मध्य पूर्व एशिया में पिछले 22 दिनों से जारी जंग ने एनर्जी मार्केट को हिलाकर रख दिया है. क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर/बैरल के करीब चल रही है, जबकि ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर/बैरल के पार पहुंच गया है. भारत के लिए भी कच्चे तेल का बास्केट महंगा पड़ रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पीपीएसी (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत मार्च में 117.09 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. बीते 19 मार्च को तो ये आंकड़ा $156.29 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचा. इस आंकड़े ने साल 2008 के उस रिकॉर्ड ($147/बैरल) को भी तोड़ दिया है, जिसे अब तक का सबसे उच्चतम स्तर माना जाता था.
महज 20 दिनों में 70% की भारी तेजी
फरवरी 2026 तक कच्चे तेल की स्थिति काफी नियंत्रण में थी और औसत भाव $69.01 प्रति बैरल के आसपास था. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से कीमतों में आग लग गई है. फरवरी की तुलना में 19 मार्च तक कच्चा तेल 48.08 डॉलर यानी करीब 69.67% महंगा हो चुका है. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85% तेल 40 अलग-अलग देशों से आयात करता है, इसलिए बढ़ते इम्पोर्ट बिल ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
भारत का प्लान-B: ‘एक्वा टाइटन’ ला रहा है राहत
इस अभूतपूर्व चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने अपनी ‘वैकल्पिक आयात व्यवस्था’ को सक्रिय कर दिया है. इसी कड़ी में, 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर रूसी टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ (Aqua Titan) शनिवार, 21 मार्च की रात तक न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुँचने वाला है. इससे पहले 18 मार्च को ‘जग लाडकी’ नामक जहाज मुंद्रा पोर्ट पर तेल की खेप उतार चुका है. पिछले 22 दिनों में भारत चार बड़े जहाजों के जरिए तेल और गैस का सुरक्षित स्टॉक जुटाने में कामयाब रहा है.
रूट डाइवर्सिफिकेशन से सुरक्षित हुई सप्लाई
पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश को आश्वस्त किया है कि भारत की क्रूड सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित (Secured) है. मंत्रालय के अनुसार, भारत की दैनिक खपत 55 लाख बैरल है, जिसे पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
सप्लाई रूट को बदल दिया गया है. अब भारत का 70% कच्चा तेल ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) के बजाय दूसरे सुरक्षित समुद्री मार्गों से आ रहा है. पहले यह आंकड़ा 55% था. सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं ताकि पेट्रोल और डीजल की किल्लत न हो.
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं, लेकिन सरकार के इस ‘डाइवर्सिफिकेशन’ और ‘रिजर्व स्टॉक’ मैनेजमेंट ने फिलहाल देश को बड़े तेल संकट से बचा रखा है.







