ADVERTISEMENT
Monday, August 17, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

सरकारी नौकरी की आस में वर्षों वक्त बर्बाद …………………

UB India News by UB India News
March 28, 2026
in कैरियर, खास खबर, शिक्षा
0
सरकारी नौकरी की आस में वर्षों वक्त बर्बाद …………………
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की हालिया प्रकाशित ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया रिपोर्ट- 2026’ में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 में देश का एक युवा स्नातक हर महीने लगभग 21,800 रुपये कमाता था, वहीं एक गैर-स्नातक की कमाई लगभग 9,000 रुपये थी, जबकि वर्ष 2023 तक आते-आते एक स्नातक की कमाई घटकर 19,573 रुपये रह गई, वहीं गैर-स्नातक की कमाई बढ़कर 10,507 रुपये हो गई। पिछले 12 वर्षों में स्नातक पास लोगों की कमाई आमतौर पर गिरी है। बढ़ी हुई महंगाई को इसमें समायोजित करें, तो उनकी कमाई खत्म हो गई है।

इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि भारत के 20 से 29 वर्ष के 67 प्रतिशत युवा स्नातक बेरोजगार हैं। साल 2004 में यह आंकड़ा सिर्फ 32 प्रतिशत था। दूसरी ओर, युवा स्नातकों की तादाद 2004 के 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में करीब 28 प्रतिशत हो गई है। ‘आईएलओ-आईएचडी इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024’ ने भी खुलासा किया था कि युवा स्नातकों में बेरोजगारी की दर 29 प्रतिशत है, जबकि अनपढ़ नौजवानों में यह दर सिर्फ तीन प्रतिशत पाई गई। स्नातक युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी की यह प्रवृत्ति पिछले एक दशक से पता चलने लगी है।

RELATED POSTS

बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत……..

कांग्रेस दफ्तर में पाप हुआ, सोनिया गांधी को कभी माफ नहीं करेगी जनता…

इसके कारण श्रम बाजार की मांग और आपूर्ति में निहित हैं। आपूर्ति पक्ष को देखें, तो पढ़े-लिखे युवा अब अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी का इंतजार करते हैं। दरअसल, पिछले दो दशकों में सभी आय-वर्ग के परिवारों की आमदनी बढ़ी है। कमाई बढ़ने से अब कम आय वाले परिवार भी अपनी संतानों के नौकरी पाने के इंतजार को बर्दाश्त कर सकते हैं। इससे तो यही साबित होता है कि लोग जितने ज्यादा शिक्षित होंगे, बेरोजगारी दर उतनी ही अधिक होगी!

हालांकि, यह इंतजार एक अलग रूप ले लेता है। बहुत सारे स्नातक सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लग जाते हैं। कई राज्य सरकारें तो लोक सेवा आयोग की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए रियायत भी देती हैं। साल 2013 से 2019 तक के तमिलनाडु लोक सेवा आयोग के आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन दर्शाता है कि साल 2018-2019 में, तमिलनाडु लोक सेवा आयोग के समूह-4 की एक ही भर्ती के लिए 1.37 करोड़ आवेदन आए। उस समय तमिलनाडु के लगभग 80 प्रतिशत बेरोजगार युवा इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवा निजी रोजगार को छोड़ दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति सभी राज्यों में है।

सवाल है कि सरकारी नौकरियों के प्रति इतनी दीवानगी आखिर क्यों है? इसके कारण हमारे रोजगार ढांचे में निहित हैं। एक सरकारी पद पा जाने पर पक्की नौकरी, निजी क्षेत्र की तुलना में ज्यादा वेतन (उदाहरण के लिए, एक सरकारी ड्राइवर निजी ड्राइवर से चार गुना ज्यादा वेतन पाता है), स्वास्थ्य बीमा और पेंशन लाभ के साथ निचले स्तर की सरकारी नौकरी से भी सामाजिक रुतबा बन जाता है। लड़कियों के मामले में तो सरकारी नौकरीशुदा के लिए भावी ससुराल पक्ष से तत्काल सहमति मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इन्हीं कारणों से युवा सरकारी नौकरी के लिए बार-बार कोशिश करते हैं, मगर निजी नौकरी की ओर नहीं जाते।

मांग के पहलू पर स्थिति ज्यादा गंभीर है। साल 2012 से 2019 के बीच देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) सालाना 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, लेकिन रोजगार-सृजन में केवल 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बड़े पैमाने पर रोजगार-सृजन करने वाले विनिर्माण क्षेत्र की कार्यबल में हिस्सेदारी दो दशकों से 12-14 प्रतिशत पर अटकी हुई है, जबकि उत्पादन में सालाना 7.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साल 2004 से 2023 के बीच भारत में सालाना 50 लाख स्नातक शिक्षण संस्थानों से निकले, जिनमें से हर साल केवल 28 लाख को रोजगार मिल पाया। इनमें से केवल 17 लाख को ही सरकारी नौकरियां मिलीं। भारत बड़े पैमाने पर उस ‘निर्यात-आधारित और श्रम-प्रधान’ विकास के रास्ते से चूक गया, जिसने कभी पूर्वी एशिया का कायाकल्प किया था।

साल 2021-22 से 2023-24 के बीच सृजित हुए 8.3 करोड़ काम के अवसरों में से लगभग आधे कृषि क्षेत्र में पैदा हुए थे, जिनमें आय कम थी, जिनकी उत्पादकता सीमित थी और करियर के लिहाज से आगे बढ़ने के खास अवसर न थे। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में यह बताया गया है कि केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही ऐसे पद पर कार्यरत हैं, जो उनकी योग्यता के अनुरूप है। लगभग आधे स्नातक प्राथमिक या अर्द्ध-कुशल श्रेणी के कार्यों में लगे हुए हैं। ये ऐसी नौकरियां नहीं हैं, जो ‘करके सीखने’, उत्पादकता या कौशल विकास के अवसर देती हों। ये ऐसी बंद गलियां हैं, जिनके लिए केवल डिग्री की आवश्यकता होती है।

हमारे श्रम कानून इस समस्या को और जटिल बना देते हैं। नियोक्ता स्थायी कर्मचारियों को नियुक्त करने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें वे आसानी से निकाल नहीं सकते। इसलिए उन्होंने संविदा के जरिये नौकरी सुरक्षा के कठोर कानूनों को दरकिनार कर दिया है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने इसकी शुरुआत की, जिसका अनुसरण अन्य क्षेत्रों ने किया। इसके विपरीत, अमेरिका में चार प्रतिशत बेरोजगारी दर के साथ-साथ नौकरियों में जबरदस्त गतिशीलता भी है। यहां करीब 20 प्रतिशत कर्मचारी लाभ और अनुभव के साथ साल में कई नौकरियां बदलते हैं।

इस समस्या से पार पाने के लिए नौकरी खोजने में कठिनाई और योग्यता के अनुकूल काम न मिलने की समस्या को कम करने की नीति अपनानी होगी। छोटे-छोटे स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम मांग व आपूर्ति बाजार को राहत दे सकते हैं। साथ ही रोजगार के लिए डिग्री के बजाय नियोक्ता के अनुकूल कौशल विकास अधिक सहायक होगा। श्रम बाजार की बेहतर जानकारी और आसानी से जॉब खोजने वाले पोर्टल आ जाएं, तो इस समस्या को सुलझाने में मददगार बन सकते हैं।

एक अन्य प्राथमिकता यह हो सकती है कि सरकारी नौकरियों में अत्यधिक सुविधाएं कम कर दी जाएं। इसके लिए कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि, संविदा नियुक्ति की शुरुआत और आउटसोर्सिंग में वृद्धि करनी होगी। स्थिति यह है कि हमारे स्नातक सरकारी नौकरी की आस में वर्षों का वक्त बर्बाद कर देते हैं, जबकि निजी क्षेत्र में रोजगार-सृजन कछुआ चाल से हो रहा है और कल्याणकारी नीतियों के लिए धन की कमी पड़ रही है। ऐसे में, हमें इस जटिल समस्या का कुछ न कुछ समाधान निकालना होगा।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत……..

बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत……..

by UB India News
August 17, 2026
0

हसन महमूद और मेहदी हसन मिराज की घातक गेंदबाजी से बांग्लादेश ने पहले टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट...

कांग्रेस दफ्तर में पाप हुआ, सोनिया गांधी को कभी माफ नहीं करेगी जनता…

कांग्रेस दफ्तर में पाप हुआ, सोनिया गांधी को कभी माफ नहीं करेगी जनता…

by UB India News
August 16, 2026
0

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम् पर कांग्रेस पार्टी के रवैये पर सीधा हमला...

झारखंड में JPSC-JSSC धांधली पर आर-पार के मूड में अभ्यर्थी………

झारखंड में JPSC-JSSC धांधली पर आर-पार के मूड में अभ्यर्थी………

by UB India News
August 16, 2026
0

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का गुस्सा अब...

होर्मुज को लेकर आई अच्छी खबर, ईरान और ओमान के बीच पक्की हुई डील !

होर्मुज को लेकर आई अच्छी खबर, ईरान और ओमान के बीच पक्की हुई डील !

by UB India News
August 16, 2026
0

होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही डील को लेकर अच्छी खबर आई है. बताया जा रहा...

पूरा क्यों नहीं गाया जाता था वंदे मातरम, किसने हटाए थे बाकी अंतरे?

पूरा क्यों नहीं गाया जाता था वंदे मातरम, किसने हटाए थे बाकी अंतरे?

by UB India News
August 16, 2026
0

बीते 15 अगस्त को देश ने अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया. इस दौरान पीएम मोदी से संबोधन से पहले राष्ट्रगीत...

Next Post
क्रिकेट का 65 दिवसीय धनतेरस……………….

क्रिकेट का 65 दिवसीय धनतेरस...................

भारत में बढ़ सकती है महंगाई !

भारत में बढ़ सकती है महंगाई !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend