सूबे के विश्वविद्यालयों में नया पीजी रेगुलेशन लागू हो गया है। इसके तहत एक वर्षीय और दो वर्षीय कोर्स की फीस तय कर दी गयी है। राज्यपाल सह कुलाधिपति सय्यद अता हसनैन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप एक वर्षीय (दो सेमेस्टर) और दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) पीजी कार्यक्रमों के लिए यूनिफॉर्म ऑर्डिनेंस एवं रेगुलेशन-2026 को मंजूरी दे दी है।
इसके साथ ही वर्ष 2018 से लागू च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के पुराने नियम समाप्त हो गये हैं। यह व्यवस्था बिहार के सभी राज्य विवि में लागू होगी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, बिहार पशु विज्ञान विवि, एनओयू, एकेयू व कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि इससे बाहर रहेंगे। नये रेगुलेशन के लागू होने से बिहार के सभी राज्य विवि में पीजी की प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और फीस व्यवस्था में एकरूपता आयेगी तथा विद्यार्थियों को पूरे राज्य में समान शैक्षणिक ढांचे का लाभ मिलेगा। नये रेगुलेशन के तहत चार वर्षीय स्नातक पूरा करने वाले विद्यार्थी एक वर्षीय पीजी में नामांकन लेंगे। जबकि तीन वर्षीय स्नातक करने वाले छात्रों के लिए दो वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम होगा। दोनों कोर्स के लिए पूरे राज्य में एक समान फीस संरचना लागू होगी।
इस प्रकार होंगे शुल्क: एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम में पहले सेमेस्टर के लिए 46 सौ, जबकि दूसरे सेमेस्टर में 35 सौ रुपये देने होंगे। पूरे एक वर्षीय कोर्स के लिए सामान्य शुल्क 8100 रुपये होगा। दो वर्षीय पीजी में पहले सेमेस्टर के लिए 46 सौ जबकि दूसरे, तीसरे और चौथे सेमेस्टर में 3500-3500 रुपये शुल्क देना होगा। पूरे दो वर्षीय पीजी कोर्स के लिए कुल शुल्क 15100 रुपये तय हुए हैं।
प्रैक्टिकल फीस एक हजार होगी : जिन विषयों में प्रायोगिक कक्षाएं होंगी, वहां 1000 रुपये प्रति सेमेस्टर प्रैक्टिकल फीस देनी होगी। फील्ड वर्क अथवा रिसर्च प्रोजेक्ट वाले पाठ्यक्रमों में 2000 रुपये एकमुश्त अतिरिक्त लिये जायेंगे। प्रत्येक सेमेस्टर में 500 रुपये शुल्क और 600 रुपये ट्यूशन फीस निर्धारित की गयी है।







