चीन में इन दिनों दिलचस्प वाकया देखा गया है। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत में चीन के राजदूत शू फेईहोंग पर ‘देशद्रोही’ होने का ठप्पा लगा दिया गया है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ‘वीबो’ पर उनके बारे में आपत्तिजनक कॉमेंट किए गये हैं और उन्हें ‘गद्दार’ कहा जा रहा है। एक कमेंट नें कहा गया है ‘लगता है राजदूत अपना काम भूल गये हैं।’ एक और यूजर ने लिखा ‘उन्हें कोई दूसरा काम दे दो। अभी वे जो कर रहे हैं उससे कहीं बेहतर योगदान तो सड़कों पर झाड़ू लगाने से भी हो सकता है।’
‘वीबो’ पर एक और कॉमेंट में कहा गया है ‘राजदूत भारत के प्रति सचमुच ‘देशभक्त’ हैं। लाखों भारतीय ‘कॉकरोचों’ को चीन में घुसने देकर वे चीन को बर्बाद कर रहे हैं और हमारे देश को प्रदूषित कर रहे हैं। वे देशद्रोही हैं जिन्होंने देश को बेच दिया है।’ वहीं एक और यूजर ने लिखा ‘क्या भारत अब भी हमें दुश्मन देश नहीं मानता?’
अपने ही राजदूत पर क्यों फूटा चीनियों का गुस्सा?
इस गुस्से की शुरूआत तब हुई जब दिल्ली स्थिति चीनी दूतावास ने एक ट्वीट में बताया कि उसने इस साल की पहली तिमाही में 85 हजार भारतीयों को वीजा जारी किए हैं जो 2020 में गलवान संकट के बाद सबसे ज्यादा है। इसके बाद चीन के लोगों का कहना है कि भारत अभी भी चीन के लोगों के लिए ज्यादा वीजा जारी नहीं कर रहा है जबकि चीन ने भारतियों के लिए अपना दरवाजा खोल दिया है। कई लोगों ने चीन की ‘भारत के प्रति ज्यादा खुली वीजा नीति’ के लिए राजदूत को जिम्मेदार ठहराया और कुछ ने तो उन्हें भारत से वापस बुलाने की मांग कर डाली है।
स्टार्ट न्यूज ग्लोबल के मुताबिक दिलचस्प बात ये है कि चीनी दूतावास ने अपने राजदूत का बचाव करने के बजाए एक और आंकड़ा जारी कर दिया। इसमें कहा गया है कि ‘भारतीय नागरिकों को जारी किए गए 80 प्रतिशत से ज्यादा वीजा बिजनेस वीजा थे यानी वे व्यापार करने, खरीदने और बेचने के लिए चीन आ रहे थे जो चीन की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है।’
उन्होंने माना कि चीनी नागरिकों के प्रति भारत की वीजा नीति अभी भी सख्त है लेकिन तर्क दिया कि नई दिल्ली की नीतियां बदल रही हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि वीजा के मुद्दों को भावनात्मक अभियान में बदलने से दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिशों को नुकसान ही पहुंचेगा।
सोशल मीडिया यूजर्स को चेतावनी
स्टार्ट न्यूज ग्लोबल की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी दूतावास ने चीनी सोशल मीडिया को भी चेतावनी दी और उन पर भारत के बारे में नकारात्मक और सनसनीखेज कंटेंट शेयर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी पोस्ट रूढ़िवादी सोच को बढ़ावा देती हैं और व्यूज पाने के लिए देशभक्ति की भावनाओं का गलत इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार ‘एक आत्मविश्वास से भरी और खुली बड़ी ताकत’ वाली सोच को नहीं दिखाता।
लेकिन दूसरी तरफ चीन ने एक अकाउंट से कहा गया और जिसे बहुत ज्यादा शेयर किया गया है वो ये कि चीनी राजदूत के चीनी भाषा में बोलते हुए वीडियो मिलना मुश्किल है और उन पर आरोप लगाया गया कि वे जब भी हो सके अंग्रेजी को प्राथमिकता देते हैं। यूजर ने सवाल उठाया कि राजदूत ने ‘अंतर्राष्ट्रीय चीनी भाषा दिवस’ के कार्यक्रमों के दौरान भी अंग्रेजी में बात क्यों की जबकि चीनी भाषा ही स्वाभाविक पसंद होनी चाहिए थी।







