भारत की शासन व्यवस्था से परिचित लोग यह कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी सक्षम नेतृत्वकर्ता सिद्ध हुए हैं। उनके नेतृत्व में बीते 12 वर्षों के दौरान भारत ने अद्भुत प्रगति की है। बुनियादी ढांचे से लेकर गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य देखभाल, उद्योग, कृषि, विदेश नीति, रक्षा और डिजिटल इंडिया हो या सामाजिक क्षेत्र में हासिल उपलब्धियां इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इन्हीं उपलब्धियों के दम पर वे भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।
उनकी सफलताओं की सूची को एक स्तंभ में समेटना बहुत मुश्किल है। ऐसे में सर्वाधिक उल्लेखनीय पहलू को रेखांकित करना ही सबसे उचित होगा, जिसने उनकी एक अलग पहचान बनाई। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के साथ ही गरीब और हाशिए पर मौजूद वंचित वर्गों को अपनी प्राथमिकता बनाया और उनके उत्थान के लिए ऐसी योजनाएं बनाकर उन्हें धरातल पर उतारा, जिससे इन वर्गों के जीवन की गुणवत्ता सुधरी है। उनके नेतृत्व में की गईं कई पहल संविधान के भाग चार में उल्लिखित राज्य नीति के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत उन उद्देश्यों से ही प्रेरित हैं, जो कल्याणकारी राज्य बनाने और विशेष रूप से गरीबों के लिए जीवन को सुगम बनाने का प्रयास करती हैं।
मोदी की पहली क्रांतिकारी पहल थी प्रधानमंत्री जन धन योजना। इसने वित्तीय समावेशन में एक नई क्रांति की। इसका यह बिंदु और भी संतोषजनक है कि जनधन में 56 प्रतिशत खाताधारक महिलाएं हैं। इसने देश की आधी आबादी के लिए वित्तीय स्वतंत्रता की राह प्रशस्त की है। इसी क्रम में मोदी का अगला बड़ा विचार था स्वच्छ भारत मिशन। इसके अंतर्गत गरीब परिवारों को शौचालयों के निर्माण के लिए सब्सिडी प्रदान की गई। ऐसा ही एक कार्यक्रम रहा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों को सब्सिडी वाली रसोई गैस उपलब्ध कराना था। इस योजना के जरिये 10.5 करोड़ परिवार लाभार्थी बने हैं। यह सही है कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण सब्सिडी वाले सिलिंडरों की संख्या में कटौती की गई, लेकिन उम्मीद है कि जब पेट्रोलियम उत्पादों का प्रवाह सामान्य होगा, तो इसे बहाल किया जाएगा। हर घर नल से जल कार्यक्रम भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जिसका उद्देश्य सभी ग्रामीण परिवारों को पाइप से पानी की आपूर्ति करना है। अब तक 19 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 73 प्रतिशत के पास यह सुविधा पहुंचाई जा चुकी है।
कोविड काल में संघर्ष कर रहे लोगों को सहारा देने के लिए आरंभ की गई मुफ्त राशन योजना भी 81 करोड़ लोगों का सहारा बन चुकी है। इस योजना ने मुश्किल वक्त में गृहिणियों के समक्ष चुनौतियों को विकराल नहीं होने दिया। इन सभी योजनाओं का मर्म समझें तो इनकी संकल्पना कहीं न कहीं महिलाओं की मुश्किलों को ध्यान में रखकर की गई। जैसे गरीब ग्रामीण परिवारों में महिलाओं को शौच के लिए घर से बाहर और अक्सर गांव से बाहर तक जाना पड़ता था। शौचालय की सुविधा से उन्हें बड़ी राहत मिली। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी इकट्ठा करने के लिए दूर-दराज जाना पड़ता था और धुएं में खाना पकाना पड़ता था, लेकिन रसोई गैस से उनकी ये दुश्वारियां दूर होने के साथ ही भोजन पकाना भी कहीं आसान हो गया है।
सरकार ने विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण के लिए कानून को आगे बढ़ाने की भली मंशा दिखाने के साथ ही सशस्त्र बलों में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षित 17 महिला अधिकारियों का पहला बैच हाल ही में सशस्त्र बलों में कमीशन किया गया। महिलाओं के मुद्दों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता का सबसे अच्छा उदाहरण 2017 में मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन और महिलाओं के लिए पहले दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने का निर्णय रहा है। यह प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं की रोजगार और वेतन की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह कहना सर्वथा उचित होगा कि महिलाओं का सशक्तीकरण मोदी सरकार की नीतियों का आधार रहा है।
इन योजनाओं को व्यापक संवैधानिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो ये राज्य के नीति निदेशक तत्वों की अनुशंसाओं से प्रेरित हैं। जैसे कि संविधान का अनुच्छेद 42 उचित और मानवीय परिस्थितियों को सुनिश्चित करने और मातृत्व राहत प्रदान करने का निर्देश देता है। अनुच्छेद 43 एक निर्वाह योग्य पारिश्रमिक और सम्मानजनक जीवन स्तर सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। वहीं, अनुच्छेद 47 राज्य को सभी नागरिकों के लिए विशेष रूप से पोषण के अपेक्षित स्तर को बढ़ाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का स्पष्ट निर्देश देता है। इसलिए, चाहे 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की आपूर्ति हो, गरीबों और बुजुर्गों के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा, महिलाओं के लिए छह महीने का मातृत्व अवकाश, घरों में शौचालयों के निर्माण के लिए सब्सिडी या जन धन योजना हो, ये सभी संविधान द्वारा सुझाई गई राह के अनुरूप ही हैं।
विरोधियों की इस बात में कुछ तर्क हो सकता है कि प्रधानमंत्री देश में सामाजिक तनावों को पूरी तरह से सुलझा नहीं पाए हैं। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के रवैये को लेकर भी उनकी कुछ शिकायतें जायज हो सकती हैं। ये भी ऐसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर प्रधानमंत्री को समय के साथ ध्यान देना ही होगा। इसके बावजूद, विभिन्न क्षेत्रों में उनकी अभूतपूर्व उपलब्धियों का उन्हें श्रेय न देना संकीर्ण मानसिकता का उदाहरण ही कहा जाएगा। उनके नेतृत्व में भारत के वैश्विक पटल पर बढ़ रहे मान-सम्मान को देखते हुए भी उनका अंधविरोध स्वयं कमजोर पड़ जाता है। भारत का सर्वांगीण विकास आज हर क्षेत्र में स्पष्ट दिख रहा है, जिसकी चाहकर भी अनदेखी नहीं की जा सकती। इस वास्तविकता को झुठलाने वाले लोग स्वयं को ही अंधकार में रखने पर तुले हैं। देश की जनता आज एक नए और विकसित भारत में जी रही है।







