ईरान ने पहली बार अपनी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर हिंद महासागर में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मिसाइलें बेस तक नहीं पहुंच पाईं, लेकिन इस कदम ने साफ कर दिया है कि ईरान अब अपनी ताकत दूर-दूर तक दिखाने की कोशिश कर रहा है.
मिडिल-ईस्ट में जारी जंग की हलचल अब हिंद महासागर में भी देखने को मिल रही है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि ईरान ने चागोस द्वीपसमूह में डिएगो गार्सिया में मौजूद संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटेन सैन्य अड्डे की ओर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वाशिंगटन तेहरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को बंद करने के “बहुत करीब” है। इसके अलावा ब्रिटेन की ओर से अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे इस्तेमाल किए जाने की इजाजत देने पर ईरान ने ब्रिटेन के खिलाफ नाराजगी भी जाहिर की थी।
एक मिसाइल उड़ान में फेल, दूसरी को रोकने की कोशिश
अमेरिका के अनुसार पहली मिसाइल हवा में ही खराब हो गई. दूसरी मिसाइल की ओर एक अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर दागा. यह इंटरसेप्शन सफल हुआ या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं की गई है.
ईरान की मिसाइल रेंज पर उठे सवाल
डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर है. यह दूरी ईरान की घोषित मिसाइल क्षमता से कहीं ज्यादा है. ईरान ने पहले कहा था कि वह मिसाइलों की रेंज 2,000 किमी तक ही रखता है, लेकिन इस हमले ने उसकी क्षमताओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ शोध संस्थानों का दावा है कि ईरान के पास पहले से ही 3,000-4,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलें हो सकती हैं.
अमेरिका ने लॉन्च किया एसएम-3 इंटरसेप्टर
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, एक मिसाइल उड़ान के दौरान विफल हो गई, जबकि एक अमेरिकी युद्धपोत ने दूसरी मिसाइल पर एसएम-3 इंटरसेप्टर लॉन्च किया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अवरोधन सफल रहा या नहीं। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि मिसाइलें कब दागी गईं। बता दें कि SM-3 इंटरसेप्टर का उपयोग अमेरिकी नौसेना द्वारा छोटी से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। यह विस्फोटक हथियार के बजाय सरासर बल पर निर्भर करता है। इसका “किल व्हीकल” 600 मील प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करने वाले 10 टन के ट्रक की ताकत से लक्ष्य पर हमला करता है।
4000 किलोमीटर दूर है बेस
बता दें कि ईरान के द्वारा हमले का यह प्रयास बेहद अहम माना जा रहा है। क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर स्थित है। इससे पता चलता है कि ईरान की मिसाइल रेंज सार्वजनिक रूप से बताई गई सीमा से कहीं अधिक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले महीने कहा था कि देश ने अपनी मिसाइल रेंज को 2,000 किलोमीटर तक सीमित कर दिया है। डिएगो गार्सिया का बेस संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम द्वारा संयुक्त रूप से संचालित एक प्रमुख रणनीतिक सुविधा है।
क्या ईरान इतनी दूर मार करने वाली मिसाइल रखता है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि देश ने अपनी मिसाइलों की रेंज जानबूझकर 2,000 किमी तक सीमित रखी है. यह दावा ईरान बार‑बार दोहराता रहा है.
रिसर्च संस्थानों का क्या कहना है?
कई स्वतंत्र अनुसंधान केंद्रों का मत ईरान के दावे से अलग है. Iran Watch (Wisconsin Project) का कहना है कि ईरान के पास 4,000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलें होने की संभावना है.
वहीं Alma Research Center (Israel) मानता है कि ईरान की कुछ मिसाइलें 3,000 किमी तक पहुंच सकती हैं. इसके अलावा ईरान की नई मिसाइल ‘Kheibar/Khorramshahr‑4’ को 2,000 किमी रेंज बताया गया है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसका संभावित विस्तार 3,000-4,000 किमी तक मानते हैं.
हमले से क्या संकेत मिलता है?
डिएगो गार्सिया को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि ईरान ने या तो अपनी मिसाइल रेंज छुपाई थी, या फिर उसने उम्मीद से ज्यादा लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर ली हैं. यही बात अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनी है.
क्या मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचीं?
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार एक मिसाइल उड़ान में नाकाम रही, दूसरी मिसाइल को SM‑3 इंटरसेप्टर से रोकने की कोशिश हुई, लेकिन इंटरसेप्शन सफल हुआ या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं है. इसका मतलब यह हुआ कि ईरान की मिसाइलें अभी इतनी सटीक नहीं कि इतनी दूर स्थित लक्ष्य को हिट कर सकें.
क्या यह ईरान की मिसाइल क्षमता में बड़ा बदलाव है?
बिल्कुल. उसके तीन बड़े संकेत साबित हो रहे हैं.
1. मिसाइल रेंज ईरान की घोषित सीमा से कहीं अधिक निकली
4000 किमी दूर लक्ष्य चुनना यह दिखाता है कि ईरान के IRBM (Intermediate Range Ballistic Missiles) की क्षमता अब यूरोप और हिंद महासागर तक पहुंच सकती है.
2. सैन्य रणनीति में बड़ा संदेश
डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण अड्डा है. यहां बमवर्षक, पनडुब्बियां और मिसाइल डेस्ट्रॉयर तैनात हैं. इसे निशाना बनाना ईरान की लंबी दूरी की धमकियां दिखाता है.
3. रिसर्च संस्थानों की आशंकाएं सही साबित होती दिख रहीं
Iran Watch और अन्य संस्थानों की रिपोर्टें पहले से कह रही थीं कि ईरान की वास्तविक मिसाइल रेंज उसके दावों से कहीं ज्यादा है. अब डिएगो गार्सिया हमला उसी संभावना को मजबूती देता है.
कांग्रेस नेता ने जताई चिंता
ईरान के इस हमले ने न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है. भारत में भी कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ईरान के इस हमले पर आश्चर्य जताया है. उन्होंने X पर लिखा, ‘यदि ये रिपोर्ट सही हैं कि ईरान ने मध्य हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर हमला करने का प्रयास किया, तो ईरान ने दक्षिण की ओर हमला करते हुए युद्ध को और बढ़ा दिया है और पश्चिम को एक स्पष्ट संदेश दिया है.’
क्यों अहम है डिएगो गार्सिया?
बता दें कि डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद अहम बेस है, जहां बमवर्षक विमान, परमाणु-संचालित पनडुब्बियां और मिसाइल डेस्ट्रॉयर तैनात रहते हैं. यानी इस बेस को निशाना बनाना ईरान का एक सीधा संदेश माना जा रहा है कि वह अब मिडिल ईस्ट के बाहर भी अमेरिकी ठिकानों को चुनौती दे सकता है.
ब्रिटेन-मॉरीशस विवाद भी चर्चा में
इसी बीच डिएगो गार्सिया की संप्रभुता को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच बातचीत चल रही है. ब्रिटेन इस इलाके को मॉरीशस को सौंपने पर विचार कर रहा है, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन मिलकर चाहेंगे कि सैन्य बेस वहीं बना रहे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है.







