ईरानी अधिकारियों के नहीं आने के बाद इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ होने वाली दूसरे दौर की बैठक रद्द हो गई है। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिकी नौसेना होर्मुज ब्लॉकेड को नहीं हटाता है शांति वार्ता पर कोई बात नहीं होगी। पाकिस्तान के लिए ये बहुत बड़ा झटका है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप असीम मुनीर पर किसी भी तरह से ईरान को तैयार करवाने का प्रेशर बनाए हुए हैं। इससे नाराज ईरानी मीडिया ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ को ‘पोस्टमैन’ तक कहा है। इस बीच रिपोर्ट है कि पाकिस्तान ने ईरान को तैयार करने के लिए चीन को अपने साथ लिया है।
सीएनएन न्यूज 18 ने शीर्ष राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच अपनी मध्यस्थता की कोशिशों को मजबूत करने के लिए चीन से संपर्क किया है। पाकिस्तान की तरफ से ऐसा तब किया गया है जब तेहरान में इस बात को लेकर शक बढ़ रहा है कि इस्लामाबाद एक भरोसेमंद गारंटर के तौर पर काम कर पाएगा या नहीं। ईरानी मीडिया में असीम मुनीर की जमकर आलोचना की गई है और कहा गया है कि वो “सिर्फ अमेरिका की बातों को आगे रख रहे हैं।”
ईरान शांति वार्ता में चीन को शामिल क्यों करना चाहता पाकिस्तान?
सूत्रों के मुताबिक अभी एक छह-पॉइंट का “सैद्धांतिक” फ्रेमवर्क विचाराधीन है। इसे ईरान की मुख्य मांगों को पूरा करने और लंबे समय तक चलने वाली गारंटी देने के लिए डिजाइन किया गया है जिससे रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने में मदद मिल सके। न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह फ्रेमवर्क बीजिंग के साथ सलाह-मशविरा करके तैयार किया गया है और यह वॉशिंगटन और तेहरान के बीच नई बातचीत के लिए एक शुरुआती बिंदु का काम कर सकता है। पाकिस्तान ने चीन को शांति वार्ता में उस वक्त शामिल करने का फैसला किया है जब उसे पता चल गया है कि असीम मुनीर से ईरान को भरोस काफी कम हो गया है।
ईरानी वार्ताकार अब सिर्फ इस्लामाबाद पर निर्भर रहने को लेकर हिचकिचा रहे हैं और उन्होंने ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले भरोसे के लिए चीन की भागीदारी पर जोर दिया है। तेहरान ऐसी ठोस गारंटी चाहता है जो समय के साथ भी बनी रहे। एक शीर्ष राजनयिक सूत्र ने बताया कि चीन को यह गारंटी देने के लिए बेहतर स्थिति में माना जाता है। ईरान को पाकिस्तान से ज्यादा चीन पर भरोसा है। इसके अलावा चीन को शामिल करना एक रणनीतिक आवश्यकता के तौर पर भी देखा जा रहा है। बीजिंग के तेहरान के साथ घनिष्ठ संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी को देखते हुए उसकी मौजूदगी किसी भी प्रस्तावित व्यवस्था को विश्वसनीयता प्रदान कर सकती है।
पाकिस्तान-चीन का नया 6 सूत्रीय फ्रेमवर्क क्या है?
न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस प्रस्ताव की मुख्य रूपरेखा संघर्ष के मूल कारणों पर केंद्रित है जिसमें परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल निरस्त्रीकरण, सुरक्षा आश्वासन, दीर्घकालिक गारंटी और भविष्य के जुड़ाव के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप शामिल है। यह ढांचा एक संभावित समझौते की शर्तों को रेखांकित करने और संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक सहयोग का विस्तार करने का भी प्रयास करता है।
यह विशुद्ध रूप से सुरक्षा-आधारित सौदे से हटकर एक व्यापक, संबंधों पर आधारित व्यवस्था की ओर बदलाव का संकेत है। इसके अलावा चीन की भागीदारी सिर्फ कूटनीतिक ही नहीं बल्कि आर्थिक चिंताओं से भी प्रेरित है। सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव से बीजिंग काफी प्रभावित हुआ है। चीन जल्द से जल्द होर्मुज को खुलवाना चाहता है इसलिए वो भी चाहता है कि ईरान और अमेरिका के बीच स्थाई शांति वार्ता पर बात बन जाए।







