स किए, 8 बचाव किए. उन्होंने अपने देश के लिए 65 मैच खेले हैं, 33 वर्षीय मार्टिनेज काफी अनुभवी हैं.
दूसरी तरफ इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड के पास भी काफी अनुभव है, जिन्होंने अपने देश के लिए 90 मैच खेले हैं. 32 वर्षीय पिकफोर्ड ने इस वर्ल्ड कप 6 मैचों में 2 क्लीन शीट्स किए और 12 बचाव किए, जो इंग्लैंड की सफलता में अहम पहलू रहा.
इंग्लैंड के जॉर्डन पिकफोर्ड को अपने गेम कंट्रोल के लिए जाना जाता है. दूसरी तरफ मार्टिनेज के सामने होने से ही स्ट्राइकर दबाव में आ जाता है. अर्जेंटीना की तगड़ी डिफेंस मार्टिनेज के रोल को आसान बना देती है, जिसे भेदना किसी के लिए भी मुश्किल रहता है. देखा जाए तो पिकफोर्ड और मार्टिनेज का नियमित खेल के दौरान पलड़ा बराबर का नजर आता है, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना के स्टार मार्टिनेज आगे नजर आते हैं.
1962 में हुई थी पहली भिड़ंत
इंग्लैंड और अर्जेंटीना पहली बार वर्ष 1962 में विश्व कप में आमने-सामने हुए थे। जब इंग्लैंड ने ग्रुप चरण में 3-1 से जीत हासिल की थी, टीमों ने 1966 के क्वार्टर फाइनल में वेम्बली में प्रतिद्वंद्विता की नींव रखी थी। इंग्लैंड ने उस मैच में 1-0 से जीत हासिल की, जिसे ज्योफ हर्स्ट के देर से विजेता के रूप में कम, अर्जेंटीना के कप्तान एंटोनियो रैटिन की बर्खास्तगी के लिए याद किया जाता है। इस मुकाबले में इंग्लैंड ने ट्रॉफी तो जीत ली थी, लेकिन उस मुकाबले की खराब भावना दशकों तक बनी रही। अब 20 वर्ष बाद मेक्सिको सिटी के एज्टेका स्टेडियम में फाइनल में जगह बनाने की जंग होगी।
अर्जेंटीना के मैनेजर को खास रिकॉर्ड
बता दें कि स्वीट्जरलैंड को हराने के बाद अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गई है। इसी के साथ ही लियोनेल स्कालोनी ने एक बार फिर रिकॉर्ड तोड़ने के साथ ही नेशनल टीम के इतिहास के सबसे अहम मैनेजरों में अपनी जगह पक्की कर ली है। स्विट्जरलैंड के खिलाफ मैच लियोनेल स्कालोनी का नेशनल टीम के कोच के तौर पर 13वां वर्ल्ड कप मैच था।
उन्होंने वर्ष 1978 वर्ल्ड कप चैंपियन सीजर लुइस मेनोट्टी का रिकॉर्ड तोड़ा है। सीजर लुइस मेनोट्टी ने 12 वर्ल्ड कप मैचों में टीम को संभाला था। अब लियोनेल स्कालोनी की नजर कार्लोस साल्वाडोर बिलार्डो से आगे निकलने पर है। कार्लोस साल्वाडोर बिलार्डो ने 14 वर्ल्ड कप मैचों में टीम को संभाला है। इनके बाद अब दूसरे नंबर पर लियोनेल स्कालोनी ही हैं।
फ्रांस का सेमीफाइनल में सफर समाप्त
फीफा विश्व कप 2026 में फ्रांस का सफर समाप्त हो गया है। टूर्नामेंट में अभी तक अपने सभी मैच जीतने वाली फ्रांस को सेमीफाइनल में हार झेलनी पड़ी। इस मुकाबले में उसकी टक्कर स्पेन से थी। स्पेन ने सेमीफाइनल को 2-0 से जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की। 2010 की चैंपियन स्पेन का यह फीफा विश्व कप में दूसरा फाइनल होगा। फ्रांस की टीम फीफा विश्व कप में लगातार तीसरा फाइनल खेलना चाहती थी कि उनका सपना टूट गया।
पेनल्टी पर स्पेन ने पहला गोल दागा
स्पेन ने मैच के 22वें मिनट में ही बढ़त बना ली। टीम को पेनल्टी मिली और स्ट्राइकर मिकेल ओयारजाबल ने इसपर गोल दाग दिया। ओयारजाबल का यह टूर्नामेंट में 5वां गोल था। लुकास डिग्ने ने लामिन यमाल पर बॉक्स के अंदर फाउन किया था। इसकी वजह से स्पेन को पेनल्टी मिली। डिफेंडर की भूमिका में खेलने वाले पेड्रो पोरो ने 58वें मिनट में स्पेन की बढ़त को दोगुनी कर दी।
स्पेन 2010 में खिताब जीत चुका
2010 में स्पेन ने पहली बार फीफा विश्व कप का खिताब जीता था। उसके बाद से तीन टूर्नामेंट में उसका प्रदर्शन काफी साधारण था। 2014 में टीम ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई थी। 2018 और 2022 में राउंड ऑफ 16 में सफर समाप्त हो गया था। तीनों टूर्नामेंट को मिलाकर उसे सिर्फ तीन ही जीत मिली थी। इस बार केप वेर्डे ने पहले ही मैच में स्पेन को गोल नहीं करने दिया और ड्रॉ पर रोक दिया। लेकिन उसके बाद टीम ने एक के बाद एक लगातार जीत हासिल करके फाइनल में जगह पक्की कर ली है। जहां स्पेन का मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा।







