बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया गुरुवार को औपचारिक रूप से पूरी हो गई. नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया. इसके बाद निर्वाची पदाधिकारी ने पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के नए चेहरे पवन सिंह को लेकर रही, जिन्हें पहली बार पार्टी ने विधान परिषद भेजा है.
पहली बार विधान परिषद पहुंचे पवन सिंह
भाजपा ने इस बार विधान परिषद चुनाव में भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक पवन सिंह को उम्मीदवार बनाया था. नामांकन के बाद से ही उनकी उम्मीदवारी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। अब निर्विरोध निर्वाचन के साथ पवन सिंह का विधान परिषद पहुंचना तय हो गया है. माना जा रहा है कि पवन सिंह विधानपरिषद में अपने इलाके के लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे.
बीजेपी के चार उम्मीदवार हुए निर्वाचित
भारतीय जनता पार्टी के खाते से पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. इनमें संजय मयूख लगातार तीसरी बार विधान परिषद पहुंचे हैं, जबकि पवन सिंह और शीला पंडित के लिए यह नई राजनीतिक पारी की शुरुआत मानी जा रही है.
जेडीयू के चार उम्मीदवारों को भी मिली जीत
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन कुमार भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. पार्टी ने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था.
एलजेपी (रामविलास) और आरजेडी को भी एक-एक सीट
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुनील कुमार सिंह भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं. दोनों नेताओं का विधान परिषद पहुंचना पहले से लगभग तय माना जा रहा था.
नामांकन वापसी की समय सीमा तक नहीं हुआ कोई बदलाव
निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नामांकन वापसी का समय बुधवार शाम 3 बजे तक निर्धारित था. लेकिन, किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया. चूंकि जितनी सीटें थीं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया.
यूपी चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद के लिए उम्मीदवारों का चयन सिर्फ संगठनात्मक जरूरत नहीं, बल्कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति का भी हिस्सा है. खासकर पवन सिंह की एंट्री को भाजपा के बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है. भोजपुरी क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी भी दे सकती है, जिसका लाभ यूपी चुनाव में भी देखने को मिल सकता है. बहरहाल, सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन के साथ बिहार विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव बिना मतदान के ही संपन्न हो गया है.







